आंटी की चूत का भोसड़ा बनाने का मजा-2

sex stories in hindi अब में सिर्फ़ लुंगी में था और अभी तक आंटी ने अपनी साड़ी नहीं उतारी थी। फिर जब में रूम में आया तो तब मैंने देखा कि वो अपनी साड़ी का पल्लू निचोड़ रही थी और आँचल हटा होने की वजह से उनके पिंक ब्लाउज के अंदर ब्लेक डिज़ाइनर ब्रा साफ नजर आ रही थी, जिसे में बिना पलक झपकाए निहार रहा था। अब मुझे एकटक इस तरह देखते हुए आंटी ने कहा कि क्या देख रहे हो बेटा? तुमने अपने तो कपड़े उतार लिए, अब में भी चेंज कर लूँ। अब मेरा मन तो आंटी को चोदने के बारे में सोचने लगा था, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पा रही थी। तो तब ही थोड़ी देर के बाद आंटी एक बहुत ही पतली और पारदर्शी सी नाइटी पहनकर आई और वही सोफे पर बैठ गयी और कॉफी बनाने लगी। अब वो कॉफी बना रही थी और में अपनी ललचाई नजरों से उनकी उभरी हुई चूची को देख रहा था और दिल ही दिल में सोच रहा था कि काश ये आंटी मुझसे चुदवा ले तो कितना मज़ा आएगा?

अब यही सब सोच-सोचकर मेरा लंड अपनी औकात में आ चुका था और मुझे इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि कब मेरी लुंगी के बीच से उसकी टोपी बाहर झाँक रही थी? और आंटी अपनी चोर नजरों से उधर ही देख रही थी। अब मेरा पूरा ध्यान आंटी की चूचीयों की तरफ ही था और आंटी का ध्यान मेरे औज़ार की तरफ था। तो तब ही मैंने आंटी की नजरों की तरफ देखा, तो उनकी नजरे अपने औज़ार पर टिकी देखकर अंदर ही अंदर खुश हो गया और धीरे से अपनी टांगे और खोल दी, ताकि आंटी और अच्छी तरह से मेरे लंड का दीदार कर सके। फिर उसके बाद हम दोनों ने कॉफी पी और उसके बाद में अपने कपड़े पहनने लगा और दिल ही दिल में सोच रहा था कि साली अगर आज रोककर चुदवा ले तो क्या हो जाएंगा? तड़प तो इसकी भी चूत रही है, लेकिन हाय रे इंडियन नारी लाज़ की मारी लंड खाएंगी मजे ले- लेकर, लेकिन चुदवाने से पहले शरमाएंगी इतना की पूछो ही मत।

फिर जब आंटी ने मुझे कपड़े पहनते हुए देखा, तो तब वो मेरे करीब आई और बोली कि बेटा अभी कपड़े पूरी तरह से सूखे नहीं है, तुम ऐसा करो कि आज यही रुक जाओं और अपने घर पर मम्मी को कॉल कर दो। तो तब मैंने नाटक करते हुए कहा कि नहीं आंटी मुझे जाना है। तो तब वो मेरे हाथ से कपड़े लेकर बोली कि बेटा में तेरी माँ जैसी हूँ जैसा कह रही हूँ वैसा करो, कही बीमार पड़ गये तो तेरी मम्मी को कौन जवाब देगा? फिर मैंने अपने घर पर कॉल कर दी कि आज पानी बहुत बरस रहा है में आज यही मेरे दोस्त के घर रुक जाऊँगा। फिर थोड़ा बहुत खाना खाने के बाद आंटी ने मुझसे कहा कि बेटा तुम यहाँ बेड पर सो जाना, में सोफे पर लेट जाऊंगी वरना अगर तुम चाहो तो गेस्ट रूम में भी सो सकते हो। तो तब मैंने कहा कि आंटी में वहाँ अकेला बोर हो जाऊंगा, आप ऐसा कीजिए आप बेड पर सो जाइए में सोफे पर सो जाता हूँ और ये कहकर में वहीं सोफे पर लेट गया और आंटी बेड पर लेट गयी।

