मेरी वाइफ बिनल-5

desi porn kahani मैंने कहानी को आगे बढ़ाई…

अब तुम उपवस्त्रं निकाल देने से अर्धनग्न हो गयी थी , महाराजा समीर अभी भी तुम्हारे पीछे थे , पीछे से तुम्हारे स्तन को दबाते हुए तुम्हारे गालो को चूम रहे थे। तुम अब कमर से एक दम सीधी हो कर बैठ गयी थी, महराज की नजर सामने रखे हुए शीशे पे पड़ी जिसमे तुम्हारे आगे का जिस्म दिख रहा था महाराजा तुम्हारे स्तनों को देख , तुम्हारी झुकीं हुई पलको देख वो मदहोश सा हो गए।

फिर वो तुम्हारे आगे आ गए और अपने एक हाथ से तुम्हारे गालो के निचले भाग को उपर की और उठाके तुम्हारे चेहरे को देखने लगे, तुमने अपनी आंखें बंद कर रखी थी, तुम्हारी सांसे तेज चल रही थी।

महाराजा समीरने कहा “ रानी बिनल तुम्हारे होंठ और गुलाबी गालो को देख अब में पागल हो रहा हु।”

फिर उन्हों ने धीरे से तुम्हारे होंठो को चूमा बस एक क्षण के लिए ही और फिर अपना उपवस्त्रं भी उन्हों ने निकाल दिया, उन्हों ने तुम्हारे दोनो हाथो को हाथों में लेकर खुद के सिने पे लगाए, उनके सीने को स्पर्श करके तुम्हे महसूस हुआ कि उनका सीन बहुत ही चौड़ा और सख्त है , तुमने अभी भी अपनी आंखें नही खोली थी, महाराजा अपने आप ही तुम्हारे हाथों को कभी अपने कसे हुए कंधो पे कभी अपने चेहरे पे कभी अपनी बाजूओं पे फिरा रहे थे। शायद वो अपने मजबूत शरीर को तुम्हारे साथ वाकिफ करा रहे थे।

फिर उन्होंने एक हाथ तुम्हारी गरदन पर फिरने लगे और एक हाथ से तुम्हारे स्तन को दबाते हुए होंठों को चूमने लगे तुमने अपने होंठ बंध ही रखे थे, वो अपनी जीभ से तुम्हारे लाल होंठो को सहद की तरह चाटने लगे , तुम्हारी सांसे तेज हो रही थी और वो बहुत ही सख्ती से स्तन को दबाते हुए चुम रहे थे अपने बंध होंठों से तुम्हे सांस लेने में तकलीफ हो रही यही , तुम्हें अचानक ही अपने होंठों को खोलना पड़ा और एक क्षण रुकी हुई सांसो को बाहर निकालते हुए तुमने महराजा को अपने से थोड़ा दूर किया , और अहह अहह करके अपनी रुकी हुई सांसो को निकाल ने लगी और महाराजी की और देखा तुम दोनों को नजर मिलते ही महरजा ने फिर से तुम्हारे सिर के पीछे बालो को पकड़कर तुम्हारे खुले मुह में अपनी जीभ को डालकर चूमने लगे बहुत ही गहराई से, तुम्हे बिस्तर की और झुकते हुए वो चुम रहे थे और स्तनों को दबा रहे थे, तुम बिस्तर पर पीठ के बल गिरने ही वाली थी की तुमने अपने हाथो से महाराजा के कंधों को पकड़ लिया।

महाराजा ने भी तुम्हे थाम रखा था और उनका चूमना शुरू ही था तुम भी अब गर्म हो रही थी। उन्हों ने अपने शरीर को तुम्हारे शरीर पे वजन देते हुए ढीला छोड़ दिया और तुम बिस्तर पे गिर पड़ी, महराज भी तुम्हारे ऊपर तुम्हरे होंठो को न छोड़ते हुए तुम्हारे नाजुक शरीर पर गिर पड़े, तुम्हारे स्तन उनके सीने से दब गए , तुम्हे उनका शरीर भारी लग रहा था तुम हिल भी नही पा रही थी, तुम्हारे स्तनों को महाराजा अपने सिने से रगड़ रहे थे और होंठो को कभी गालों को चूम रहे थे।

फिर वे तुम्हारी कमर के आजूबाजू अपने दोनों घुटनों को टिका कर बैठ गए , तुम्हारे स्तन झूल रहे थे तुम्हारे सुंदर चेहरे और अर्धनग्न शरीर को देख महाराजा को अपनी जीत का सही एहसास अब हो रहा था। उन्होंने तुम्हारे दोनो स्तनों को पकड़ा और धीरे धीरे गरदन से स्तनों के बीच के भाग को चूमते हुए नीचे की और जाने लगें, तुम्हारी नाभि की पास आकर उन्हों ने तुम्हारी नाभि में अपनी जीभ के आगे के भाग को डाल। जैसे के नाभि तुम्हारी कोई छुए वो तुम्हारी कमजोरी है ,तुम अब अपने आप को रोकने में नाकाम हो रही थी, महाराजा समीर तुम्हारी नाभि को अपनी जीभ से भर दिया था अब तुमने अपने हाथों को उनके सर को पकड़ लिया उनके बालो में अपनी उंगलिया फसा दी।

महाराजा को तुम्हारी कमजोरी का जैसे पता चल गया और वो तुम्हारे स्तनो को दबाते हुए नाभि को जैसे स्वच्छ कर रहे हो ऐसे अपनी जीभ से चांट रहे थे। तुम अब बेकाबू हो रही थी अब तक तुम्हारे मन मे जो मेरी छवि थी वो ओझल हो रही थी तुम वो पराये मर्द के शरीर से आती गंध और सहवास में खो रही थी, तुम्हारे मन मे जो नकारात्मक विचार थे वो अब निकल गए थे और उसकी जगह नए विचार काम, वासना, नए अनोखे एहसास, किसी परितृप्ति की खोज , समर्पण जैसे विचारो ने ले ली थी।

तुमने महाराजा के बालों को अपनी और खीचते हुए उन्हें ऊपर आने का संकेत दिया, लेकिन वे नाभि को छोड़ नही रहे और तुम्हारे संकेत को समझते हुए भी अनजान बनकर नाभि की नीचे की और चूमने लगे , फिर उन्हों ने तुम्हारे नीचे के वस्त्रो की डोर को अपने हाथो से खोल दिया , अब तुम्हारा निचला वस्त्र ढीला हो गया था अपने होंठो से सरकते हुए तुम्हारे नितम्ब के भाग को चूमने लगे , तुम्हारे नीचे का वस्त्र घुटनों तक आ गया था तुम्हारी गोरी झांग और अंतःवस्त्र दिख रहे थे।

तुम्हारे अंतःवस्त्र से आती योनि की सुगंध को महसूस करते हुए महाराजा तुम्हारे अंतवस्त्र पे अपना मुंह फिरने लगे , वो तुम्हारी गोरी जांघों को कभी चुम रहे थे तो कभी नाभि में उंगलियां डाल रहे थे, तुम अपने आप को काबू में नही कर पा रही थी और तुमने पाने सीधे पैरो को घुटने से मोड़ा , उसका फायदा उठाते ही महाराजा ने तुम्हारा नीचे का वस्त्र जो घुटनो तक आ गया वो निकल दिया , अब तुम सिर्फ अंतवस्त्र में थी जो सिर्फ तुम्हारी योनि ही ढकी हुई थी । महाराजा तुम्हारी बगल में लेट गए तुम अब सीधी होकर लेटी हुई थी उपर झूमर को देख रही थी। महाराजा ने एक पैर तुम्हारी जांघो पे रखा और बाजू के बल तुम्हारी तरफ देखते हुए लेट गये थे।

अब वो तुम्हारे स्तन पर , स्तनाग्र पर उंगली फिर रहे थे और गालों को चूम रहे थे ,धीरे धीरे उनका हाथ तुम्हारी योनि की और बढ़ा उन्हों ने धीरे से उनका हाथ तुम्हारे अंतवस्त्र में डाल और एक उँगली को योनि के होंठों के बीच रख दिया। तुम्हारे मुह से फिर से अहह की आवाज आ गयी। तुम्हारी योनि पर महाराजा समीर ने उंगली फिरना शुरू किया तुम अब गीली हो रही थी। धीरे धीरे महाराजा उंगली को योनि की अंदर की और डालने लगे अब तुम बेकाबू हो कर बड़ी जोरो से सांस ले रही थी। महाराजा तुम्हारे ज्यादा करीब आकर योनि में अपनी को डाल के घुमा रहे थें , तुम्हारे अंतवस्त्र की वजह से वो उँगली को योनि में अंदर बाहर नही कर पा रहे थें। इसलिए उन्हों ने धीरेसे योनिसे हाथ निकाला और तुम्हारे अतवस्त्र को नीचे की और सरका कर अपना मार्ग बना लिया, फिर वो अचानक बिस्तर की बाजू में खड़े हो गए तुम उनकी तरफ न देखते हुए अपनी बड़ी बड़ी आंखों से ऊपर ही देख रही थी। महाराजा का लिंग उनके शाही वस्त्रो में तन के खड़ा हो गया था, वो खड़े हो कर अपने वस्त्रो को निकलते हुए तुम्हारे नंगे शरीर को ऊपर से नीचे तक देख रहे थे।

वो जब अपने वस्त्र की कस के बंधी हु डोर को छोड़ रहे थे तब उनके हांथो को स्नायु और सिने बहुत ही मजबूत और फुले हुए दिख रहे थे। उन्हों ने अपने पूरे वस्त्र निकाल दिए उनका लिंग बहुत ही बड़ा था, वो नीचे की झूल रहा था अभी इतना उतेजित नही हुआ था फिर भी बड़ा चौड़ा और लंबा दिख रहा था। वो एक हाथ से अपने लिंग को सहलाते हुए तुम्हरे पैर की तरफ बिस्तर की और आये, फिर उन्हों ने झुक कर तुम्हारा अतवस्त्र जो घुटनो तक निकला था दोनो हाथो से वो निकाल दिया , तुम्हारे स्तन हिल रहे जब जब उन्हों ने तुम्हारे अतवस्त्र को निकाला , फिर महराजा समीर ने तुम्हारे दोनो पैरो को हाथो से पकड़ कर फैलाया और अपने लिए जगह करते हुए दोनों पैरो के बीच बैठ गए। तुम्हारी योनि से रास निकल कर रहा था लेकिन वो अभी पूरी तरह से खुली नही थी।

महाराजा समीर ने योनि को देखते हुए कहा “ रानी आपकी योनि तो बहुत ही नाजुक और अनछुई लग रही है, ऐसा लगता है जैसे इसे किसी ने छुआ भी न हो, जैसे आपका कौमार्य अभी तक भंग भी न हुआ हो, तुम्हारी कमर से उपरकी और हाथ लेजाते है और तुम्हारे दोनो हाथो को उपर ले जाते हुए वो तुम पर लेट गए और बड़ी जोरो से तुम्हे लगे कि और चूमने लगे उनका लिंग जांघो के बीच था क्योंकि वो ऊंचाई में तुमसे बहुत ही लंबे थे ,लिंग की लंबाई का तुम अहसास कर सकती थी, उनके लिंग के नसे फूली हुई थी बहुत ही बड़ा और स्नायुबंध लिंग तुम्हारी झंगो के बीच हिल रहा था अब वो पूरी तरह से खड़ा हो गया था , लिंग का अग्र भाग फुला हुआ था कभी कभी वो तुम्हारी नाजुक योनि के अग्रभाग को छू रहा था , तुम बहुत ही बेकाबू हो गयी जैसे ही महाराजा ने तुम्हारे स्तनों को चूमना शुरू किया , स्तनाग्र को जैसे ही उन्हों ने दाँतो के बीच दबाया तुम्हारे मुह से चीख निकल गयी और दोनों हाथों को छुड़ाकर तुमने महाराजा के कन्धों को पकड़कर उनसे लिपट गयी, तुम्हारे ऐसा करने से महाराजा प्रसन्नता से तुम्हे चूमने लगे , तुमने अपने नाखून को महाराजा की पीठ पर जैसे गाड़ दिया । अब जाकर महाराजा को जैसे सफलता प्राप्त होने का एहसास हुआ , तुमने अपने घुटनों को मोड़ लिया और महाराजा का लिंग अब तुम्हारे दोनो पैरो के बीच योनि के नजदीक था, महाराजा घुटनों के बल बैठ गए और तुम्हारी योनि के भाग को सहलाने लगे तुम्हारी योनि गीली हो कर लिंग को अंदर लेने में सक्षम हो गई थी, और महराजा ने एक हाथ तुम्हारे नितम्ब पे रखा और अपने लिंग का आगे का तुम्हारी योनि में अग्रभाग पर फिरने लगे , वो थोडा अंदर ले जाते और कभी बाहर निकालके योनि के होंठो के उपर रगड़ रहे थे।

