मेरी छुपी हुई अन्तर्वासना-4

” sex stories in hindi ना…नहीं….डैडी….म…मर जाउंगी. हाय….मेरी…योनी….फटी…मैं बर्दास्त नहीं कर सकती …..छ…छोड़ ,दो…..मुझे…ज…जोर मत लगाओ डैडी…आई…ई …इई…. डैडी अब मानने वाले नहीं थे, वे तरंग में भर कर उठ बैठे, मैं पीछे उनकी टांगों पर गिरी, लिंग हांथों से छुट गया,, गिरने की वजह से लिंग जोर से हिला तो मेरे मुख से चीख निकल गई, डैडी ने फटाक से मेरे हाँथ पकड़ कर वासनायुक्त क्रूर स्वर में कहा, ” अब तो कर ही दिया हूँ बहु, भलाई इसी में है कि शोर वोर मत मचाओ, आराम से सीधी लेट कर लिंग अन्दर करा लो वरना जबरदस्ती में तुम हार जाओगी, मैं जबरदस्ती करूंगा तो तुम्हे बहुत दर्द होगा, सोच लो मैं जबरदस्ती करूँ या तुम आराम से लेटती हो?’ डैडी कि बात सुन कर मैं और भी सनांटे में आ गई, बात भी सच थी. मैं कमजोर सी औरत पहाड़ जैसे आदमी के आगे क्या कर सकती थी, लिंग मुंड घुस ही चूका था, बाकी का लिंग भी वे घुसा ही देते अतः मैनें जल्दी से कहा, ” ना…नहीं डैडी….जबरदस्ती मत करना, ठीक है मैं लेट रही हूँ, सीधी लेट रही हूँ, कुछ नहीं कहूँगी, ” मेरे कहने का अंदाज बिलकुल मजबूरी वाला था, तब डैडी ने विजयी मुस्कान के साथ मेरे हाँथ छोड़े और सीधे बैठ गये, उस समय मेरा दिल हुवा कि मैं इसी मौके का लाभ उठा कर उनकी पकड़ से छुट जाऊं, मगर मेरा यह विचार खोखला था, वे पुरी तरह होशियार बैठे थे, बेबसी और दर्द के मारे मेरी आँखों में आंसू आ गये, ससुर ने मुझे समझाया, ” देखो दिल छोटा करने से कोई फायदा नहीं, अब तुम मेरा सहयोग करो और देखो मैं सारा लिंग अन्दर डाल दूंगा और तुम्हे तकलीफ भी नहीं होगी,”

” सा….सारा….?” मेरा कलेजा मुंह को आ लगा, ” अच्छा चलो सारा नहीं डालूँगा, जितना तुम कहोगी उतना ही डालूँगा, बस अब तुम रिलेक्स हो जाओ,” उनकी बात पर विश्वाश करके मैनें अपने आंसु पी लिये और दया मांगती आँखों से उनकी ओर देख कर बोली, ” बहुत लम्बा मोटा है आपका डैडी, जरा आराम से करना, मैं आपके हाँथ जोड़ती हूँ, आह…” जवाब में उन्होंने आश्वासन भरी मुस्कान मेरी ओर उछाल दी, डैडी ने मेरी साड़ी और पेटीकोट को दोबारा उठा कर मेरे पेट पर किया, वे मेरी जाँघों के बीच में देख रहे थे, उनकी आँखों में गहरी चमक थी, मैनें भी सीर उठा कर उधर देखा, ” उफ ” गधे समान लिंग मेरी योनी को बुरी तरह चौडाए अन्दर अटका पड़ा था, मेरी योनी की खाल ऊपर तक सिमट गई और पेडू कुछ फुल गया था, इसलिए क्योंकि वहाँ तक उनका लिंग चढ़ आया था, डैडी ने मेरी टांगें उठा कर अपने कन्धों पर चढा ली और मेरी योनी के उपरी हिस्से तथा जांघों को सहलाते हुवे बोले, ” तुम्हारी योनी और जांघें बड़ी चिकनी हैं बहु, दीपक (मेरे पति) तो मर मिटा होगा तुम पर,”

