मुहं बोली बहन की चुदाई

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम संजय है। में भोपाल का रहने वाला हूँ। मेरी हाईट 5.11 इंच उम्र 23 साल अच्छा खासा शरीर है। में दिल्ली में एक कमरा किराए पर लेकर रहता हूँ। दोस्तों यह कहानी आज से 3 साल पहले की है। जब में दिल्ली आया तब में एक ऑफिस में काम करता था। तभी मुझे कुछ काम के सिलसिले में अपने घर पर जाना पड़ा.. भोपाल जहाँ पर मेरे मम्मी, पापा रहते हैं।

दोस्तों जब में वहाँ से लौटने लगा तो तभी मेरे पड़ोस वाली आंटी आई और मुझसे कहने लगी कि बेटा मेरी लड़की भी दिल्ली में रहती है उसकी तबीयत बहुत खराब है प्लीज़ उसे यह कुछ पैसे दे देना और हो सके तो उसका कुछ दिन ख्याल रख लेना। तो मैंने कहा कि ठीक है और मुझसे जो बन सकेगा में कर दूँगा। फिर जब में दिल्ली आया.. तो मैंने रश्मि को फोन किया और कहा कि आंटी ने कुछ पैसे भिजवाए है तुम कहाँ पर रहती हो मुझे बताओ मुझे तुमसे मिलना है।

रश्मि : में कालकाजी रहती हूँ भैया।

में : ठीक है तुम ऐसा करो में तुमको कल 6 बजे मिलता हूँ शाम को ऑफीस के बाद।

रश्मि : ठीक है भैया जब आप यहाँ पर पहुंच जाओ तो मुझे फोन कर देना में आपको अच्छे से पता बता दूंगी।

में : ठीक है.. फिर दूसरे दिन शाम को जब में ऑफीस से फ्री हुआ तो में कालकाजी बस स्टॅंड के पास पहुंचा और मैंने रश्मि को फोन किया।

में : हैल्लो रश्मि.. में बस स्टॅंड पर खड़ा हूँ सफेद शर्ट और काले कलर की शाइनिंग पेंट में।

रश्मि : भैया आप वहीं पर रूको में अभी थोड़ी देर के बाद आती हूँ।

फिर मैंने देखा कि एक लड़की इधर उधर देखती हुई आ रही है और मैंने सोचा कि हो सकता है यही रश्मि हो। तो में बाईक से उतरा और उसके पास गया और उससे पूछा।

में : क्या तुम रश्मि हो ?

लड़की : नहीं मेरा नाम रश्मि नहीं है.. यह स्टाईल बहुत पुराना हो गया है लड़की को पटाने का।

तो मैंने उसे सॉरी बोला और पीछे मुड़कर आने लगा.. तभी उस लड़की ने कुछ फुस फुसाते हुए कहा।

लड़की : पता नहीं कहाँ कहाँ से आ जाते है?

फिर यह बात सुनकर मेरे बदन में आग लग गई।

में : हैल्लो मेडम.. में आपको पटाने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ। में तो किसी का इंतज़ार कर रहा हूँ और आप इधर उधर देखती हुई आ रही थी तो मैंने सोचा कि आप वही हो।

लड़की : वैसे भी तुम मुझे पटा भी नहीं सकते और तुम्हे पता नहीं में कौन हूँ?

में : होगी कोई बड़े बाप की बिगड़ी औलाद।

तभी मैंने देखा कि एक पुलिस वेन हमारे सामने आ कर रुकी और उसमें से 4-5 पुलिस वाले उतरे और उस लड़की के आगे पीछे खड़े हो गये।

लड़की : चाहू तो में एक मिनट में अभी तुम्हे अंदर करवा दूँ।

में : मैंने सोचा कि बेटा भलाई इसी में है कि बहन की लौड़ी को जाने दे और जो काम करने आया है वो जल्दी से करके लौट जा। तभी उस लड़की ने कहा।

लड़की : तुम जैसे लड़को को में अच्छी तरह से जानती हूँ.. हरामी कहीं के।

तो मेरे तनबदन में फिर से आग लग गई।

में : बहन की लौड़ी तेरा बाप ऑफिसर होगा अपने एरिए में.. में भी मीडीया में हूँ और अगर में अपनी पर उतर आऊंगा तो अच्छा नहीं होगा.. चुप चाप चली जा अब यहाँ से।

पुलिस : साले हरामी।

में : ओए तेरे बाप की जागीर नहीं हूँ और ना मैंने कुछ ग़लत किया है ना तुम लोगो से डरता हूँ और मुझे अच्छी तरह पता है तुम लोगो का काम। अब चुपचाप चले जाओ नहीं तो। फिर उस में से एक समझदार पुलिस वाला था वो मेरे पास आया जो कि उम्र में 50 के करीब था और मुझसे बोला कि क्या हुआ बेटा?

में : अरे अंकल देखो.. में किसी का इंतज़ार कर रहा था और मुझे इन मेडम को देखकर लगा कि यह वही है.. तो मैंने इनसे पूछ लिया तो यह पता नहीं क्यों भड़क गई? कोई बात नहीं बेटा हो जाता है। अभी बिटिया नादान है तुम जाओ अपना काम करो। ठीक है अंकल.. वैसे आपका नाम क्या है? तो अंकल बोली कि नदीम। फिर मैंने कहा कि ठीक है अंकल बहुत बहुत धन्यवाद में चलता हूँ और आप जैसे ही समझदार पुलिस वालो के दम पर ही सब कुछ चल रहा है.. नहीं तो अभी का हाल तो आपसे छुपा नहीं है। तो वो बोले कि क्या करे बेटा? चलो कोई बात नहीं। तो मैंने कहा कि ठीक है.. बाय अंकल।

फिर में जैसे ही पीछे मुड़ा देखा कि एक लड़की मुझे देखकर मुस्कुरा रही है। गोरी चिट्टी, कद 5.6 इंच अच्छे फिगर। क्या आप संजय भैया हो? और तुम रश्मि? हाहहहाहा मुझे बहुत देर हो गई और मेरी वजह से यह सब।

में : अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं.. जब कुछ बुरा करोगे नहीं तो डरना किस बात का?

रश्मि : फिर भी पुलिस वालो को देखकर तो अच्छे अच्छो की हालत खराब हो जाती है।

में : लेकिन वो हैवान थोड़े ही ना होते है.. वो भी हमारी ही तरह एक इंसान होते है अब 5 उंगलियां बराबर तो नहीं.. उनमे कुछ अच्छे तो कुछ बुरे भी होते है ठीक कहा ना मैंने।

में : अच्छा चलो पहले यह बताओ कि तुम्हारा रूम कहाँ है?

रश्मि : यहीं पर पास में है।

में : तो फिर चलो।

रश्मि : हाँ क्यों नहीं.. चलिए ना।

जब में रश्मि के रूम पर गया तो देखा कि छोटे छोटे तीन बेडरूम थे किचन बाथरूम और एक हॉल

में : तुम्हारे साथ और कौन रहता है?

रश्मि : दो सहेलियां उनकी नाईट शिफ्ट होती है दोनों अपने अपने काम में व्यस्त रहती है।

में : अच्छा अच्छा और तुम?

रश्मि : में तो अभी एक कॉलेज से पढ़ाई कर रही हूँ और मेरा आखरी साल है।

में : ठीक है.. अच्छा यह लो पैसे और बताओ कि में तुम्हारी क्या सेवा कर सकता हूँ? आंटी ने तो हुक्म दिया है तुम्हारा ख्याल रखने का।

रश्मि : बस बस बहुत है।

में : चलो ठीक है तो अब में चलता हूँ ज़रूरत हो तो मेरे नंबर पर कॉल कर देना।

रश्मि : ठीक है भैया।

फिर में वहाँ से चला गया शनिवार और रविवार मेरे ऑफिस की छुट्टी होती है। तो शनिवार को में दिन भर घर पर बैठा बैठा बोर हो गया। तो मैंने सोचा कि चलो आज फिल्म देखने चलते है। मुझे तभी रश्मि का ख्याल आया और मैंने सोचा कि में उसको भी अपने साथ में ले लेता हूँ.. हो सकता है कि थोड़ा उसका भी मन बहल जाएगा।

में : हैल्लो रश्मि.. क्या तुम फिल्म देखने चलोगी?

रश्मि : कौन सी?

में : अरे एक हॉलीवुड फिल्म लगी है? एक्शन थ्रिलर है बोलो चलना है? में बोर हो रहा था तो सोचा कि फिल्म देखने चलता हूँ तभी तुम्हारा ख्याल आ गया तो मैंने तुमसे पूछ लिया।

रश्मि : हाँ तो इसमे इतनी सफाई देने वाली कौन सी बात है? ठीक है.. चलो चलते हैं।

में : तो ठीक है.. तुम एक काम करो तुम जल्दी से तैयार हो जाओ में अभी कुछ देर में आता हूँ और अगर ट्रैफिक ज्यादा नहीं हुआ तो में तुम्हारे घर पर 15 मिनट में पहुंच जाऊंगा।

रश्मि : ठीक है तो भैया अब जल्दी से आ जाओ।

फिर में 20 मिनट बाद उसके घर पर बाईक से पहुंच गया और मैंने दरवाजा नॉक किया तो रश्मि ने दरवाजा खोला। फिर मैंने जब उसे देखा तो देखता ही रह गया.. इस पर वो थोड़ा शरमा गई और बोली

रश्मि : ऐसे क्या देख रहे हो?

में : कुछ नहीं तुम तो आज कमाल की सुंदर लग रही हो।

रश्मि : बहुत बहुत धन्यवाद।

में : अच्छा अब चलो वरना हम लेट हो जाएगें।

फिर हम दोनों हॉल पहुंचे और टिकिट लिया कुछ पॉप कॉर्न लिए और फिर अंदर गये। तो वहाँ पर पहले से ही लाईट बुझ चुकी थी। हॉल पूरा भरा हुआ था और हमे सबसे लास्ट में कॉर्नर के पास वाली सीट मिली थी। फिर फिल्म शुरू हुई तो पहले ही उसमे एक हॉट सीन था। तो रश्मि ने शरम से अपना सर नीचे कर लिया। तो मैंने कहा कि इतना क्यों शरमा रही हो। जैसे मुझे कुछ पता ही नहीं है। फिर तुम देखो फिल्म आराम से और मुझे अपना एक अच्छा दोस्त समझो.. इस पर वो हंस दी।

रश्मि : भैया आप भी ना कमाल करते हो.. कुछ भी बोल देते हो।

में : अच्छा मेरी माँ मुझसे ग़लती हो गई.. अब तुम फिल्म देखो।

फिर वो सीन 2 मिनट के बाद ख़त्म हुआ और इतने में कॉर्नर पर जो दो जोड़े बैठे थे वो एक दूसरे को किस करने लगे। तो मैंने साईड से देखा कि वो लड़का उस लड़की के कंधे के ऊपर से उसकी शमीज़ में हाथ डालकर उसके बूब्स दबा रहा था। रश्मि भी यह सब साईड से देख रही थी। फिर धीरे धीरे उस लड़के ने उस लड़की की सलवार में हाथ डाल दिया और उसकी चूत में उंगली डालकर हिला रहा था। लड़की के मुहं से धीरे धीरे आहह की आवाज़ आ रही थी और इधर उनकी हरकते देखकर में भी गरम हो गया था और मेरा लंड फूलकर फटने ही वाला था। तभी अचानक से मैंने देखा कि रश्मि मेरे ऊपर नीचे हिलाते हुए लंड को बड़े ध्यान से देख रही थी। तो जैसे ही मैंने उसकी चोरी पकड़ ली.. तभी उसने मुझे देखा हम दोनों की आँखे टकराई और हम धीरे से हंस दिए।

में : मुझे माफ़ करना यार.. मैंने नहीं सोचा था कि यहाँ पर कुछ ऐसा भी होगा।

रश्मि : कोई बात नहीं में समझ गई.. लेकिन यहाँ पर सब कुछ होता है।

खैर फिल्म ख़त्म हुई रात के 11:30 बज चुके थे और वो ठंड का समय था। फिर मैंने बाईक निकाली और रश्मि बैठ गई। मैंने अपना जॅकेट नहीं पहना था और जब हम बाईक से जाने लगे तो हमे ठंड लगने लगी।

रश्मि : ठंड लग रही है क्या भैया?

