मेरी छुपी हुई अन्तर्वासना-3

” hindi sex story अच्छा तो आप भी वही दवा खाती हो ” उसने आँख मटकाई ” तभी तो मैं भुवा नहीं बनी, ” उसके गाल पर थपकी देकर बोली “काफी समझदार हो गई हो, तुझे भुवा बनने की इच्छा है तो आज से ही गोली का इस्तेमाल बंद, पूरा पैकेट रखा है, तूं ले लेना, तेरे काम आयेगा’ इस तरह निक्की को मैनें सब तरह से तसल्ली दे दी, मैं जानती थी की लड़की को इस तरह बहका कर मैं गलत कर रही हूँ, लेकिन यह भी जानती थी की निक्की मानने वाली नहीं है, वह कभी ना कभी तो कुछ करेगी ही, तो क्यों ना उस सबका पता मुझे रहे ताकि परिवार की इज्जत को कोई बट्टा भी ना लगे, और समय समय पर मैं उसे सही राय देती रहूँ,

उसे तो मैनें जो समझाना था समझा दिया लेकिन खुद उलझन में फंस गई, जैसा कि निक्की ने अपने डैडी यानी मेरे ससुर के लिंग का वर्णन किया था, वह अकल्पनीय था, मगर निक्की इतना भी झूठ नहीं बोल सकती थी, चाहे उतना ना सही मगर ससुर का लिंग बड़ा जरूर होगा, पर कितना? क्या मेरे पति के लिंग से भी बड़ा? जबकि मैं अभी तक पति के लिंग को ही बहुत बड़ा मानती थी, निक्की ने मेरी इस धारणा को ही बदल दिया, उसके हिसाब से मेरी कल्पना में लंबा चौड़ा बन्बु जैसा लिंग लहराता हुआ घुम रहा था, मैनें तय कर लिया कि मैं ससुर का लिंग एक बार देखूंगी जरूर, मगर कैसे? इस समय तो सास भी घर में नहीं थी जो मैं उन्हें संभोग करते देख लेती, मैं दिनभर तरकीब भिडाती रही कि किस तरह उनके लिंग को देखूं? रात होते होते मैनें अपने दिमाग में उनका लिंग देखने के लिये एक योजना बना डाली, अपनी योजना के मुताबिक मैं उनके दूध में नींद कि दो गोलियां डाल कर उनके कमरे में रख आई, ससुर सोने से पहले दूध पिने के आदि थे, निक्की अपने अलग कमरे में सोती थी, वह अपने कमरे में जाकर लेट गई, और मैं अपने कमरे में, रात साढ़े ग्यारह बजे तक इन्तजार करने के बाद मैं उठी, अब मैं निश्चिंत थी कि ससुर जिन्हें मैं भी डैडी कहती थी वह भी नींद कि गोलियों के प्रभाव से सो चुके होंगे, जहां वह सो रहे थे मैनें उस कमरे का दरवाजा खोल कर देखा,

मेरा मन मारे खुशी के उछल पड़ा, ससुर खर्राटे भर रहे थे, मैनें दबे पाँव अन्दर जाकर दरवाजा बंद कर लिया और उनके पास जाकर पहले डैडी डैडी कहके धीमे से पुकारा, मगर उन्होंने सांस भी ना ली, वो बेखबर सोते रहे, नींद कि गोलियों का उन पर पूरा प्रभाव था, मैनें धीरे से उनकी धोती के पट इधर उधर पलट दिये, उन्होंने निचे नेकर नहीं पहन रखा था, उनका लटका हुआ लिंग उन्ही कि भाँती चैन की नींद सो रहा था, सिकुड़ी हुई हालत में भी वह करीब तीन चार इंच लंबा था, एक छोटे से केले जितना, मुझे निक्की की बात में कुछ सच्चाई दिखाई दी, मगर इस हालत में उसकी पूरी लंबाई चौडाई का आइडिया लगाना एकदम नामुमकिन था, लिंग की असली हालत जानने के लिये जरूरी था लिंग को खड़ा किया जाना,

मगर यह भी एक समस्या थी, भला उत्तेजित किये बिना लिंग खडा कैसे होता, डैडी को जगा कर तो उत्तेजित कर नहीं सकती थी, काफी देर सोचने के बाद मैनें धीरे से लिंग पर अपना हाँथ रख दिया, मेरा दिल धड़क उठा, ससुर की ओर देखा, उनके चेहरे पर कोई भाव ना उभरा, तब मैनें हिम्मत कर के लिंग पर धीरे धीरे हाँथ फेरा फिर भी जब लिंग की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं आया तो मैनें उँगलियों का दायरा बना कर लिंग पकड़ लिया और हाँथ को धीरे धीरे हिलाया तो लिंग में थोड़ी सी सुरसुराहट पैदा हुई, मैं जल्दी जल्दी उसे सहलाने लगी, लिंग धीरे धीरे फूलने लगा, काफी देर की मेहनत के बाद जब लिंग झटके खाता हुआ उठा तो मैनें घबराहट में उसे छोड़ दिया, मारे हैरानी के मेरा बुरा हाल हो गया, निक्की की बात में बहुत सच्चाई थी, लिंग का साइज सचमुच गधे के लिंग जैसा था, वही आकार प्रकार रूप रंग, सब कुछ वही, देखने वाले को धोखा हो जाये की कहीं मेरे ससुर गधे तो नहीं हैं, यह मेरे लिए ही नहीं बल्कि किसी के लिये भी आश्चर्य ही बात हो सकती थी, मैनें देखा ससुर अभी तक नींद के प्रभाव में हैं और वे अभी जल्दी से जागेंगे भी नहीं तो कुछ अधिक हिम्मत पर उतर आई, उनके लंबे लिंग को देख कर कोई और भावना तो नहीं आई लेकिन यह भावना जरूर थी की मेरी सास ने अब तक इस लिंग को कैसे झेला होगा,

मेरे मन की स्थिति खराब हो गई, मेरे मन में एक जिज्ञाशा उठी, मैनें लिंग को दबा कर देखा, उसकी कठोरता में भी कोई कमी नहीं थी, मैं उपर चढ़ गई, ससुर की टांगों को बीच में लेकर मैं धीरे धीरे घुटनों के बल बैठी और सरक कर लिंग के पास आई, मैनें अपने कुल्हे ससुर की तंदरुस्त जाँघों पर टिका दिये, पर भार नहीं डाला, ससुर को चेक किया वे सो रहे थे, मैं निश्चिंत होकर अपना काम करने लगी, मेरा इरादा केवल लिंग को नाप कर देखने का था, घुटने मुड़ने की वजह से मेरी साड़ी और पेटीकोट लिंग के आगे आ गये, मैनें फिर धीरे से उठ कर पेटीकोट समेत साड़ी को उपर तक समेट लिया, मेरी जांघें पुरी नंगी हो गई, मगर कोई बात नहीं, ससुर मुझे देख थोड़े ही रहे थे, इसलिये मैनें नंगी जाँघों की परवाह किये बगैर दुबारा धीरे से जाँघों पर बैठ गई, एक हाँथ से लिंग पकड़ा और सीधा करके अपने पेट पर लगाया, गर्म गर्म चिकना लिंग पेट पर सटा गुदगुदी कर रहा था, मैनें जो उपर तक उसका साइज देखा तो दिल धक्क से रह गया, हालांकि मैं कद में लंबी थी फिर भी उनका लिंग मेरी पसलियों से इंच भर निचे तक आ रहा था,

” ब…बाप…..रे ” मैं सास की हिम्मत की दाद दिये बिना ना रह सकी, जिनकी योनी के रास्ते से लिंग घुस कर पसलियों तक पहुँच जाता होगा, कैसे बर्दास्त करती होंगी वे इस गधे सामान लिंग को, चौड़ाई भी कम नहीं थी, एक टेनीस की बोल से जरा सा कम चौड़ाई वाला सुपाड़ा सास की योनी में घुसता कैसे होगा? यह बात तो और भी आश्चर्य में डालने वाली थी,

मैं उसी प्रकार धीरे से घुटनों पर खड़ी हो गई, लंबाई नाप चुकी थी अब चौड़ाई नापनी थी, मैनें अपनी साड़ी और पेटीकोट को कूल्हों से उपर तक उठा कर एक हाँथ से साड़ी और पेटीकोट संभाला तथा दुसरे हाँथ से लिंग पकड़ कर अपनी जाँघों के बीच में ले आई, इस समय मैं धड़ तक पूरी नंगी थी, मेरी छोटे छोटे बालों युक्त योनी अपने निचे विकराल लिंग को देख कर घबरा उठी थी, उसे डर लग रहा था की कहीं उछलता कूदता लिंग उसे फाड़ ना डाले, योनी ने सनसना कर चेताया की मैं खतरा मोल ले रही हूँ, मगर मैनें उसे दिल ही दिल में तस्सली दी बस एक मिनट अभी हट जाउंगी जरा लिंग का साइज नाप लूँ, मेरी योनी ने इजाजत तो ना दी मगर मैनें उसकी सुने बगैर थोड़ा निचे होकर लिंग अपनी योनी पर रख लिया, लिंग की मोटाई हौलाने वाली थी, मेरी जांघें फैली हुई थी फिर भी लिंग का चौडा सुपाड़ा मेरी जाँघों के सिरे पर टच कर रहा था, मैनें झुक कर निचे झाँका,

” उफ,” दिल धक् से रह गया, लिंग मुंड ने मेरी योनी को उपर तक ढक लिया था, अब तक मेरी योनी उसकी गर्मी से झुलसने लगी थी, यहाँ एक गड़बड़ चल रही थी जो मुझे पता नहीं थी, ससुर जिन्हें मैं नींद की गोलियों के प्रभाव में बेखबर सोता समझ निश्चिंत होकर ये सब कुछ कर रही थी यह नहीं जानती थी की वे शराब पिने के आदि हैं और शराब पिने वालों पर नींद की गोलियां कुछ ख़ास असर नहीं दिखाती, वे तो कभी के जाग चुके थे, और मुझे लिंग की नाप तौल करते हुवे भी देख रहे थे, उस और से बेखबर एक बारगी मेरा मन हुवा जोर लगा कर देखूं की इतना बड़ा लिंग घुसेगा कैसे, पर योनी ने फौरन घबरा कर इनकार कर दिया, खुद मुझे भी अपना यह विचार पूरी तरह जंचा नहीं, इससे पहले की मैं उत्तेजना में पागल होकर कोई उलटा सीधा कदम उठाती मैनें विचलित होकर उठना चाहा, मगर तभी ससुर ने आँखें खोल कर धीरे से कहा, “इस तरह क्या पता लगेगा बहु, अन्दर करा कर देख लो ”

“आं” मैं इस तरह उछल पड़ी जैसे बिच्छू ने डंक मार दिया हो, मैनें घबरा कर ससुर की ओर देखा, उन्हें जागते देख मेरे शरीर से इस तरह हवा निकल गई जैसे गुब्बारे में से हवा निकल जाती है, शरीर स्वयं ढीला होकर उनके लिंग पर भार बनता जा रहा था, तभी उन्होंने मेरी जांघें पकड़ ली और सहलाते हुवे बोले ” लाओ मैं ही अन्दर कर देता हूँ,” उनके इरादे जान कर मुझ पर बला का खौफ हावी हो गया और पहली बार एहसास हुआ की मेरा भार उनके लिंग पर बहुत बढ़ गया है, लिंग योनी के होंठों को फैला कर योनिमुख में चुभ रहा था, मैनें घबराहट में वहाँ से उछल कर दूर हट जाना चाहा परन्तु ससुर पहले ही वार कर चुके थे,

मेरी जाँघों को पकडे पुरी ताकत से शरीर को निचे खींचते हुवे उन्होंने निचे से जोर की उछाल भरी, एक झटके में लिंग ने योनी को बुरी तरह चौडाया और अगले झटके में तडाक से अन्दर भी घुस गया, उनके बल के आगे मैं लिंग को प्रवेश होने से ना रोक सकी, मारे दर्द के मेरा मुंह खुले का खुला रह गया, आवाज जैसे गले में ही अटक गई, लगा जैसे मेरी जाँघों समेत योनी को चिर दिया गया हो, मेरे हाँथ से पेटीकोट समेत साड़ी छुट गई, लिंग और योनी साड़ी के अन्दर ढँक गये, अब आड़ में लिंग अन्दर को बढ़ने की नाकाम चेष्टा कर रहा था क्योंकि मैनें किसी तरह कोशिश कर के अपने भार को निचे गिरने से रोक साड़ी के उपर से लिंग को पकड़ लिया और चिल्लाई,

Updated: July 2, 2019 — 8:32 pm
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