” हा…हाँ… डैडी संभल कर ” मैनें उनकी बात पर ध्यान दिये बिना उन्हें फिर से चेताया, अब दर्द कुछ कम हो गया था, ” तुम चिंता क्यों कर रही हो बहु, तुम भी तो आखिर मेरी अपनी हो,” ससुर ने मीठी बातों के जरिये मुझे आश्वस्त किया और धीरे धीरे लिंग अन्दर बढाने लगे, मुझे फिर तकलीफ होने लगी, दो इंच लिंग और उपर आते ही मैं दर्द से बिलबिला कर बोली, ” र…रुक… जाओ….डैडी…….बस….बस….करो…..” वे रुक गये और थोड़ा लिंग वापस खिंच कर उतने ही लिंग को आगे बढाया फिर खींचा फिर बढाया, इस तरह लिंग को दो तीन बार आगे पीछे करने के बाद थोड़ा सा लिंग और आगे ठेल दिया, मुझे फिर दर्द हुवा तो फिर रुक कर उतने ही लिंग द्बारा घर्षण करने लगे, इस तरह आधा लिंग उन्होंने मेरी योनी को पिला दिया, उसके बाद रुक कर पूछा
” अब बोलो बहु, अब तो दर्द नहीं है?” दर्द सचमुच नहीं था, वे लिंग प्रवेश के साथ ही साथ दर्द मिटाते जो आये थे, बल्कि अब मेरी योनी में उत्तेजना आ रही थी, मैनें इनकार में गर्दन हिलाई तो बोले,

” आधा बाकी रह गया है उसे भी डाल दूँ,”

मैनें अपना पेट टटोला, लिंग अलग ही पता लग रहा था, वह मेरी नाभी तक आ चूका था, मैनें सोचा जब यहाँ तक आ गया है तो थोड़ा सा और भी उपर आ जायेगा अतः मैं उत्तेजना से कंपकंपाते स्वर में बोली,

” बड़ा विकराल लिंग है आपका डैडी, खैर पहले की भाँती डाल कर देखो शायद थोड़ा सा और उपर आजायेगा,” इस पर डैडी हंसते हुवे बोले, ” थोड़ा सा नहीं बहु, तुम हिम्मत करोगी तो पूरा झेल जाओगी,” ” हिम्मत तो कर ही रही हूँ डैडी, तभी तो इतना झेल गई मगर पूरा नहीं झेल सकुंगी,” ” तुम्हारी सास भी ऐसा ही बोलती थी, मगर पहली ही रात में पूरा पेल दिया था,” ” वे हिम्मत वाली हैं डैडी, खैर देखुंगी,” मैनें उन्हें हरी झंडी दिखाई, तो वे फिर पहले वाले स्टाइल में लिंग ठेलने लगे, लगभग एक चौथाई लिंग बाहर रह गया तो मुझ पर उत्तेजना का बेहद नशा सवार हो गया और यह बात सच है कि जब औरत पर उत्तेजना आती है तो उस समय उसकी योनी में चाहे पुरा मुसल ही क्यों ना ठुंस दो वह मजे मजे में झेल जायेगी, अब मुझे लगा की मेरी योनी में जगह ही जगह है, सो खुद कुल्हे उठा उठा कर ससुर का पुरा लिंग अन्दर ले गई,