तुम अब अहह अहह अहह कर के सांस ले रही थी।

योनि से बहते रास से महाराजा समीर का बड़ा लिंग चमक उठा था फिर उन्हों ने अचानक ही आधा लिंग तुम्हारी कसी हुई योनि में डाल दिया और तुम बहुत ही जोरो से चिल्लाई अहह अहह,” महाराजा बहुत ही धैर्यवान थे, उनके लिंग का अग्रभाग अभी तुम्हारी योनि में गया था तुम्हारी फिर भी तुम्हें दर्द ही रह था उनके अग्रभाग को महसूस कर के उनकी लिंग की चोड़ाई का तुम्हे अंदाज़ा आ गया था। उनके दोनों हाथ तुम्हारे दोनो हाथो के बगल में बीच थे तुमने उनकी तरफ देखा उन्हों ने भी तुम्हारी आँखों मे देखा , और तूमने गहरी सांस लेकर आंखों को बंद करते हुए महाराजा समीर के बाजुओ को पकड़ के अपनी और खिंचा और महाराजा तुम्हारी चेष्ठा को समझते हुए तुम पर लेट गए , तुम उनके कंधो पे अपने हाथ फिरने लगी, उनका आधा लिंग तुम्हारी योनि में था महाराजा धीरे धीरे उनके लिंग को तुम्हारी योनि के अंदर धकेल रहे थे, तुम बहुत चीख रही थी और अपने दांतों को महाराजा के कंधों पर चुभा रही ही।

महाराजा समीर ने कहा “ रानी बिनल आपकी योनि इतनी कसी हुई है कि मेरा पूरा लिंग में अंदर डालने में असमर्थ हो रहा हु , तुम्हे महराजा के लिंग में अग्रभाग से ही बहुत ही ज्यादा परितृप्ति का अहसास हो रहा था और तुम बहुत ही आनंद लेने लगी थी, तुमने उन्हें कोई जवाब नही दिया , लेकिन इतने में ही महाराजा ने बेकाबू हो कर और तुम्हारी खामोशी को चीरने के लिए बहुत बड़े जटके के साथ अपने लिंग को बड़ी ऊर्जा से तुम्हारी योनि में धका देखे घुसा दिया, तुम बहुत ही जोरो से चीखने लगी , महाराजा समीर की भी चीख निकल गई क्योंकि उनके लिंग की चमड़ी तुम्हारी योनि के अंदर विरुद्ध दिशा में खिंचाई महसूस कर रही थी, पूरा शयनखंड तुम्हारी चीखो से गूंज रहा था, महाराजा का लिंग और उतेजित हो रहा तब उनकी लिंग की नसें लहू से भर गई थी , तुम्हारी नाजुक योनि में उनका लिंग अब पूरी तरह से घुस गया था जैसे जैसे महाराजा समीर ने लिंग को अंदर बाहर करना शुरू किया तुम्हारी दर्दभरी चीखे और तेज होने लगी ,

