छोटे भाई के साथ सेक्स-2

hindi sex story अच्छा यह बता की ख्यालों में किसकी ले रहे थे?” दीदी शर्म आती है… बाद में बताऊंगा…इतना कह उसने तकिये में मुँह छुपा लिया. अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आएगी… और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बंद कर लिया करना… अब क्या करना दरवाज़ा बंद करके दीदी तुमने तो सब देख ही लिया है… चल शैतान कही के…मैने उसके गाल पर हल्की सी छपत मारी और उसके होंठो को चूमा. में और किस करना चाहती थी पर आगे के लिए छोड़ कर वापस अपने कमरे मैं आई. अपनी सलवार कमीज़ उतार कर नाईटी पहनने लगी तो देखा की मेंरी पेंटी बुरी तरह भीगी हुई है. अमित के लंड का पानी निकालते-निकालते मेंरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था. अपना हाथ पेंटी में डालकर अपनी चूत सहलाने लगी. उंगलियों का स्पर्श पाकर मेंरी चूत फिर से रिसकने लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया. चूत की आग बुझाने का कोई रास्ता नही था सिवाए अपनी उंगली के. में बेड पर लेट गयी. अमित के लंड के साथ खेलने से में बहुत उत्तेजित थी और अपनी प्यास बुझाने के लिए अपनी बीच वाली उंगली जड़ तक चूत मैं डाल दी. तकिये को सीने से कसकर भींचा और जांघो के बीच दूसरा तकिया दबा आँखे बंद की और अमित के लंड को याद करके उंगली अंदर बाहर करने लगी।
इतनी मस्ती चडी थी की क्या बताए, मन कर रहा था की अभी जाकर अमित का लंड अपनी चूत में डलवा ले. उंगली से चूत की प्यास और बड गयी इसलिए उंगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औंधे मुँह लेटकर धक्के लगाने लगी. बहुत देर बाद चूत ने पानी छोड़ा और में वैसे ही सो गयी. सुबह उठी तो पूरा बदन प्यास की वजह से सुलग रहा था. लाख रगड लो तकिये पर लेकिन चूत में लंड घुसवाकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या. बेड पर लेटे हुये में सोचती रही की अमित के कुंवारे लंड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये. फिर उठकर तैयार हुई. अमित भी स्कूल जाने को तैयार था. नाश्ते की टेबल हम दोनो आमने-सामने थे. नज़रे मिलते ही रात की याद ताज़ा हो गयी और हम दोनो मुस्कुरा दिऐ. अमित मुझसे कुछ शर्मा रहा था की कहीं मैं उसे छेड़ ना दू. मुझे लगा की अगर अभी कुछ बोलूँगी तू वो भीचक जाएगा इसलिए चाहते हुए भी ना बोली. चलते समय मैनें कहा, “चलो आज तुम्हे अपने स्कूटर पर स्कूल छोड़ दू…वो फ़ौरन तैयार हो गया और मेंरे पीछे बैठ गया।
वो तोड़ा शर्मा रहा था और मुझसे अलग बैठा था. वो पीछे की स्टेपनी पकड़े था. मैनें स्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बेलेंसबिगड़ गया और संभालने के लिए उसने मेंरी कमर पकड़ ली. में बोली, “कसकर पकड़ लो शरमा क्यों रहे हो?” अच्छा दीदीऔर उसने मुझे कसकर कमर में पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया. उसका लंड खड़ा हो गया था और वो अपनी जांघो के बीच मेंरे कुल्लो को जकड़े था. क्या रात वाली बात याद आ रही है अमित?” दीदी रात की तो बात ही मत करो… कहीं ऐसा ना हो की में स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊ.. अच्छा तो बहुत मज़ा आया रात मैं?” हां दीदी इतना मज़ा ज़िंदगी में कभी नही आया… काश कल की रात कभी खत्म ना होती… आपके जाने के बाद मेरा फिर खड़ा हो गया था पर आपके हाथ में जो बात थी वो कहाँ… ऐसे ही सो गया…””तो मुझे बुला लिया होता… अब तो हम तुम दोस्त हैं… एक दूसरे के काम आ सकते हैं… तो फिर दीदी आज रात का प्रोग्राम पक्का… चल हट केवल अपने बारे में ही सोचता है… ये नही पूछता की मेरी हालत कैसी है… मुझे तो किसी चीज़ की ज़रूरत नही है… चल में आज नही आती तेरे पास…” “अरे आप तो नाराज़ हो गयी दीदी… आप जैसा कहेंगी वैसा ही करूँगा… मुझे तो कुछ भी पता नही अब आप ही को मुझे सब सीखाना होगा… तब तक उसका स्कूल आ गया था. मैनें स्कूटर रोका और वो उतरने के बाद मुझे देखने लगा लेकिन में उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी।