” देखो मैं कहता था ना पुरा ले जाओगी, एक इंच भी बाहर नहीं छोड़ा,” ससुर चहकते स्वर में कह कर शरारत से मुस्कुराए, ” हाँ डैडी झेल गई मैं आपका पुरा लिंग,” मैनें भी कामुकता में उनका पुरा साथ दिया, ” पता नहीं आपका इतना लम्बा चौड़ा लिंग किधर जाकर अड़ गया है,” ” इधर ही है, दिखाऊं ,” उन्होंने शरारत में भर कर पुरा लिंग बाहर खींच लिया, मेरा पेट एकदम खाली खाली हो गया तो मैनें बुरी तरह विचलित होकर उनके योनी रस से लिथडे लिंग को पकड़ कर योनी में ठुंसा तो उन्होंने जोरदार धक्कों से लिंग पुरा अन्दर पेल दिया, अब दर्द के बजाये योनी में मीठी मीठी झनझनाहट हो रही थी, ससुर और मैं पुरे जोश में आ चुके थे, उन्होंने टांगें सीधी करके धक्के लगाने शुरु कर दिये तो मैनें भी निचे से उनका भरपुर सहयोग किया, लिंग देखने भालने में भले ही डरावना लग रहा था और योनी के अन्दर लेने में मुझे तकलीफ भी हुई थी, मगर उनके लिंग ने मुझे जो मजा दिया वो मेरे जीवन में अब तक के संभोग सुख का सबसे अच्छा सुख था, ससुर की मर्दानगी पर मैं कुर्बान हो गई, मन में ये सोच भी उभरी की काश पति का लिंग भी ऐसा होता तो मैं हर रोज ऐसा ही सुख पाती, खैर ये लिंग भी घर में ही था, अंतिम चरण में पहुँच कर ससुर ने इतना वीर्य मेरी योनी में उगला की मेरी योनी लबालब भर गई, मजे मजे में आकर मैनें उस रात तीन बार ससुर के साथ संभोग किया, मेरा शरीर थक कर चकनाचुर हो गया तब मैं अपने बैडरूम में आकर सोयी, अब तक मैनें फेमिली प्लानिंग अपनाई हुई थी, संभोग से पहले या संभोग के बाद गर्भ निरोधक गोलियां खा लिया करती थी परन्तु ससुर की मर्दानगी में ऐसी बावरी हुई की समय पर गोलियां खाने का ध्यान ही नहीं रहता, ससुर को अब घर में दिल बहलाने का साधन मिल गया था, वे अब घर से नहीं जाते थे, रात दिन घर में ही पड़े रहते और जब मौका मिलता मुझसे संभोग कर डालते, स्वयं भी संभोग का पुरा मजा लुटते और मुझे भी भरपुर सुख देते, इस तरह महिना कब बीत गया मुझे पता भी नहीं चला, इस बीच एक बार भी पति को याद नहीं किया, बल्कि यही दिल हो रहा था की पति एक महीने की बजाये दो महीने बाद लौटें ताकि मैं ससुर की मर्दानगी का पुरा पुरा आनन्द ले सकूँ, सास और पति के आ जाने के बाद तो हमारा मिलना मुमकिन ही नहीं था और फिर मौका मिला भी नहीं, पति सास तथा छोटी बहन के साथ लौट आये, यहाँ मैं आपको अपना मासिक क्रम बता दूँ ताकि आप जान जाएँ की मेरे पेट में ठहरा गर्भ किसका हो सकता है, जब पति गये थे तब उनके जाने के दो तीन दिन पहले ही मैं मासिक धर्म से निपटी थी. मासिक धर्म के बाद पति ने मेरे साथ संभोग भी किया था, यहाँ यह भी उल्लेखनीय है की मैं पति की मौजूदगी में गर्भ निरोधक गोलियों का नियम से सेवन कर रही थी, पति के जाने के बाद जैसा मैं ऊपर लिख चुकी हूँ ससुर से सम्बन्ध बने, गर्भ निरोधक गोलियों का सेवन तो मैनें किया मगर नियम से नहीं किया, तीन – तीन चार – चार दिन के बाद एक बार याद आती तो गोली खा लेती वरना गोलियां खाए बगैर ही ससुर के साथ खूब सम्भोग किया, इस हिसाब से मेरी माहवारी अगली बार पति के लौटने से पहले ही होनी थी मगर नहीं हुई, उस तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया, पति के लौट आने के बाद ससुर के साथ संबंध ख़त्म हो गये, पति ने संभोग किया मगर जब उनके लौटने के बाद भी एक हफ्ते तक माहवारी के कोई आसार नहीं दिखे तब मैं चौंकी, डाक्टर के पास जाकर चेकअप कराया तो पता लगा की मैं एक माह की गर्भवती हूँ, मैं सोच में पड़ गई की आखिर मेरे पेट में ठहरा गर्भ है तो किसका, ससुर की ओर का पलड़ा भारी था, क्योंकि उस बीच मैनें गोलियों का ठीक से सेवन नहीं किया था, मुझे तो पुरा विस्वाश है पेट में ठहरा गर्भ ससुर का ही हो सकता है, मैं करूँ तो क्या करूँ, बच्चा रहने दूँ या गर्भपात करा लूँ, इसी ऊहापोह में एक महिना और बीत गया, इस समय मैं दो माह की गर्भवती हूँ, अभी अपने गर्भवती होने की बात मैनें किसी को नहीं बताई है, पति को भी पता नहीं है,

Updated: July 2, 2019 — 8:33 pm
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