अमर की मस्त बीवी के साथ मजे-1

hindi sex stories हैल्लो दोस्तों, मेरी यह पहली स्टोरी है, यह स्टोरी मेरी और मेरे दोस्त कि बीवी के बीच की है। में और अमर बचपन से दोस्त थे, हम लोग पास-पास रहते थे और साथ खेलते थे, हम दोनों पढ़ने में बहुत तेज़ थे और हमेशा क्लास में पहली या दूसरी पोज़िशन लाते थे। फिर इंटर पास करने के बाद हम दोनों का एड्मिशन एक ही इंजिनियरिंग कॉलेज में हो गया और हम दोनों एक ही कमरे में रहते थे। फिर हम दोनों अच्छे नम्बरों से पास होते चले गये और इंजिनियरिंग पास करने के बाद हम दोनों को ही एक मल्टीनेशनल कंपनी में बहुत अच्छी नौकरी मिल गयी। फिर कुछ दिनों के बाद अमर ने नौकरी छोड़ दी और मुंबई में अपनी फैक्टरी लगा ली। अब उसका कारोबार अच्छा जम गया था, फिर उसने एक मकान भी खरीद लिया, अब उसके पास मोटर गाड़ियाँ भी हो गयी थी। हालांकि अब हम लोग एक दूसरे से मिल नहीं पाते थे, लेकिन एक दूसरे का हालचाल फोन से पता लगाते रहते थे।

फिर अमर की देखा-देखी मैंने भी अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी फैक्टरी दिल्ली के पास बल्लभगढ़ में लगा ली, तो भगवान की कृपा से मेरी भी फैक्टरी अच्छी चल निकली और मैंने भी अपना मकान बना लिया, अब मेरे पास भी कई मोटर-गाड़ियाँ हो गयी थी। फिर एक दिन मुझे अमर का फोन आया कि वो शादी करने जा रहा है और लड़की का नाम सुष्मिता है और मुझे अपनी शादी में आने के लिए बुलाया। लेकिन उन दिनों मुझे हिन्दुस्तान से बाहर अपने बिजनस के सिलसिले में ज़रूरी काम से जाना था इसलिए में शादी में ना जा सका। तो उसने बताया की सुष्मिता बहुत ही सुंदर है, तो मैंने उससे कहा कि जैसे ही मुझे समय मिलेगा में उनसे मिलने मुंबई जरूर आऊंगा। फिर में कई महीनों तक उन दोनों से मिल तो नहीं पाया, लेकिन मेरी उन दोनों से अक्सर फोन पर बातें होती रहती थी।

फिर एक दिन मुझे उनका फोन आया की अगले महीने में मुंबई उनके पास कम से कम एक हफ्ते के लिए ज़रूर आऊँ, तो मैंने वादा कर लिया की में जरूर आऊंगा। फिर में अगले महीने मुंबई उनके पास एक हफ्ते के लिए गया, तो वो दोनों एयरपोर्ट पर यानी अमर और सुष्मिता मुझे लेने आए। अब सुष्मिता को देखते ही मैंने उनसे कहा कि सच में भाभी आप बहुत सुंदर है, अमर ने मुझसे कहा था कि आप बहुत सुंदर हो, लेकिन आज आपको देखकर ज़रूर कह सकता हूँ कि आप वाक़ई में बहुत सुंदर है, में अमर की पसंद की दाद देता हूँ, तो भाभी अपनी तारीफ़ सुनकर बहुत खुश हुई। फिर उन दोनों ने घर आकर मेरी बहुत खातिरदारी की, फिर वो दोनों मुझे मुंबई दिखाने ले गये और रात में मुझे एक बढ़िया से रेस्टोरेंट में खाना खिलाने ले गये। फिर दूसरे दिन वो दोनों मुझे ईलएफांता केव्स दिखाने ले गये और जब शाम को हम देर से लौटे, तो अमर ने पूछा कि थकावट मिटाने के लिए विस्की पिओगे।

तो मैंने कहा कि ज़रूर पीऊंगा, तो तब उसने जॉनी वॉकर ब्लेक लेबल की बोतल निकाली और दो गिलास, सोड़ा और बर्फ लाने के लिए सुष्मिता से कहा, तो सुष्मिता दो गिलास, सोड़ा और बर्फ ले आई। तो मैंने कहा तीन गिलास लाइए अगर आप नहीं पीएगी, तो में भी नहीं पीऊंगा। तो अमर ने कहा कि विजय कह रहा है तो आज पी ही लो, तो फिर सुष्मिता एक गिलास और ले आई। फिर अमर ने कहा कि में स्नैक्स के बारे में तो कहना भूल ही गया था, तो फिर सुष्मिता सॉल्टेड काजू और सॉल्टेड पिस्ता भी ले आई। फिर हम तीनों ने जॉनी वॉकर पी और अब हम सब पर उसका असर होने लगा था। फिर अमर सुष्मिता से बोला कि सूशी मैंने तुम्हें एक बात नहीं बताई, हमारे सभी दोस्तों में इस विजय का लंड सबसे लंबा और मोटा है। तो भाभी बोली कि तुम्हें कैसे पता लगा? तो इस पर अमर ने कहा कि हम सभी दोस्त आपस में अपने लंड मिलाते थे और देखते थे कि किसका लंड सबसे लंबा और मोटा है? में और विजय हॉस्टल में तो साथ ही रहते थे और हम लोगों में कोई पर्दा नहीं था और हम दोनों अक्सर एक दूसरे को नंगा भी देखते थे।