स्कूटर के शीशे में देखा की वो मायूस सा स्कूल में जा रहा है. में मन ही मन बहुत खुश हुई की चलो अपने दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया. शाम को में अपने कॉलेज से जल्दी ही वापस आ गयी थी. अमित 2 बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया. मुझे लेटा देखकर बोला, “दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?” ठीक ही समझो, तुम बताओ कुछ होमवर्क मिला है क्या?” दीदी कल रविवार है ही… वैसे कल रात का काफ़ी होमवर्क बचा हुआ है… मैनें हँसी दबाते हुये कहा, क्यो पूरा तो करवा दिया था… वैसे भी तुमको यह सब नही करना चाहिए… सेहत पर असर पड़ता है… कोई लड़की पटा लो, आजकल की लड़किया भी इस काम में काफ़ी इंट्रेस्टेड रहती हैं… दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँ मेंरे लिए सलवार नीचे और कमीज़ ऊपर किए तैयार है की आओ पेंट खोलकर मेंरी ले लो..” “नही ऐसी बात नही है… लड़की पटानी आनी चाहिए…
फिर में उठकर नाश्ता बनाने लगी. मन में सोच रही थी की कैसे इस कुंवारे लंड को लड़की पटाकर चोदना सिखाऊं… लंच टेबल पर उस से पूछा, “अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?” “हां दीदी सुधा से..” “कहाँ तक?” “बस बातें करते हैं और स्कूल में साथ ही बैठते हैं..मैने सीधी बात करने के लिए कहा, “कभी उसकी लेने का मन करता है?” “दीदी आप कैसी बात करती हैं..वो शर्मा गया तो में बोली, “इसमें शर्माने की क्या बात है… मुट्ठी तो रोज़ मारता है.. ख्यालो में कभी सुधा की ली है या नही सच बता… लेकिन दीदी ख्यालो में लेने से क्या होता है… तो इसका मतलब है की तू उसकी असल में लेना चाहता है…मैने कहा. उससे ज़्यादा तो और एक है जिसकी में लेना चाहता हूँ, जो मुझे बहुत ही अच्छी लगती है… जिसकी कल रात ख्यालो में ली थी?” उसने सर हिलाकर हां कर दिया पर मेंरे बार-बार पूछने पर भी उसने नाम नही बताया।
इतना ज़रूर कहा की उसकी चुदाई कर लेने के बाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बताऐगा. मैनें ज़्यादा नही पूछा क्योंकि मेंरी चूत फिर से गीली होने लगी थी. में चाहती थी की इससे पहले की मेरी चूत लंड के लिए बेचैन हो वो खुद मेरी चूत में अपना लंड डालने के लिए गिड़गिडाए. मैं चाहती थी की वो लंड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे की दीदी बस एक बार चोदने दो. मेरा दिमाग़ ठीक से काम नही कर रहा था इसलिए बोली, “अच्छा चल कपड़े बदल कर आ में भी बदलती हूँ…वो अपनी यूनिफॉर्म चेंज करने गया और मैनें भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज़ उतार दी।
फिर ब्रा और पेंटी भी उतार दी क्योंकि चुदने के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते. अपना देशी पेटिकोट और ढीला ब्लाउस ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं. जब बिस्तर पर लेटो तो पेटिकोट अपने आप आसानी से घुटनो तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही और ऊपर आ जाता है. जहाँ तक ढीले ब्लाउस का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलक कर बाहर आ जाता है. बस यही सोचकर मैने पेटिकोट और ब्लाउस पहना था. वो सिर्फ़ पजामा और बनियान पहनकर आ गया. उसका गोरा चिकना बदन मदमस्त करने वाला लग रहा था. एकाएक मुझे एक आईडिया आया।

Updated: June 9, 2019 — 12:17 am
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017 Frontier Theme
error: