काली नेट वाली टी-शर्ट-1

desi kahani: हाय दोस्तों में आपको अपनी एक कहानी बता रहा हूँ तो अब इधर उधर की बाते ना करते हुये सीधे मेरी कहानी पर चलते है तो बात है 27 नवम्बर की जब मे अपने घर से वापस आ रहा था में जब ट्रेन में ट्रेवलिंग कर रहा था संपर्क क्रांति में और मुझे बेंगलूर जाना था कुछ काम से जेसे की आप जानते होंगे संपर्क क्रांति दिल्ली से रात को चलती है तो बस यू समझ लीजिये की रात ओर हल्की ठण्ड ने सारा काम बना दिया हुआ यू की मेरी रिजर्वेशन थी 3 एसी मे मे ट्रेन चलने से पहले अपना समान अपनी सीट पर रख कर अपनी बोगी के सामने खड़ा था तभी मेने 2 लड़कीयो को समान के साथ इधर से उधर भागते देखा मेने ऐसे ही इम्प्रेशन जमाने के लिये पूछ लिया एक्सक्यूज मी में आइ हेल्प यू वो तो जेसे इंतज़ार ही कर रही थी की कोई हेल्प के लिये पूछे उन्होने पूरी कहानी बता दी की उनकी 3 एसी की वेटिंग क्लियर नही हुई ओर वो टी.टी को देख रही है मेने इम्प्रेशन ज़माने के लिये कहा की आप लोग मेरी बोगी मे बैठ जाइये टी.टी जब मेरी पूछताछ करने आयेगा तब आपकी सीट कन्फर्म करा लेंगे वो झट से मान गयी ओर अपना समान मेरी सीट के नीचे घुसा दिया.

अब वो दोनो मेरे बिल्कुल सामने बेठी हुई थी एक की लम्बाई थोड़ी छोटी थी पर समान काफ़ी बड़े थे ओर रंग बिल्कुल गोरा उसकी काली नेट वाली टी-शर्ट से उसकी सफ़ेद कलर की शमीज़ ओर उसके नीचे काले कलर की ब्रा साफ दिख रही थी बूब्स तो मानो ऐसे टाइट हो रहे थे की अभी सब कुछ फाड़ कर बाहर आ जायेगे ओर उसकी ब्लू जीन्स तो इतनी टाइट लग रही थी की जेसे आधे से ज्यादा कपड़ा उसकी चूत मे घुसा हो ओर दूसरी वाली थोड़ी सांवली थी पर उसकी लम्बाई ओर फिगर कयामत थी पतली सी कमर छोटी सी टी-शर्ट से आँख मिचोनी खेल रही थी बिल्कुल तीखे से बूब्स ओर टाइट से लग रहे थे और ऐसे लग रहे थे की काफ़ी एक्सर्साइज़ करती होगी मेरा मन तो दोनो को वही चूस जाने का कर रहा था पर मेने अपने आपको रोका ओर पहले वाली के लिये तैयार किया क्योकी आज मेरा मन संतरे नही तरबूज खाने का था बस फिर क्या था मेने उन्हे अपनी प्यारी प्यारी बातों मे उलझाया ओर उनसे अटखेलियां करने लग गया सच मे उन्हे छेड़ने मे बड़ा मज़ा आ रहा था.

इतने मे जिन भाई साहब की वो सामने वाली सीट थी उनका सोने का मन हो गया तो मेने उन दोनो को अपनी सीट पर बैठा लिया ओर हमारे साथ एक मिड्ल सीट वाला बंदा भी था छोटी वाली का नाम अंजलि ओर बड़ी वाली का दिव्या था अब दिव्या विंडो सीट पर बैठी थी ओर अंजलि के साथ बिल्कुल चिपक कर मे बैठा था मेने धीरे धीरे उसकी जांघो पर हाथ फेरना शुरू कर दिया पहले तो मे हिचकिचायां पर जब उसने कुछ नहीं कहा ओर स्माइल देती रही तो मेरी हिम्मत ओर बड़ गयी मे एक हाथ से तो उसकी जांघे मसल कर उसे गर्म करता रहा ओर दूसरे हाथ को उसके कंधे से घूमा कर उसके लेफ्ट बूब्स पर हल्का सा रख दिया उसने फिर भी कुछ नही कहा मे समझ गया की लोहा गर्म है मुझे अपना हथोड़ा अब तैयार कर लेना चाहिये लेकिन इतने मे टी.टी आ गया.

मुझे लगा की अब शायद काम बिगड़ जायेगा लेकिन आज शायद भगवान भी मेरे साथ ही थे उन्हे 3 एसी मे तो सीट नहीं मिली पर टी.टी को काफ़ी मनाने के बाद स्लीपर मे एक सीट मिल गयी तो मे भी उन्हे छोड़ने स्लीपर मे चल दिया जहा उन्हे सीट मिली थी वहा काफ़ी आर्मी वाले बैठे थे तो मे दिव्या को वही समान के पास बिठाकर अंजलि के साथ दरवाजे पर जाकर बेठ गया अब तक अंजलि मेरे मे काफ़ी इंट्रेस्टेड हो चुकी थी ओर मेरी जांघ मसलने की गर्माहट वो अभी तक महसूस कर रही थी मेने मोका ना छोड़ते हुये उसे गाल पर किस कर दिया वो ओर गर्म हो गयी ओर उसने मेरे सिर के साथ सिर जोड़ लिया मेने फिर हाथ घूमाते हुये उसका लेफ्ट वाला बूब पकड़ लिया ओर इस बार तो ज़ोर से मसलने लगा वो एकदम बोली नहीं मत करो दर्द हो रहा है.

मेने कहा इसी दर्द मे तो मज़ा आता है ये कहते हुये मेने उसके निपल पकड़ लिये ओर अपनी हार्ड उंगलियो से उसके सॉफ्ट निपल गोल गोल घूमाने लग गया जेसे ही अंजलि ने मुझे किस किया मे समझ गया की अब टाइम आ गया है तो मेने उसे अपनी 3 एसी की सीट पर ले जाने की सोची लेकिन अब तक 3 एसी ओर स्लीपर के बीच का शटर डाउन हो चुका था ओर दरवाजे पर बैठ कर ठण्ड भी लग रही थी तो मेने दरवाजा बंद कर दिया ओर वही खड़े हो गये उस समय रात के 1 बज रहे थे मेने जानबुझ कर कपकपी का बहाना किया ओर अंजलि को गले लगा लिया उसने मुझे अपने सीने से लगाते हुये अपनी शॉल मे ले लिया मेने वही खड़े खड़े उस पर किस की बरसात कर दी ओर मेरा एक हाथ उसकी ब्रा तक पहुँच गया ओर एक पेंटी तक लेकिन उसने मना करते हुये मुझे पीछे हटा दिया.

Updated: August 23, 2019 — 10:41 pm
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