काली नेट वाली टी-शर्ट-2

hindi sex story: मे भी होश मे आया ओर सोचा की यह सब करने की यह जगह सही नही है मे ओर अंजलि दिव्या के पास गये लेकिन वो सो चुकी थी किसी महान महापुरुष के कहे अनुसार की “चूत ओर भूत कभी भी कही भी मिल सकती है” इसलिये मे गोली ओर कन्डोम हमेशा अपने साथ रखता हूँ खास करके सफ़र मे ओर वेसे भी 1 बज गये थे ओर आगरा आ गया था मेने टाइम नही निकालते हुये अंजलि को बहला फुसला कर नीचे उतारकर अपनी बोगी मे ले आया वहा आकर देखा तो बिल्कुल अंधेरा था ओर मेरे बिछाने का और चादर मेरी बर्थ पर पड़ी थी ओर आस पास के सब लोग गहरी नींद मे लग रहे थे मेने जल्दी से बिछाया ओर अंजलि को लेटने को कहा वो आकर लेट गयी उसने कहा आप कहा सोयेगे?” तो मेने हल्की सी स्माइल देते हुये उसके साथ ही लेट गया ओर हम दोनो के उपर चादर डाल दिया उसने कहा यह ग़लत है.

किसी ने देख लिया तो तो मेने उसे यह कहकर चुप करा दिया की आवाज़ मत करो नही तो कोई जाग जायेगा ओर यह कहकर कसकर उससे लिपट गया ओर उसे उपर से नीचे तक चूमने लगा वो सिसकियां भरने लगी तो मेने झट से उसके मुँह मे अपना मुँह डाल दिया ताकि ज्यादा आवाज़ ना हो ओर अपने जादू के हाथो को उनकी सही जगह पर ले गया मेने एक हाथ से तो उसकी टी-शर्ट ओर शमीज़ को उपर किया ओर ब्रा के उपर से उसके बूब्स मसलने लगा ओर दूसरे हाथ से उसकी जीन्स खोलने लगा टी-शर्ट ओर शमीज़ तो झट से उपर हो गयी थी पर जीन्स काफ़ी टाइट थी लेकिन हम कहा रुकने वाले थे दोनो हाथो से उसकी जीन्स घुटनो तक कर दी ओर उसकी कोमल सी चूत पर हार्ड सी उंगलियां फेरने लगा.

मेने उसकी ब्रा के हुक पीछे से खोलकर उसके तरबूज जेसे बूब्स को अपने मुँह मे ले लिया सच मे इतने बड़े ओर मस्त बूब्स से मे पहली बार खेल रहा था ओर दूसरे हाथ ने भी अपना काम कर दिया था मेने उसकी पेंटी के उपर उंगलियां फेरते हुये जब देखा की उसकी चूत हल्की सी गीली हो गयी है तो अपने दूसरे हाथ को हल्के से उसकी पेंटी मे घुसा दिया ओर झटके से उसकी पेंटी उतार दी ओर लंड को चूत में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा ओर जब उसकी चूत से कुछ लिक्विड सा निकला तो मेने अपनी स्पीड ओर तेज कर दी जल्द ही वो बस बस करने लगी पर यहा तो गोली का असर था झड़ने का नाम ही नही ले रहा था.

7 मिनिट की लगातार चुदाई के बाद भी जब नही झड़ा ओर अंजलि बुरी तरह करहाने लग गयी तो मेने उसकी चूत से अपना लंड निकाल लिया ओर हल्का सा उपर होकर उसके बड़े बड़े बूब्स के बीच की जगह मे दे दिया करीब 5 मिनिट के बाद मेने फिर से अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दिया ओर ट्रेन का ध्यान भूलकर अपनी पूरी स्पीड से उसे पेलने लगा ओर जल्द ही उसकी दोबारा तसली करा कर मेरा झड़ गया वो मेरे सीने से चिपक गयी ओर कहने लगी की सच बताउ मेने पहले भी यह काम कर रखा है पर जेसा मज़ा आज तुमने दिया है कभी किसी ने नही दिया करीब 15 मिनिट तक एक दूसरे के साथ लिपटे रहने के बाद मेने उसे अपने कपड़े संभालने को कहा ओर में उठकर बाथरूम की तरफ चल दिया अपना कीमती वीर्य वाला कन्डोम मेने फेका ओर मुँह हाथ धोकर वापस आ गया तब तक सुबह के 4 बज रहे थे ओर अंजलि भी अपने कपड़े संभाल चुकी थी.

मेने उसे कहा की 5 बजे तक लोग जागना शुरू कर देंगे तो उससे पहले मे तुम्हे वापस स्लीपर मे छोड़ आता हूँ इतने मे ट्रेन भी किसी छोटे मे स्टेशन पर रुकी तो मेने जल्दी से उसे नीचे उतारकर स्लीपर मे दिव्या के पास जाकर लेटने को कहा वहा भी सब सो रहे थे वो झट से मुझसे चिपक गयी ओर किस करने लगी मेने उसे अलग करते हुये सुबह मिलने को कहा ओर वापस जाकर अपनी सीट पर सो गया दोस्तो ये था एक रात का किस्सा ओर जेसे की आप जानते है की दिल्ली से बेंगलूर जाने मे बेंगलूर संपर्क क्रांति मे 2 रात आती है तो अगली रात तो ओर अच्छी निकली पर वो जानने के लिये आपको थोड़ा ओर इंतजार करना पड़ेगा ओर हाँ अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगे तो मुझे कमेन्ट जरुर करे मै आपके कमेन्ट का इन्तजार करूँगा.

Updated: August 23, 2019 — 10:42 pm
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