छोटे भाई के साथ सेक्स-4

hindi sex stories कुछ देर बाद लंड को चूत के मुहँ पर रखकर बोली, “ले अब तेरे चाकू को अपने खरबूजे पर रख दिया है पर अंदर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तू बहुत दिन से चोदना चाहता है और जिसे याद करके मुठ मारता है… वो मेरी चूचियों को पकड़कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए. में भी अपना मुहँ खोलकर उसके होंठ चूसने लगी. कुछ देर बाद मैनें कहा, ”हां तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनो की रानी कौन है…” “दीदी आप बुरा मत मानीऐगा पर मैनें आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख्यालो में रखकर…” “ हे भईया तू कितना बेशर्म है…

अपनी बड़ी बहन के बारे में ऐसा सोचता था..” “ दीदी में क्या करूँ आप बहुत खूबसूरत और सेक्सी है… में तो कब से आपकी चूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत में लंड डालना चाहता था… आज दिल की आरज़ू पूरी हुई.. और फिर उसने शर्माकर आँखे बंद करके धीरे से अपना लंड मेरी चूत में डाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया. अरे तू मुझे इतना चाहता है… मैनें तो कभी सोचा भी नही था की घर में ही एक लंड मेरे लिए तड़प रहा है.. पहले बोला होता तो पहले ही तुझे मोका दे देती…और मैने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी।

बीच-बीच में उसकी गांड भी दबा देती. दीदी मेरी किस्मत देखिए कितनी गांडू है… जिस चूत के लिए तड़प रहा था उसी चूत में लंड पड़ा है पर चोद नही सकता… पर फिर भी लग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ.. वो खुल कर लंड चूत बोल रहा था पर मैनें बुरा नही माना. अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ…और वो लंड बाहर निकालने को तैयार हुआ. में तो सोच रही थी की वो अब चूत में लंड का धक्का लगाना शुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उल्टा कर रहा था. मुझे उस पर बड़ी दया आई. साथ ही अच्छा भी लगा की वादे का पक्का है. अब मेरा फ़र्ज़ बनता था की में उसकी वफ़ादारी का ईनाम अपनी चूत चुद्वाकर दूँ. इसलिए उससे बोली, “अरे यार तूने मेरी चूत की अपने ख्यालो में इतनी पूजा की है.. और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिए में अपने प्यारे भाई का दिल नही तोडूंगी.. चल अगर तू अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनना ही चाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत.. मैने जानकर इतने गंदे शब्द का प्रयोग किए थे पर वो बुरा ना मानकर खुश होता हुआ बोला, “सच दीदी.. और फ़ौरन मेरी चूत में अपना लंड डालने लगा की कहीं में अपना इरादा ना बदल दूँ।

तू बहुत किस्मत वाला है अमित.. में उसके कुंवारे लंड की चुदाई का मज़ा लेते हुये बोली. क्यों दीदी?” अरे यार तू अपनी ज़िंदगी की पहली चुदाई अपनी ही बहन की कर रहा है… और उसी बहन की जिसकी तू जाने कब से चोदना चाहता था.. हां दीदी मुझे तू अब भी यकीन नही आ रहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज़ आपको चोदता था.. फिर वो मेरी एक चूची को मुहँ में दबा कर चूसने लगा. उसके धक्को की रफ़्तार अभी भी कम नही हुई थी. में भी काफ़ी दिनो के बाद चुद रही थी इसलिए में भी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी. वो एक पल रुका फिर लंड को गहराई तक ठीक से डालकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. वो अब झड़ने वाला था।

में भी सातवें आसमान पर पहुचं गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्को का जवाब दे रही थी. उसने मेरी चूची छोड़कर मेरे होंठो की मुहँ में ले लिया जो की मुझे हमेशा अच्छा लगता था. मुझे चूमते हुए कसकस कर दो चार धक्के दिये और हाय आशा मेरी जानकहते हुये झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया. मैनें भी नीचे से दो चार धक्के दिये और हाए मेंरे राजा कहते हुये झड़ गयी. चुदाई के जोश ने हम दोनो को निढाल कर दिया था. हम दोनो कुछ देर तक यू ही एक दूसरे से चिपके रहे. कुछ देर बाद मैनें उससे पूछा, “क्यों मज़ा आया मेंरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूत चोदने मैं?” उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था. उसने मुझे कसकर अपनी बाँहो में जकड़कर अपने लंड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला, “बहुत मज़ा आया दीदी.. यकीन नही होता की मैनें अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ… तो क्या मैनें तेरी मुठ मारी है.. नही दीदी यह बात नही है…” “तो क्या तुझे अब अफ़सोस लग रहा है अपनी बहन को चोदकर बहनचोद बनने का..” “नही दीदी ये बात भी नही है.. मुझे तो बड़ा ही मज़ा आया बहनचोद बनने में.. मन तो कर रहा की बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रस ही पीता रहू.. दीदी बल्कि में तो सोच रहा हूँ की भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहन क्यों दी.. अगर एक दो और होती तो सबको चोदता… दीदी में तो यह सोच रहा हूँ की यह कैसे चुदाई हुई की पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नही..” “कोई बात नही मज़ा तो पूरा लिया ना?” हां दीदी मज़ा तो खूब आया…” “तो घबराता क्यों है? अब तो तूने अपनी बहन चोद ही ली है.. अब सब कुछ तुझे दिखाओँगी… जब तक माँ नही आती में घर पर नंगी ही रहूंगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊ और तेरा लंड भी चूसू गी.. बहुत मज़ा आता है..” “सच दीदी?” “हां.. अच्छा एक बात है तू इस बात का अफ़सोस ना कर की तेरे सिर्फ़ एक ही बहन है में तेरे लिए और चूत का जुगाड़ कर दूँगी..” “नही दीदी अपनी बहन को चोदने में मज़ा ही अनोखा है.. बाहर क्या मज़ा आएगा?” अच्छा चल एक काम कर तू माँ को चोद ले और मादरचोद भी बन जा..” “ओह दीदी ये कैसे होगा?” घबरा मत पूरा इंतेज़ांम में कर दूंगी.. माँ अभी 38 साल की है, तुझे मादरचोद बनने में भी बड़ा मज़ा आएगा.. दीदी आप कितनी अच्छी हैं.. दीदी एक बार अभी और चोदने दो इस बार पूरी नंगी करके चोदुंगा..” “जी नही आप मुझे अब माफ़ करिए..” “दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार..और लंड को चूत पर दबा दिया।

सिर्फ़ एक बार..मैनें ज़ोर देकर पूछा. सिर्फ़ एक बार दीदी पक्का वादा..” “सिर्फ़ एक बार करना है तो बिल्कुल नही..” “क्यों दीदी?” अब तक उसका लंड मेरी चूत में अपना पूरा रस निचोड़कर बाहर आ गया था. मैनें उसे झटके देते हुये कहा, “अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे?” “हां दीदी..” “ठीक है बाकी दिन क्या होगा.. बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या.. और में क्या बाहर से कोई लाऊंगी अपने लिए.. अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिल्कुल नही.. उसे कुछ देर बाद जब मेरी बात समझ में आई तो उसके लंड में थोड़ी जान आई और उसे मेरी चूत पर रगड़ते हुवे बोला, “ओह दीदी तुम बहुत अच्छी हो…

Updated: June 9, 2019 — 12:18 am
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017 Frontier Theme
error: