मेरी छुपी हुई अन्तर्वासना-2

desi kahani मेरी मदद की आवश्यकता नहीं पड़ी, निक्की ने खुद हाँथ पीछे लाकर उसका लिंग पकड़ा और अपनी योनी के छोटे से छिद्र पर लिंग की बारीक नोंक टीका दी, कुत्ते ने जरा भी देरी किये बिना झट से कुल्हे उछाल कर सटाक से लिंग अन्दर घुसा दिया, निक्की ने सिसकी भर कर हाँथ हटा लिया, मेरा दिल बुरी तरह धक धक कर रहा था, आधा इंच मोटा और पांच इंच लंबा कुत्ते का चिकना लिंग सरसराता हुआ निक्की की योनी में घुस गया, इधर मेरे मुंह से भी सिसकारी निकल गई, मैंने तगड़ी झुरझुरी लेकर वहाँ से नजरें हटा ली, अब अन्दर देखने काबिल कुछ नहीं था, अन्दर कुत्ते तथा निक्की के सहयोग से कुत्ते एवं इंसान के अनोखे मीलन का अंतिम चरण चल रहा था,

मेरा शरीर बुरी तरह सनसना रहा था, मैनें किचन में जा कर कई गिलास पानी से अपना खुश्क हो चला हलक तर किया, तब कुछ तस्सली मिली, मैं बाहर आकर बैठ गई, कोई दस मिनट बाद पहले कुत्ता बाहर आया, अब वह बिलकुल शांत था जैसे पेट भर के लौटा हो, वह एक कोने में जाकर लम्बा लम्बा पड़ गया, थोड़ी देर बाद निक्की बाहर आई, उसके चेहरे पर भी शान्ति थी, मगर रंग उड़ा हुवा था, पसीने की बूंदें अभी तक उसके माथे पर चमक रही थी, मुझे बाहर बैठा देख कर वह चौंकी जरूर मगर रुके बिना बाथरूम की और बढ़ी, मैनें कनखियों से उसे देख कर कहा, ” निक्की बाथरूम से निबट कर जरा मेरी बात सुनना,”

” ज …जी…..” वह अचकचा गई और शक भरी नजरों से मेरी ओर देखा, परन्तु मैंने अपने चेहरे पर ऐसा कोई भाव नहीं आने दिया जिससे वह कुछ आइडिया लगाती, वह शान्ति भरी सांस लेकर, ” जी भाभी जी ” कह कर बाथरूम की ओर बढ़ गई, लौट कर मेरे बराबर में बैठती हुई बोली, ” हाँ अब बताइये भाभी जी ” मैनें उसे गौर से देखने के बाद प्रेम से पूछा ” तुं मुझे अपनी क्या समझती है?” ” भाभी ओर क्या?”वह हंसी ” और तुझे यह भी पता होगा की मैं जो कुछ भी कहूँगी तेरे भले के लिये कहुंगी,” ” हाँ…मगर…”उसके स्वर में हल्का सा कंपन उभर आया, ” बात क्या है?”

मैनें एक गहरी सांस लेकर नपे तुले शब्दों में कहा ” यह जो तुं अन्दर कुत्ते के साथ कर रही थी वह सब गलत है,” इतना सुनते ही निक्की का चेहरा फक्क पड़ गया, उसके नेत्रों में घबराहट और लज्जा का समावेश एक साथ हुवा, जैसे किसी चोर को रंगे हांथों पकड़ लिया गया हो, वह हकलाई “भ…भाभी …व …वो …”
” बस मैं समझ गई, सफाई देने की आवशयकता नहीं है, और तुं घबरा भी मत, मैं यह बात अपने तक ही सीमित रखूंगी ” मैंने अपनी मोहक मुस्कान के जरिये उसे कुछ राहत प्रदान की, ” मैं जानती हूँ पागल की इस उम्र में ऐसा होता ही है, मन पर काबू नहीं रहता, हर समय कामुकता भरे विचार रहते हैं मन में, उल्टे सीधे काम मैंने भी किये हैं, पता है जब मैं तेरी ही बराबर थी तो अपनी योनी में मोमबत्ती डाल कर अपना कुमारी पर्दा फाड़ लिया था, बहुत खून निकला था, योनी इतनी सुज गई थी,” मैनें हांथों को ऊपर निचे करके बताया तो निक्की के चेहरे पर रंग वापस लौटा और हल्की सी मुस्कान भी तैर गई,

” यही हाल तो मेरा होता है भाभी इसिलिये….” कहते कहते उसने शर्मा कर गर्दन नीची कर ली,
” मुझे मालुम है, मगर देख कुत्ते के साथ ये सब करना उचित नहीं, वो जानवर है, अगर तुझे कोई बिमारी लग गई तो? इसके साथ ये भी सोच की अगर तेरे पेट में कुत्ते का गर्भ ठहर गया तो?” मैनें उसे झूठ मुठ डराया, सुन कर वाकई उसका चेहरा उतर गया, वो फंसे फंसे स्वर में बोली, ” व …वो सब तो में भी जानती हूँ भाभी, मगर अपने उपर काबू नहीं रहता,”

” तो क्या इंसान तेरे लिये मर गये हैं. किसी लड़के के साथ कर ले.” मैंने कहा ” उससे तुझे पुरा आनन्द भी मिलेगा और कोई खतरा भी नहीं,” मेरी बात सुन कर एकाएक निक्की घबराहट भरे स्वर में बोली ” ना भाभी…मर्द के साथ ना…बाबा…ना,” ” क्यों क्या हुआ ” मैंने मुस्कुरा कर पूछा, ” आप बड़ी हो इसलिए आपको कुछ नहीं लगता, मगर में नहीं….मर्द का इतना लंबा चौड़ा लिंग कभी भी नहीं झेल पाउंगी,” ” क्या?” मैं चौंकी ” तुं कितना बड़ा समझती है मर्द के लिंग को? ” जवाब में वो अपनी कुहनी से जरा निचे हाँथ रख कर बोली ” इतना लंबा और इतना ( दो उँगलियों को फैला कर ) मोटा ” उसने झुरझुरी सी ली,

” पागल हुई है क्या ” मैनें उसकी मजाक उड़ाई, ” यह घोड़े के लिंग का साइज है जो तुं बता रही है, मर्द का तो इससे आधा भी नहीं होता, तुझे किसने बहका दिया,” ” बहका तो मुझे आप रही हो,” वो फौरन बोली, मैनें खुद अपनी आँखों से मर्द का लिंग देखा है, एक बार नहीं बल्कि दसियों बार ” “क …किसका देख लिया तुने?” मेरा स्वर बहक गया, उसकी बात बड़ी चौंकाने वाली थी, ” डैडी का, वो मम्मी के साथ करते हैं तो मैनें कई बार देखा है,” वो अपनी लय में बता तो गई मगर फिर एकदम से शर्मा कर निगाह निचे कर ली,

“ओह ” मेरे होंठ सिकुड़ गये, मगर जितना बता रही थी उस पर मुझे विस्वाश नहीं हुआ,मैं बोली, ” तुम्हें गलतफहमी हुई है ” ” नहीं भाभी मैं सच कह रही हूँ, ” बाई गोड ” उसने मेरी बात काट कर कहा तो मैंने सोचा उसके दिल में गलतफहमी है, खैर मैनें अधिक बहस ना करके उससे कहा, ” ठीक है हो सकता है उनका कुछ बड़ा हो मगर मेरी बन्नो सारे मर्दों के लिंग एक आकार के नहीं होते, जैसे तेरे भईया का लिंग इतना बड़ा है (,मैनें अपने पति के लिंग का वास्तविक साइज बताया, जो की उसके बताए साइज से आधा ही था ) तथा लिंग इससे भी कम होते हैं, कुछ लड़कों के तो चार पांच इंच से अधिक नहीं होते,” मेरी बात सुन कर उसके चेहरे पर अविस्वाश के भाव आये, ” रियली भाभी आप झूठ तो नहीं बोल रही हैं?” ” क्यों भला, तुमसे झूठ बोल कर मुझे क्या मिलेगा?” मैनें उसे विस्वाश दिलाया, तुं किसी और का लिंग देखेगी तो खुद तुझे विस्वाश आ जायेगा,” निक्की के चेहरे पर कुछ विस्वाश की झलक उभरी, वह गहरी सांस लेकर बोली, ” अगर ऐसा है तो मैं राकेश का लिंग खुलवा कर देखूंगी,” ” राकेश कौन? ” मैनें फिर पूछा, उसने बताया राकेश उसका सबसे अच्छा बॉयफ्रेंड है और उसने कई बार निक्की के साथ संबंध बनाने की चेष्टा की मगर उसने अपने दिल में बैठी लिंगों की दहशत की वजह से उसे अपना शरीर नहीं छूने दिया, मैं गहरी सांस लेकर बोली, ” जरूर देखना और अगर दिल करे तो खा भी जाना, प्रथम सम्भोग में थोडी बहुत तकलीफ होती है, तुझे वह भी नहीं होगी क्योंकि तुने कुत्ते द्बारा अपना कौमार्य पहले ही भंग करवा लिया है, बेस्ट ऑफ़ लक्, सब कुछ करना मगर सावधानी के साथ, कोई गड़बड़ ना होने पाये, बल्कि जब भी तुझे संभोग कराने की जरूरत पड़े मुझसे पूछ लिया कर, मैं तुझे ऐसी दवा दूंगी जिससे तुझे कभी गर्भ नहीं ठहरेगा,”

Updated: July 2, 2019 — 8:32 pm
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