तो इस पर सुष्मिता भाभी बोली कि क्या तुम दोनों आपस में एक दूसरे की गांड भी मारते थे? मैंने किताबों में पढ़ा है कि हॉस्टल में जो लड़के साथ-साथ रहते है, वो एक दूसरे की गांड मारते है। तो इस पर अमर ने कहा कि हम दोनों ने तो कभी भी एक दूसरे की गांड नहीं मारी, तुमने यह कहाँ यह पढ़ लिया है? तो इस पर सुष्मिता भाभी बोली कि हमारे हॉस्टल में किताबें बैचन वाले आते थे और गंदी- गंदी भाषा में लिखी किताबें और सेक्स की फोटो वाली मैग्जीन्स लाते थे, तो हम लड़कियाँ वो किताबें और मैग्जीन्स बड़े चाव से पढ़तीं और देखती थी, उन्हीं किताबों में यह सब लिखा था। तो अमर ने कहा कि सूशी सच तो यह है कि बहुत ही कम लड़के किसी लड़के की गांड मारते है, मैंने तो आज तक तुम्हारे अलावा किसी की भी गांड नहीं मारी।

तो अमर की बात सुनकर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी गांड मराने में आपको कैसा लगा था? तो भाभी बोली कि पहली बार जब अमर ने मेरी गांड मारी तो मुझे बड़ा दर्द हुआ और ऐसा लगा जैसे मेरी गांड ही फट जाएगी, लेकिन दुबारा इतना दर्द नहीं हुआ और फिर तो दर्द कम और मज़ा ज़्यादा आने लगा। अब तो अगर अमर कई दिनों तक मेरी गांड नहीं मारते है, तो में उनसे गांड मारने के लिए कहती हूँ। तो मैंने भाभी से पूछा कि हॉस्टल में आप और आपकी दोस्त भी आपस में कुछ करती थी क्या? तो भाभी बोली कि हम लोग एक दूसरे की चूचीयाँ चूसते थे और एक दूसरे की चूत में उंगली करते थे, तो कभी- कभी एक दूसरे की चूत चाटते थे, तो कभी-कभी एक दूसरे की चूत में जीभ घुसेड़ते थे और एक दूसरे के क्लाइटॉरिस रगड़ते, चूसते और चाटते थे। फिर अगले दिन अमर और सुष्मिता भाभी मुझे जहाँगीर आर्ट गैलेरी, तारापोरेवला एक्वेरियम और कई जगह ले गये।

फिर शाम को क़रीब 4 बजे अमर को सिंगापुर से फोन आया की अमर का वहाँ पहुँचना बहुत ज़रूरी है, कुछ टेंडर्स पास करवाने के लिए उनका वहाँ रहना जरूरी है और वो पहली फ्लाइट से वहाँ पहुँच जाए। तो अमर सोच में पड़ गया कि मुझे बुलाकर, वो कैसे वहाँ चला जाए? तो मैंने कहा कि में फिर आ जाऊंगा मगर टेंडर हाथ से ना निकल जाए इसलिए तुम सिंगपुर तो जरूर जाओ। तो मेरा कहा मानकर अमर पहली फ्लाइट से 7 बजे सिंगापुर के लिए रवाना हो गया और जाते समय सुष्मिता भाभी से कहता गया कि विजय का पूरा ख्याल रखना। फिर अमर के जाने के बाद हम लोग एक रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद घर लौट आए। अब मुझे अमर का जाना खल रहा था तो मैंने भाभी से कहा कि कल में भी चला जाऊंगा। तो भाभी बोली कि अमर तो चला गया और तुम भी चले जाओगे, तो मुझे बहुत अकेला लगेगा तुम तो एक हफ्ते के लिए आए हो तो एक हफ्ते के बाद ही जाना, तब तक अमर भी लौट आएगा और भाभी के कहने पर में रुक गया।