में : हाँ यार स्वेटर घर पर ही भूल गया।

तो रश्मि मुझसे और चिपक कर बैठ गई और अपनी शॉल मेरे हाथ के नीचे से निकाल कर मुझे ओढ़ा दिया। उसका एक हाथ मेरे पेट से सीने और दोनों साईड की शॉल पकड़े हुए था और दूसरा हाथ मेरे लंड के सामने सीट पर था। खैर जब बाईक हिचकोले खा रही थी तब उसकी चूचियाँ मेरी पीठ से रगड़ खा रही थी और इसलिए मेरा लंड खड़ा हो गया। तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और इसलिए में बार बार ब्रेक लगा लगाकर बाईक चला रहा था। शायद रश्मि को यह बात पता चल गई और इसलिए वो थोड़ा पीछे हटकर बैठ गई.. लेकिन जैसे ही वो पीछे हटी अचानक से एक गड्डा आ गया और हम दोनों उछल पड़े। फिर अंजाने में रश्मि ने मुझसे चिपककर अपना बैलेन्स बनाया और एक हाथ से मेरी छाती पकड़ी और दूसरा हाथ उसका मेरे लंड को पकड़े हुए था। जब हम संभाले तो तब भी मेरा लंड उसके हाथ में था और वो ऊपर नीचे उछल रहा था। तभी उसने झट से मेरे लंड को छोड़ दिया। खैर जैसे तैसे हम घर पहुंचे।

रश्मि : भैया चलो आप थोड़ी देर बैठो में आपके लिए चाय बना देती हूँ.. आपको घर पर जाते समय ठंड नहीं लगेगी।

में : अरे नहीं ठीक है.. तुम बिना वजह परेशान मत हो।

रश्मि : अरे चलो ना परेशानी किस बात की।

फिर मैंने सोचा कि ठीक है यार चल कितना टाईम लगेगा और फिर मुझे ठंड भी तो लग रही थी और जैसे ही हम रूम में घुसे लाईट चली गई। रश्मि मोमबत्ती ढूँढने चली गई और में अंधेरे में सोफे की तरफ बढ़ गया। तभी अचानक रश्मि जोर से चिल्लाई और में देखने भागा क्या हुआ? और मैंने पूछा क्या हुआ?

रश्मि : मेरे पैर पर कुछ चलकर गया।

में : अरे तुम लड़कियाँ भी ना चूहे और कॉकरोच से डर जाती हो।

फिर में दीवार को टटोलते हुए आगे बढ़ा.. कुछ दिख तो रहा नहीं था.. कि अचानक ग़लती से अँधेरे में मैंने दीवार की जगह रश्मि की चूची हाथ में पकड़ ली। दोस्तो क्या मुलायम थी.. एकदम रुई की तरह और मन तो किया कि रगड़ दूं उउउफफफ्फ़.. लेकिन मैंने हाथ नहीं उठाया। जाने ऐसी कौन सी शक्ति थी जो मुझे उस लम्हे के लिए बाँध गई। इधर मैंने गौर किया कि रश्मि भी कुछ नहीं बोल रही थी बस उसकी बॉडी की कंपन मुझे महसूस हुई। पता नहीं मुझे उस वक़्त क्या हो गया? और मैंने उसकी चूचियाँ पकड़ कर ज़ोर से मसल दी और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए। फिर मैंने महसूस किया कि वो अब भी कांप रही थी.. लेकिन वो मूर्ति की तरह खड़ी थी। तो मैंने उसको अपने बदन से सटाया और उसके होंठ को चूसने लगा उूउउफ़फ्फ़ क्या मज़ा आ रहा था? फिर मैंने धीरे से उसकी जिन्स में अपना एक हाथ डाल दिया और झट से उसकी चूत पर हाथ घुमाने लगा.. लेकिन अफ़सोस मेरा हाथ सिर्फ़ जींस के अंदर गया पेंटी के नहीं और तभी लाईट आ गई और रश्मि ने अपने कांपते बदन से मुझे धकेला और मुझे एक ज़ोर का थप्पड़ मार दिया।

रश्मि : निकल जा यहाँ से नहीं तो में अभी पुलिस को बुला दूँगी।

फिर में चुपचाप वहाँ से चला गया और दूसरे दिन मुझे मेरी ग़लती का एहसास हुआ तो मैंने उसको बहुत फोन किए.. लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और ऐसे ही तीन चार दिन निकल गये। फिर मैंने उसको एक मैसेज किया डियर रश्मि, प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.. पता नहीं कि मुझे उस वक़्त क्या हो गया था? और में यह सब कर बैठा और में जानता हूँ कि यह सब बहुत ग़लत है.. प्लीज हो सके तो मुझे माफ़ कर देना। मेरा तुम्हारे दिल को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था।

तो उसका बहुत दिनों तक कोई भी जवाब नहीं आया। खैर दिन बीतते गये और करीब एक महीना हो गया। फिर एक दिन मैंने अपने दोस्तों की ज़िद की वजह से एक छोटी सी पार्टी दे दी और सभी ने खुल कर दारू उड़ाई। मैंने भी बहुत दारू पी ली और फिर मुझे छोड़कर रात को सब अपने अपने घर पर चले गए। सुबह करीब 4 बजे मेरी हालत बिगड़ गई.. क्योंकि मैंने दोस्तों की ज़िद पर थोड़ी सी कच्ची शराब भी पी ली थी। तो मेरे दोस्त ने मुझे हॉस्पिटल में भर्ती किया.. वहाँ पर करीब 12 बजे तक मेरी हालत सुधरी तो मुझे डॉक्टर ने डिसचार्ज किया।

तो मेरा दोस्त मुझे स्ट्रेचर पर डाल कर गाड़ी तक ला रहा था कि तभी अचानक मैंने देखा कि रश्मि उधर से ही गुज़र रही थी और हमारी नज़रे टकराई तो मैंने शर्मिंदगी से मुहं दूसरी तरफ घुमा लिया। खैर में घर पर पहुंचा मोबाईल साइलेंट पर किया और सो गया। फिर जब सोकर उठा तो देखा कि रश्मि के 22 मिस कॉल थे। तभी दरवाजे पर नॉक हुआ और मैंने सोचा कि बाद में कॉल करता हूँ पहले देखूं कौन है? तो दरवाज़ा खोला तो आँखो पर भरोसा नहीं हुआ.. मेरे सामने रश्मि खड़ी थी। मेरा शरीर अभी भी काम नहीं कर रहा था और पूरा शरीर कांप रहा था। तो उसने मुझे पकड़ा और दरवाजा बंद किया। मुझे रश्मि ने ऐसे पकड़ रखा था कि उसकी चूचियाँ मेरी छाती से सटी हुई थी और मुझे रश्मि बेड तक ले गई और लेटा दिया?

रश्मि : एक तो खुद ग़लती करते हो और ऊपर से फोन भी नहीं उठाते?

में : ऐसी बात नहीं है में सोया हुआ था। यह मैंने सर नीचे करते हुए बोला।

रश्मि : सोए हुए थे आप तो दरवाजा इतनी जल्दी कैसे खुल गया?

में : में अभी जस्ट उठा हूँ। फोन साइलेंट पर था यह लो तुम चाहो तो देख लो।

रश्मि : पता है.. पता है.. नाराज़ हो अभी तक मुझसे.. क्योंकि मैंने उस दिन आपको थप्पड़ मार दिया था।

में : नहीं तुमने जो किया बिलकुल सही किया.. ग़लती तो मेरी ही थी।

रश्मि : अच्छा छोड़ो जाने दो भूल जाओ और यह बताओ कि यह सब कैसे हुआ?

में : कुछ नहीं कल रात थोड़ी सी कच्ची शराब पी ली थी इसलिए थोड़ी हालत बिगड़ गई।

रश्मि : अब कैसी है तबीयत?

में : पहले से बेहतर है।

रश्मि मेरे साथ ही बेड पर सटकर बैठ गई।

रश्मि : उस दिन ऐसा क्यों किया था आपने मेरे साथ?

में : मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था। में तो अंधेरे में दीवार पकड़ कर चल रहा था कि अचानक से तुम्हारा वो हाथ में आ गया.. तो मुझे बहुत मुलायम मुलायम सा लगा फिर आगे सब कुछ कैसे हो गया मुझे खुद नहीं पता।

रश्मि : चलो छोड़ो अब पुरानी बातें पहले यह बताओ कि अब तबियत कैसी है?

में : अब तो में बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा हूँ। और तुम बताओ तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?

रश्मि : वो भी ठीक ठाक चल रही है क्या अपने कुछ खाया या नहीं?

में : हाँ थोड़ा बहुत खाया था।

रश्मि : अगर आपको कोई ऐतराज ना हो तो क्या में चाय बना दूँ?

में : हाँ क्यों नहीं.. अपना ही घर समझो।

फिर उसने मुझे उस दिन चाय बनाकर पिलाई और फिर हमारी दोस्ती फिर से शुरू हो गई और हम एक दूसरे के घर पर आने जाने लगे। फिर एक दिन में जब उसके घर पर पहुंचा तो वो नहाने चली गई और जब नहाकर बाथरूम से बाहर निकली तो उसने शरीर पर सिर्फ टावल लपेटा हुआ था। तो में दूर से ही नजरे झुकाकर उसके बूब्स को देख रहा था। फिर वो कपड़े पहनकर मेरे पास आकर बैठ गई तो हम बातें करने। तभी उसने मुझसे पूछा कि आपकी कितनी गर्लफ्रेंड है? तो मैंने कहा कि अभी तक एक भी नहीं। उस दिन से उसके अंदर थोड़ा थोड़ा फर्क आने लगा वो धीरे धीरे मुझसे खुलने लगी। तभी एक दिन उसने मुझे फोन किया और कहा कि उसके साथ रहने वाली लड़की कुछ दिनों के लिए अपने घर पर गई है और उसे अकेले वहाँ पर डर लगता है। तो मैंने सोचा कि यह एक बहुत अच्छा मौका है और मैंने उससे कहा कि कोई बात नहीं.. तुम मेरे रूम पर चली आओ।

तो दूसरे दिन वो मेरे रूम पर पांच दिनों के लिए आ गई। फिर उसने मुझे चाय बनाकर दी और हमने साथ बैठकर चाय पी। फिर में तैयार होकर अपने ऑफिस चला गया और पूरे दिन रात होने का इंतजार करने लगा। तो शाम को में ऑफिस से घर पर पहुंचा उसने खाना बनाकर रखा था और हमने खाना खाया और टीवी देखने लगे.. लेकिन मेरे रूम पर एक ही पलंग होने की वजह से हम एक साथ सो गए और उसे भी कोई दिक्कत नहीं थी। फिर रात को करीब तीन बजे मेरी आंख खुली और मैंने देखा कि वो मेरे ऊपर अपना एक हाथ और पैर रखकर सो रही है। तो मैंने भी थोड़ी हिम्मत करके उसके बूब्स के ऊपर हाथ रखकर सो गया। में सुबह जब उठा तो उसने कुछ नहीं कहा और में ऑफिस चला गया।

ऐसा तीन दिन तक चला और धीरे धीरे उसे भी अहसास होने लगा। एक रात को हम दोनों ने सोने का नाटक किया और थोड़ी देर बाद मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया.. लेकिन उसने कुछ नहीं कहा और मैंने थोड़ी और हिम्मत करके उसके बूब्स सहलाने शुरू किए और धीरे धीरे दबाने लगा। तो वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी और आहें भरने लगी.. वो अब सिसकियाँ ले रही थी और में समझ गया कि वो अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है।

तो मैंने मौका देखकर उसके बूब्स कपड़ो के अंदर से एक हाथ चलाकर सहलाना शुरू किया। वो फिर से जोर जोर से सिसकियाँ लेने लगी में और जोर से बूब्स दबाने लगा और धीरे धीरे उसके कपड़े एक एक करके उतारने लगा वो भी अब मेरा साथ देने लगी और मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया और फिर में उसकी चूत पर पहुंचा और चूत चाटने लगा.. मैंने जैसे ही उसकी चूत पर अपनी जीभ रखी वो उछल पड़ी और गांड ऊपर करके चूत चटवाने लगी। फिर मैंने करीब दस मिनट तक उसकी चूत चाटी और फिर में अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में करने लगा। तो वो मानो तड़प सी गई और कहने लगी कि प्लीज अब और नहीं.. प्लीज डालो ना मुझसे अब और नहीं सहा जाता.. डालो जल्दी से अंदर।

फिर मैंने भी देर ना करते हुए लंड चूत के मुहं पर रखा और एक धक्का दिया मेरा लंड थोड़ा चूत में गया.. लेकिन उसकी एक जोर से चीख जरुर निकली। तो मैंने उसके मुहं पर हाथ रखा और थोड़ा रुका फिर जब वो थोड़ा ठीक हुई तो फिर लगा जोर जोर से धक्के देने और वो चुदाई के मजे लेने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसके दोनों पैर पकड़कर अपने कंधों पर रखे और लंड सेट किया और धक्के देने लगा। तो इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी और में एक बार मैंने फिर भी अपनी स्पीड कम नहीं की और चोदता रहा और करीब 25 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों थककर लेटे रहे। मैंने उसी दिन उसकी एक बार गांड भी मारी और उसे अपनी पूरी रंडी बना लिया।

तो दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई.. इसके बाद हमारा हर दिन चुदाई का होता था।

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