मैं काम वासना से पागल-4

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वो सब बातें मुझे याद आयी और संगीता दीदी को लाने के लिए मैं एक पैर पर जाने के लिए तैयार हो गया . मुझे टाइम नहीं होता तो भी मैं टाइम निकालता . दूसरे दिन ऑफिस ना जा के मैंने इमरजेंसी लीव डाल दी और तीसरे दिन सुबह मैं पुणे जानेवाली बस में बैठ गया . दोपहर तक मैं संगीता दीदी के घर पहुँच गया . मैंने जान बूझकर संगीता दीदी को खबर नहीं दी थी कि मैं उसे लेने आ रहा हूँ क्योंकि मुझे उसे सरप्राइज करना था . उसने दरवाजा खोला और मुझे देखते ही आश्चर्य से वो चींख पडी और खुशी के मारे उसने मुझे बाँहों में भर लिया . इसका पूरा फायदा लेके मैंने भी उसे जोर से बाँहों में भर लिया जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरी छाती पर दब गयीं . बाद में उसने मुझे घर के अंदर लिया और दिवान पर बिठा दिया .

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मुझे बैठने के लिए कहकर संगीता दीदी अंदर गई और मेरे लिए पानी लेकर आयी . उतने ही समय में मैंने उसे निहार लिया और मेरे ध्यान में आया कि वो दोपहर की नींद ले रही थी इसलिए उसकी साड़ी और पल्लू अस्तव्यस्त हो गया था . मुझे रिलैक्स होने के लिए कहकर वो अंदर गयी और मुंह वगैरा धोके , फ्रेश होकर वो बाहर आयी . हमने गपशप लगाना चालू किया और मैं उसे गये दिनों के हाल हवाल के बारे में बताने लगा . बातें करते करते मेरे सामने खड़ी रहकर संगीता दीदी ने अपनी साड़ी निकाल दी और वो उसे फिर से अच्छी तरह पहनने लगी . मैं उसके साथ बातें कर रहा था लेकिन चुपके से मैं उसको निहार भी रहा था .

संगीता दीदी के साड़ी निकालने के बाद सबसे पहले मेरी नजर अगर कहीं गई तो वो उसके ब्लाउज में कसकर भरे हुए छाती के उभारपर . या तो उसका ब्लाउज टाइट था या फिर उसकी चूचियां बड़ी हो गयीं थीं क्योंकि ब्लाउज उसकी चूचियों पर इस कदर टाइट बैठा था कि ब्लाउज के दो बटनों के बीच में गैप पड़ गया था , जिसमें से उसकी काली ब्रा और गोरे गोरे रंग की चूचियों की झलकियां नजर आ रही थी . सपाट चिकने पेट पर उसकी गोल नाभि और भी गहरी मालूम पड़ रही थी . उसका पहना हुआ पेटीकोट उसके गुब्बारे जैसे फूले हुए नितम्बों पर कसके बैठा था .

माँ कसम !. क्या सेक्सी हो गयी थी मेरी दीदी ! साड़ी का पल्लू अपने कंधेपर लेकर संगीता दीदी ने साड़ी पहन ली और फिर कंघी लेकर वो बाल सुधारने लगी . हमलोग अब भी बातें कर रहे थे और बीच बीच में वो मुझे कुछ पूछती थी और मैं उसको जवाब देता था . अलमारी के आईने में देखकर वो कंघी कर रही थी जिससे मुझे उसे साइड से निहारने को मिल रहा था . जब जब वो हाथ ऊपर कर के बालो में कंघी घुमाती थी तब तब उसकी चूचियां ऊपर नीचे हिलती नजर आ रही थीं . मेरा लंड तो एकदम टाइट हो गया अपनी बहन की हलचल देखकर .

बाद में शाम तक मैं संगीता दीदी से बातें करते करते उसके आजूबाजू में ही था और वो घरेलू कामो में व्यस्त यहां वहां घूम रही थी . मैंने उसे अपने भांजे के बारे में पूछा कि वो कब नर्सरी स्कूल से वापस आएगा तो उसने कहा कि उसका स्कूल तो दिवाली की छुट्टियों के लिए बंद हो गया था और परसो ही उसकी ननद आयी थी और उसे अपने घर रहने के लिए ले के गयी थी , एक दो हफ़्ते के लिए . मैंने उसे पूछा कि एक दो हफ़्ते उसका बेटा कैसे उससे दूर रहेगा तो वो बोली उसकी ननद के बच्चों के साथ वो अच्छी तरह से घुलमिल जाता है और कई बार उनके घर वो रहा है . उस दिन भी उसने ननद के साथ जाने की जिद कर ली इसलिए वो उसे लेकर गयी .

और इसी वजह से संगीता दीदी ने हमारी माँ को फोन कर के बताया कि उसे दिवाली कि लिए हमारे घर आना है क्योंकि दिनभर घर में अकेली बैठकर वो बोर हो जाती है . मैंने उसे पूछा कि उसके मुंबई जाने के बाद उसके पति के खाने का क्या होगा तो वो बोली उसका कोई टेंशन नहीं है और वो बाहर होटल में खा लेंगे . सच बात तो ये थी कि उसे मायके जाने के बारे में उसके पति ने ही सुझाव दिया था और वो झट से तैयार हो गयी थी . मैंने उसे कहा के मुझे मेरे भांजे को मिलना है तो उसने कहा कि कल हम उसकी ननद के घर जायेंगे उससे मिलने के लिए .

रात को संगीता दीदी के पति आये और मुझे देखकर उन्हें भी आनंद हुआ . हमने यहां वहां की बातें की और उन्होंने मेरे बारे में और मेरे माता , पिता के बारे में पूछा . उन्होंने मुझे दो दिन रहने को कहा और फिर बाद में संगीता दीदी को आठ दिन के लिए हमारे घर ले जाने के लिए कहा . मैंने उन्हें ‘ठीक है’ कहा..

Updated: May 9, 2018 — 10:58 pm
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