फिर रात में मैंने भाभी से फिर से विस्की पीने के लिए कहा, तो पहले तो भाभी तैयार नहीं हुई मगर मेरे बार-बार कहने पर मान गयी। फिर हम दोनों ने विस्की पी और अब विस्की का अच्छा ख़ासा नशा हम दोनों पर चढ़ गया था और भाभी बहकी-बहकी बातें करने लगी थी। फिर भाभी उठी और बोली कि में कपड़े बदलकर आती हूँ, तो मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए और नाईट सूट पहन लिया। फिर जब भाभी अपने कपड़े बदलकर लौटी, तो मैंने देखा कि भाभी कपड़े बदलने के नाम पर अपने सब कपड़े उतारकर एक पतले से कपड़े की नाइटी पहनकर आ गयी, जिसमें उनकी चूचीयाँ और निपल्स और बगल के बाल साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। अब उन्हें इस तरह देखकर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था। फिर मैंने भाभी से कहा कि तुम इस तरह के कपड़े मेरे सामने मत पहना करो। तो भाभी बोली कि क्यों? तो मैंने कहा कि इन कपड़ों में तुम्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया है, अब इसे यहाँ कौन शांत करेगा? और फिर मैंने भाभी से कहा कि भाभी जब आपकी चूचीयाँ इतनी खूबसुरत है, तो आपकी चूत कैसी होगी?

तो भाभी बोली कि पहले तुम अपना लंड मुझे दिखाओं, तो में तुम्हें अपनी चूत दिखा दूँगी, देखें तुम्हारा लंड खड़ा भी है कि झूठ कह रहे हो। तो मैंने अपना पजामा उतार दिया और भाभी से कहा कि देखिए में झूठ बोल रहा था की सच। फिर जब भाभी ने मेरा 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड देखा तो वो बोली कि अमर सच कह रहा था अमर का लंड तो तुम्हारे लंड के सामने कुछ भी नहीं है, जिस लड़की को भी इससे चुदवाने को मिलेगा उस लड़की को तो मज़ा आ जाएगा। तो मैंने कहा कि आप भी चुदवाकर देखिए कि कितना मज़ा मिलता है? तो भाभी बोली कि चुदवाऊंगी तो नहीं, क्योंकि अगर अमर को पता लग गया तो बड़ा बुरा होगा और वो पता नहीं क्या सोचेगा? तो मैंने कहा कि अमर को पता कैसे लगेगा? हम लोगों की चुदाई की बात तो केवल हम दोनों को ही तो मालूम रहेगी, ना तुम बताओंगी और ना में बताऊँगा तो फिर उसे कैसे मालूम होगा?

अब मुझे लगने लगा था कि भाभी चुदवाना चाहती है, लेकिन उनकी हिम्मत नहीं हो रही है इसलिए मैंने उनकी चूचीयाँ चूसनी शुरू कर दी। अब उनकी चूचीयाँ चूसने से उनकी चुदासी बढ़ गयी थी और फिर उन्होंने खुद ही अपनी नाइटी उतार दी और मेरे बाकी कपड़े भी उतार दिए। अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो गये थे। फिर भाभी मेरा लंड पकड़कर खींचती हुई मुझे अपने बेडरूम में ले आई और कहने लगी कि हाँ अब मुझे चोदो। तो मैंने अपना लंड उनकी चूत में धीरे-धीरे करके पूरा डाल दिया और धक्के लगाने लगा। अब भाभी को तो बहुत ही मज़ा आने लगा था और वो बोली कि चोदने के साथ-साथ मेरी चूची भी चूसो। तो मैंने खूब अच्छी तरह से धक्के लगाए और फिर भाभी और में एक साथ ही झड़ गये। फिर भाभी बोली कि इतना मज़ा चुदाई में उन्हें कभी नहीं मिला।

फिर में 2 दिन और उनके साथ रहा और उन 2 दिनों में भाभी ने मुझसे जमकर चुदवाया और मेरे जाने से एक दिन पहले में उन्हें बाज़ार ले गया और उन्हें एक बढ़ियां सी साड़ी, ब्लाउज, पेंटी, ब्रा और पेटिकोट खरीदवाए और उनसे कहा कि कान के टॉप्स और ले लीजिए। तो फिर उन्होंने टॉप्स पसंद किए, जो मैंने उन्हें खरीदकर दिए और उनसे कहा कि अगली बार जब में आऊँ, तो आप यही कपड़े और टॉप्स पहनकर मुझे लेने आना, यह चीजें मेरी तरफ से आपकी शादी का गिफ्ट है। अब उस रात भाभी बहुत खुश थी और फिर भाभी ने मुझसे खूब चुदवाया और फिर अगले दिन अमर वापस आ गया और सिंगापुर जाने के लिए मुझसे माफी माँगने लगा और पूछने लगा कि कोई परेशानी तो नहीं हुई। तो मैंने कहा कि भाभी के रहते परेशानी होने का सवाल ही नहीं होता, बड़े मज़े से समय कट गया। तो मेरी बात सुनकर भाभी मुस्कुराई और में उसी रात दिल्ली की फ्लाइट से दिल्ली लौट आया। फिर भाभी और अमर ने मुझसे फिर से मुंबई आने के लिए कहा, तो मैंने कहा कि अब जल्दी ही आऊंगा।

Updated: January 4, 2019 — 11:46 pm
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