छोटे भाई के साथ सेक्स-1

Antarvasna हेल्लो…. दोस्तों। मेरा नाम आशा है और यह मेंरी पहली स्टोरी है. मेरा छोटा भाई दसवीं मैं पढ़ता है. वो गोरा और करीब मेंरे ही बराबर लंबा भी है. मुझे भईया के गुलाबी होंठ बहुत प्यारे लगते हैं. दिल करता है की बस चबा दूँ. पापा आर्मी में है और माँ गवर्नमेंट जॉब मैं. माँ जब जॉब की वजह

से कहीं बाहर जाती तो घर में बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे. मेंरे भाई का नाम अमित है और वो मुझे दीदी कहता है।

एक बार माँ कुछ दिनों के लिए बाहर गयी थी. उनकी चुनाव में ड्यूटी लग गयी थी. माँ को एक हफ्ते बाद आना था. रात मैं डिनर के बाद कुछ देर टीवी देखा फिर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिए चले गये. करीब एक आध घंटे बाद प्यास लगने की वजह से मेंरी नींद खुल गयी. अपनी साइड टेबल पर बोतल देखी तो वो खाली थी. मैं उठकर किचन मैं पानी पीने गयी तो लौटते समय देखा की अमित के कमरे की लाइट ऑन थी और दरवाज़ा भी थोडा सा खुला था. मुझे लगा की शायद वो लाइट ऑफ करना भूल गया है मैं ही बंद कर देती हूँ. मैं चुपके से उसके कमरे मैं गयी लेकिन अंदर का नज़ारा देखकर मैं हैरान हो गयी।

अमित एक हाथ मैं कोई किताब पकड़कर उसे पढ़ रहा था और दूसरे हाथ से अपने तने हुए लंड को पकड़कर मुठ मार रहा था. मैं कभी सोच भी नही सकती थी की इतना मासूम लगने वाला दसवी का यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है. मैं चुपचाप खड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेंरी उपस्थिति का आभास हो गया. उसने मेंरी तरफ मुँह फेरा और दरवाज़े पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया. वो बस मुझे देखता रहा और कुछ भी ना बोल पाया. फिर उसने मुँह फेरकर किताब तकिये के नीचे छुपा दी. मुझे भी समझ नही आया की क्या करूँ. मेंरे दिल मैं यह ख्याल आया की कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगा और बात करने से भी कतराएगा. घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नही जिससे मेरा मन बहलता. मुझे अपने दिन याद आए.मैं और मेरा एक कज़ीन इसी उमर के थे जबसे हमने मज़ा लेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था. मैं धीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी. वो चुपचाप लेटा रहा।
मैनें उसके कंधों को दबाते हुए कहा, “अरे यार अगर यही करना था तो कम से कम दरवाज़ा तो बंद कर लिया होता… वो कुछ नही बोला, बस मुँह दूसरी तरफ किए लेटा रहा. मैने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ किया और बोली अभी से ये मज़ा लेना शुरू कर दिया… कोई बात नही मैं जानती हूँ तू अपना मज़ा पूरा कर ले… लेकिन ज़रा यह किताब तो दिखा… मैने तकिये के नीचे से किताब निकाल ली. यह हिन्दी में लिखे शब्द की किताब थी. मेरा कज़ीन भी बहुत सी किताबे लाता था और हम दोनो ही मज़े लेने के लिए साथ-साथ पढ़ते थे. चुदाई के समय किताब के बोल बोलकर एक दूसरे का जोश बढ़ाते थे. जब में किताब उसे देकर बाहर जाने के लिए उठी तो वो पहली बार बोला, “दीदी सारा मज़ा तो आपने खराब कर दिया अब क्या मज़ा करूँगा… अरे अगर तुमने दरवाज़ा बंद किया होता तो में आती ही नही… अगर आपने देख लिया था तो चुपचाप चली जाती… अगर में बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वो कज़ीन करीब 6 महीने से नहीं आया था इसलिए में भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी।
अमित मेरा छोटा भाई था और बहुत ही सेक्सी लगता था इसलिए मैने सोचा की अगर घर में ही मज़ा मिल जाए तो बाहर जाने की क्या ज़रूरत. फिर अमित का लंड अभी कुँवारा था. में कुंवारे लंड का मज़ा पहली बार लेती इसलिए मैने कहा, चल अगर मैनें तेरा मज़ा खराब किया है तो में ही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ… फिर में पलंग पर बैठ गयी और उसे लिटाया और उसके मुरझाए लंड को अपनी मुट्टी में लिया. उसने बचने की कोशिश की पर मैनें लंड को पकड़ लिया था. अब मेंरे भाई को यकीन हो चुका था की मैं उसका राज़ नही खोलूँगी इसलिए उसने अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लंड ठीक से पकड़ सकूँ. मैने उसके लंड को बहुत हिलाया डुलाया लेकिन वो खड़ा ही नही हुवा. वो बड़ी मायूसी के साथ बोला देखा दीदी अब खड़ा ही नही हो रहा है…””अरे क्या बात करते हो… अभी तुमने अपनी बहन का कमाल कहा देखा है… में अभी अपने प्यारे भाई का लंड खड़ा कर दूँगी…ऐसा कह में भी उसकी बगल में ही लेट गयी. मैं उसका लंड सहलाने लगी और उससे किताब पढने को कहा. दीदी मुझे शर्म आती है… ” “साले अपना लंड बहन के हाथ मैं देते शर्म नही आई…मैने ताना मारते हुवे कहा ला मैं पढती हूँ… और मैने उसके हाथ से किताब ले ली।
मैनें एक स्टोरी निकाली जिसमें भाई बहन के बोल थे. और उस से कहा, “में लड़की वाला बोलूँगी और तुम लड़के वाला… मैने पहले पढ़ा, “अरे राजा मेंरी चूचियों का रस तो बहुत पी लिया अब अपना बनाना शेक भी तो टेस्ट करवा… अभी लो रानी पर में डरता हूँ इसलिए की मेरा लंड बहुत बड़ा है, तुम्हारी नाज़ुक कसी चूत में कैसे जाएगा… और इतना पढ़कर हम दोनो ही मुस्कुरा दिए क्योंकि यहा हालत बिल्कुल उल्टे थे. मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेंरी चूत बड़ी थी और उसका लंड छोटा था. वो शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढाई के बाद ही उसके लंड में जान आ गयी और वो तनकर करीब 6 इंच का लंबा और 1.5 का मोटा हो गया. मैनें उसके हाथ से किताब लेकर कहा, “अब इस किताब की कोई ज़रूरत नही… देख अब तेरा खड़ा हो गया है… तू बस दिल में सोच ले की तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मुठ मार देती हूँ… में अब उसके लंड की मुठ मार रही थी और वो मज़ा ले रहा था. बीच बीच मैं सिसकारियाँ भी भरता था. एकाएक उसने लंड उठाकर और बोला, “बस दीदीऔर उसके लंड ने गाढ़ा पानी फैंक दिया जो मेंरी हथेली पर गिरा. में उसके लंड के रस को उसके लंड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा, “क्यों भईया मज़ा आया?” “सच दीदी बहुत मज़ा आया..

Updated: June 9, 2019 — 12:16 am
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