“अहह अहह महाराजा समीर अहह अहह” तुमने पहली बार अपने मुह से उनका नाम लिया।

महाराजा समीर खुश हो गए और उन्हों ने अपनी गति को बढ़ाया तुम्हारे दोनो पेर हवा में फैले हुए थे , तुम्हारी योनि को महाराजा के बड़े लिंग ने जैसे चिर दिया था। तुमने आज तक ऐसे लिंग का न अहसास किया था ना कभी देखा था, महराज समीर बड़ी ही जोरो से संभोग में जैसे लीन हो गए थे , तुम्हारी चीखो को बंध करने के लिये उन्हों ने अपने हाथ से तुम्हारा मुह बंध कर दिया और बहुत ताकत के साथ अपने लिंग को तुम्हारी योनि में अंदर बाहर करने लगे, अब तुम्हारे मुह से सिर्फ “ उम्म ममम उम्म ममम” की आवाज आ रही थी , महाराजा के हाथों के स्नायु और जांघो के स्नायु जकड़ गए थे, तुम अपने उपर एक महा मानव से संभोग कर रही हो ऐसा महसूस कर रही थी, महाराजा समीर का लिंग तुम्हारे गर्भ को छू रहा था तुम्हारे गर्भ के द्ववार को उनके बड़े लिंग ने जैसे खोल दिया था, अपनी योनि में तुमने कभी भी इस जगह तक किसी भी लिंग का स्पर्श नही महसूस किया था फिर महाराजा ने जब तुम्हारे मुह से हाथ हटा दिया और अपनी गति को बंद कर दिया तब तुम चैन से सांस ले शकी और बड़ी जोरो से हाफ रही थी, तुम्हारी सांसो गर्म हो गई थीं और तुम महाराजा की और आश्चर्य से देख रही थी वो भी तुम्हे देख रहे थे, योनि में उनका लिंग धारण किये हुए तुम बहुत ही कामुक लग रही थी,

महाराजा समीर ने थोड़ा समय लिया और अपने हाथों से तुम्हारे कंधो के पीछे के भाग ले जाकर तुम्हे अपनी और खिंचा और अपने लिंग को योनि में डाले हुए ही बिस्तर कोने की और तुम्हे एक हाथ से कूल्हों को पकड़के उठा लिया और बिस्तर के बाजू में खड़े हो गए तुम अपने हाथों को से उनको लिपट गई और उनके सीने से अपने स्तनों को चिपका दिया , असली दृश्य तो यह था तुमने अपने दोनों पैर को महाराजा की कमर के नीचे से कसकर जोड़ दिया था और महाराजा ने तुमको सहारा देते हुए तुम्हारे गोरे कूल्हों को अपने बड़े हाथो की उंगलियां फैलकर उठाया हुआ था , महाराजा समीर के बड़े कसिले शरीर के आगे तुम जैसे एक खिलौना लग रही थी, महाराजा का लिंग तुम्हारी योनि में तो था लेकिन आधा था, अब उन्हों ने धीरे धीरे तुम्हे हिलाते हुए खड़े खड़े अपने लिंग को योनि में डालना शुरू किया, तुम्हारी कमर कमान जेसी लग रही थी तुम अपने सिर को ऊपर तो कभी नीचे हिला रही थी और महाराजा अपना लिंग तुम्हारी योनि में अंदर बाहर करने लगे , वो धीरे से तुम्हे ऊपर उठाते हुए उनका लिंग बाहर निकलते थे और तुम्हे जैसे जमीन पर पटकने वाले हो ऐसे छोड़ देते थे और पूरा लिंग तुम्हारी योनि में घुश जाता था और तुम्हारी चीख निकल जाती थी, तुम्हारे स्तन हवा में झूल रहे थे और महाराजा अपने कंधों को पीछे की और झुक के तुम्हे अपने ऊपर लेके एक अनोखे संभोग के आनंद ले रहे थे।

तुम्हारी गीली योनि से बेहता हुआ रस फर्श पर लंबी धार में गिर रहा था कभी कभी वो जाडा घट रास लिंग और योनि से लटका रहता था और जैसे जैसे तुम ऊपर नीचे हिल रही थी लटके हुए रास की लंबाई बढती थी और फिर फर्श पर गिरती थी, काफी समय तक महाराजा ने तुम्हारे साथ ऐसे ही संभोग किया , तुम्हारे स्तनों को चूमते हुए तुम्हारे होंठो को चूमते हुए वो बड़ी जोरो से तुम्हे ऊपर नीचे कर रहे हे , लेकिन अभी भी झड़ने का नाम नही ले रहे थे लग रहा था उनको ऐसे संभोग के आनंद कभी न मिला हो आनंद उन्हें तुम्हारे साथ संभोग करने में आ रहा था। उनकी रफतार बढ़ रही थी उसके साथ साथ तुम्हारी चीखे भी बढ़ रही थी पहली बार तुमने अपनी योनि में ऐसा बाद लिंग धारण किया था।

अचानक राजा ने बिस्तर के नजदीक ले जाकर तुम्हे बिस्तर पे लेता दिया और तुम्हारी तरफ झुक के तुम्हारे दोनो पैरो को आने कंधो पे दोनो तरफ रख दिया और बड़ी ही जोरो से तुम्हारी योनि में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगे , उनका लिंग जब तुम्हारी योनि में जाता था तब तुम्हारे पेट से नाभि का भाग ऊपर उठ जाता था ये इस बात का अहसास कराता था कि महाराजा समीर का लिंग कितना लंबा और तुम्हारी योनि में कहा तक घुस रहा था, तुम अब झड़ने वाली थी और महाराजा के पैरों के स्नायु भी तन गए थे उन्हों ने अपनी रफतार लगतार बढ़ते हुए अपने वीर्य को तुम्हारी योनि छोड़ दिया , तुम्हरे स्तनों को बहुत ही कस के पकड़कर वे स्थिर हो गए और तुम्हारी योनि में उनके वीर्य की धारा को छोड़ रहे थे तुम भी झाड़ गयी और उस धारा को अपनी योनि में गर्भ में महसूस कर रही थी, महाराजा ने धीरे से एक धका और दिया तुम्हारे मुँहासे अहह की आवाज निकल गयी और महाराजा के लिंग में बची हुए कुछ वीर्य की बूंदे तुम्हारी योनि में पड़ी। महाराजा संभोग से तृप्त हो कर तुम्हारे नंगे शरीर पर गिर पड़े और तुम भी बहुत ही परितृप्त हो कर उनके गले लग गयी। गीली योनि में महाराजा का लिंग ढीला हो गया था और तुम तो जैसे आधी हो गई थी , तुम्हारी योनि को महाराजा समीर के बड़े लिंग ने जैसे तहसमहास कर दिया था। फिर तुम दोनों ऐसे निर्वस्त्र ही सो गए।

“और कहानी खत्म “ मैंने बिनल से कहा

इतने में बिनल ने कहा “ ओह डार्लिंग मेरी योनि सचमुच में गीली हो गई , क्या कहानी सुनाई तुमने , तुम्हारा लिंग खड़ा नही हुआ? मुज से पूछा।

मैंने बिनल से जुठ कहा “ नही नही ऐसे थोड़ी खड़ा हो जाता है” लेकिन मेरा लिंग तो कहानी की शुरुआत से खड़ा था और अभी तक खड़ा था। अब मुजे मेरे वीर्य को निकाल ना था।

बिनल ने कहा “ जबरदस्त और बहुत ही सेक्सी कहानी थी,

मैंने कहा “ समीर का पात्र तुम्हे कैसा लगा? मेने लिंग को हिलाते हुए कहा।

बिनल ने कहा “ बहुत ही बढ़िया और क्या क्या संभोग किया उसने रानी के साथ “ आश्चर्यचकित स्वर में बिनल ने कहा।

मैंने कहा : “ रानी के साथ? उसमे रानी कोंन थी?

बिनल ने कहा ‘ हां रानी तो में थी “ रानी बीनल”

मेने फिर से पूछा “ तो समीर ने संभोग किसके साथ किया?

बिनल ने कहा “ मेरे साथ”

मैने बिनल से कहा “ ऐसे नही मेने तुम्हे कितने विस्तृत में कहानी सुनाई तो तुम भी जरा विस्तार से कहो।

बिनल ने हँसे हुए कहा “ ऐसा है , अच्छा बाबा”

“महाराजा समीरने मेरे साथ , यानी रानी बिनल के साथ बहुत ही जबरदस्त संभोग किया” बिनल ने बहुत ही प्यार से कहा।

और इतने में ही मेरे लिंग से बहुत ही जोर से वीर्य की धार निकली और जैसे ज्वालामुखी फटी हो ऐसे बहुत देर तक वीर्य निकलता रहा मेरा पूरा हाथ वीर्य से भर गया ।

Updated: June 30, 2018 — 11:57 pm
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