खूबसूरती और बद्सुरती-18

kaamvasna

सुहानी को आज कुछ पल की ख़ुशी ने अँधा बना दिया था। और हो भी क्यू ना…जो लड़की 23 सालो से अपने पापा के प्यार के लिए तरस रही हो उसे वो और चाहिए था फिर वो वासनामय क्यू ना हो।

 

इधर अविनाश भी सोच में डूब था। उसे नींद नहीं आ रही थी। वो अपनी हरकत को लेके बहोत गिल्टी फील कर रहा था।

“”उफ्फ्फ मैं वासना में बह कर कुछ जादा ही गलत हरकत कर बैठता हु…

पर क्या करू जब से उस दिन देखा है मेरी अंदर की सेक्स क8 भावनाय जो सो रही थी वो जाग गयी है…जब भी उसे देखता हु मुझे उसका जिस्म याद आ जाता है…और मैं भावनाओ को काबू नहीं कर पाता….नहीं…बिलकुल नहीं…माना की उस दिन उसे उस हालत में देख के मैं थोडा बहक गया था…पर मुझे मेरी गलती का अहसास आज हुआ है की वो सिर्फ एक ही चीज में कमजोर है बाकि की खुबिया उसमे कूट कूट के भरी हुई है…मैंने हमेशा उन चीजो को नजरअंदाज किया है…आज मेरे जानपहचान या रिश्तेदारो में सुहानी जैसा कोई नहीं है…वो होशियार है कामयाब है और वो कितनी सेक्सी है…उफ्फ्फ मेरी गाडी हमेशा उसके सेक्सी जिस्म पे आके क्यू रुक जाती है??””

अविनाश को समझ नहीं आ रहा था की आज सुहानी के लिए जो प्यार उसके मन में उमड़ रहा है दरअसल वो प्यार नहीं उसके लिए हवस है..बरसो से सेक्स के लिए तड़पते हुए इंसान का फ्रस्ट्रेशन है…

उसने नीता को देखा वो गहरी नींद में सो रही थी। वो उठा और सिगरेट लेके पीछे के दरवाजे से बाहर आया और सिगरेट पिने लगा। टहलते गए वो सुहानी के रूम के पास आया उसने देखा की खिड़की आज बंद थी वो थोडा आगे आया और देखने लगा..उसने खिड़की को धीरे से धकेला पर वो अंदर से बंद थी…सुहानी अपने ऑफिस का कुछ काम कर रही थी….उसे खिड़की के पास कुछ हलचल महसूस हुई तो उस तरफ देखने लगी…पहले तो उसे डर लगा…लें जब उसने थोडा पर्दा हटा के देखा तो वह कोई नहीं था…उसने थोडा ध्यान से देखा तो थोड़ी दुरी पर उसके पापा सिगरेट पि रहे थे…सुहानी समझ गयी की अविनाश खिड़की के पास आके अंदर झांकने की कोशिस कर रहे होंगे…ये सोच सुहानी की हंसी निकल गयी…

सुहानी:- ह्म्म्म लगता है आज भी पापा को लगा कुछ देखने मिल जायेगा इसलिए खिड़की के पास आकर देख रहे थे…

अविनाश उसके लिए दीवाना हो रहा था ये देख के सुहानी के मन में। एक अजीब सी सिरहन दौड़ गयी….और मुस्कुराते हुए अपने काम में लग गयी

 

अगले दिन से अविनाश का व्यवहार सुहानी के प्रति बहोत बदल गया था। वो सुहानी से बड़े प्यार से बाते करने लगा था…जब भी टीवी देखने बैठते या खाना खाने बैठते अविनाश सुहानी के पास ही बैठ जाता…उसे छूने के बहाने ढूंढता…और सबसे चुपके उसकी सेक्सी बॉडी का रसपान कर लेता….देखने वालो को जैसे की नीता और सोहन को लगता की ये एक बाप का अपनी बेटी के लिए प्यार है…पर सिर्फ सुहानी और अविनाश जानते थे की अविनाश सुहानी को लेके क्या सोचता है।

सुहानी अविनाश के छूने से रोमांचित हो उठती…जब सोफे पे टीवी देखते वक़्त अविनाश सुहानी के पास बैठता तो अपना हाथ उसके कंधे पे रख देता…और धीरे धीरे उसकी बाह को सहलाने लगता…अपनी जांघे उसकी जांघो से सटा देता….सुहानी जब भी अविनाश के करीब होती उसकी धड़कने बढ़ने लग जाती…और जब अविनाश कभी उसककी पीठ या गांड को छु लेता सुहानी की चूत गीली होने लग जाती…सुहानी ने कभी अविनाश का ऐसा छूने का विरोध नहीं किया पर अपनिन्तरफ से कोई इशारा भी नहीं दिया।

सोहन अविनाश का सुहानी के प्रति बदला हुआ व्यवहार देख के हैरान था। जैसा की होता है…पहले वो सोहन से जादा ककरीब थे…उसे लगता था की वो उससे जादा प्प्यार करते है लेकिन अब उसे सुहानी से जलन होने लगी थी और वो जादा ही गुस्सा करने लगा था…और जब भी वो सुहानी से बद्दतमिजिसे बात करता अविनाश उसे डांट देता जिससे वो और भी जादा गुस्सा करने लगा। अब उसे हर बात पे सुहानी का example मिलने लगा था। वो कोई भी गलती करता तो उसे मम्मी या पापा से ये सुनाने मिलता

की “कुछ सिख सुहानी से”

सुहानी भी उसे चिढ़ाने का एकक भी मौका अपने हाथ से नही जाने देती…क्यू की उसने सुहानी को हर्ट करने का एक भी मोका कभी नहीं छोड़ा था…सुहानी के दिल उसकी बातो से उसकी हरकतों से कई बार ठेस पहुंची थी।

Updated: July 24, 2018 — 11:35 pm
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