अब मेरे अरमान धीरे-धीरे ठंडे हो रहे थे और में आंटी की उभरी हुई चूची और फूले हुए चूतड़ अपनी आखों में बसाए कब नींद की गोद में चला गया? मुझे पता ही नहीं चला। फिर रात को अचानक से मुझे अपनी जाँघ पर कुछ सरकता हुआ महसूस हुआ तो मेरी नींद खुल गयी। फिर मुझे महसूस हुआ की ये किसी का हाथ है और घर में 2 ही लोग थे आंटी या फिर उसकी लड़की। तो थोड़ी देर तक तो में उसी पोजिशन में लेटा रहा, तो तब तक वो हाथ सरकता हुआ मेरी लुंगी को सरकाता हुआ ऊपर मेरी जांघों की जड़ तक पहुँच चुका था। अब में भी उस हाथ के सहलाने का आनंद लेना चाहता था, चाहे कोई भी हो भले ही उस वक़्त उसकी लड़की भी होती तो तब भी मैंने तय कर लिया था की उसकी कुँवारी चूत को चोद ही डालूँगा। लेकिन अब तक में जान गया था की ये हाथ आंटी का है और अब में पूरी तरह से उसके सहलाने का मज़ा लेना चाहता था। फिर में सोफे पर सीधा होकर लेट गया और वो मुझे करवट लेते हुए देखकर कुछ हडबड़ा गयी, लेकिन फिर नॉर्मल हो गयी।

फिर आंटी ने मुझे नींद में देखकर मेरी लुंगी के अंदर अपना हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया, जो अभी तक शांत अवस्था में था और उसे प्यार से सहलाने लगी। अब मेरे लंड में धीरे-धीरे तनाव आने लगा था और में भी उत्तेजित होने लगा था। अब मेरा मन कर रहा था की अभी साली को बाहों में भरकर इतनी ज़ोर से दबाऊं की इसकी हड्डी तक पीस जाए, लेकिन में ऐसा कर नहीं सकता था तो में बस चुपचाप पड़ा रहा और आंटी की कारवाही देखता रहा। अब आंटी का हाथ थोड़ा खड़ा हो गया था, अब वो मुझे सोया हुआ जानकर पूरी तरह से निश्चित हो गयी थी। अब मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से सहलाने के बाद जब मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया। तो तब आंटी अपने होंठो से मेरी जांघों को चूमने लगी। अब मेरे मुँह से सिसकीयाँ निकलने ही वाली थी, लेकिन मैंने अपने दांत भींचकर सिसकी नहीं निकलने दी।

अब मुझसे बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल हो रहा था तो तभी मैंने अपने लंड पर कुछ चिपचिपा सा महसूस किया, क्योंकि रूम में नाईट बल्ब जल रहा था तो मुझे कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था और में अपनी आँख भी बंद किए था। लेकिन मुझे इतना तो अंदाज़ा हो ही गया था की ये साली इसकी जीभ होगी, जो मेरे लंड पर फैर रही है और अपनी जीभ फैरते-फैरते उसने गप्प से मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया। अब तो में बर्दाश्त ही नहीं कर पाया था और झटके के साथ उठकर बैठ गया और बोला कि कौन है यहाँ पर? तो तभी आंटी ने मेरे मुँह पर हाथ रखा और धीरे से बोली कि बेटा में हूँ और उन्होने झट से रूम की लाईट जला दी। तो में देखकर हैरान रह गया कि वो पूरी तरह से नंगी थी। तो मैंने उनको नंगा देखकर चौकने का ड्रामा करते हुए कहा कि हाय आंटी आप तो नंगी है। तो तब उन्होंने मेरा लंड पकड़ते हुए कहा कि बेटा तुम भी तो नंगे हो।

तो मैंने अपने दोनों हाथ झट से अपने लंड पर रख लिए और छुपाने का नाटक करने लगा, लेकिन में जानता था की अब ये साली चुदवाएंगी तो ज़रूर। लेकिन फिर भी मैंने अपना नाटक चालू रखा और बोला कि आंटी आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था, ये गंदी बात है। तो तभी आंटी मेरे लंड को मसलते हुए बोली और तुम जो शाम से मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चूचीयाँ निहार रहे थे और इस तरह देख रहे थे की बस खा ही जाओंगे, वो अच्छी बात थी और जब में कॉफी बना रही थी, तो तब तुम्हारी नजरे कहाँ थी? मुझे पता है मुझे चोदना सीखा रहे हो, तुम बेटा अभी कल के बच्चे हो, में तुम्हारे जैसे ना जाने कितनो को अपनी चूत में समा कर बाहर कर चुकी हूँ। अब उसकी ये सब बात सुनकर तो मुझे बहुत ही जोश चढ़ गया था। अब उसने यक़ीनन मुझे भड़काने के लिए ही ऐसी भाषा का प्रयोग किया था, लेकिन मुझे तो शुरू से ही चोदने में गाली गलौज पसंद थी और आंटी इतनी सभ्य नजर आ रही थी की उनके मुँह से इस तरह की बात सुनना मेरे लिए एक नया अनुभव था और फिर उसके बाद हम लोगों की घमासान चुदाई हुई ।।

Updated: November 26, 2018 — 11:25 pm
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017 Frontier Theme
error: