ऑफिस का रूम-1

desi kahani हेलो दोस्तो मेरा नाम हीना हे ओर मे 20 साल की इंजिनियरिंग स्टूडेंट हूँ मैने इन स्टोरियों को अभी कुछ दिनो से पढ़ना शुरू किया है तो सोचा अपनी लाइफ की रियल स्टोरी भी शेयर करूँ। में बी.टेक II ईयर की स्टूडेंट हूँ ये कहानी आज से करीब 1 साल पहले की है जब मे I ईयर मे थी दोस्तो पहले मे आपको अपने बारे मे बता दूं मे दिखने मे काफ़ी खूबसूरत हूँ.

ऐसा मेरी फ्रेंड्स कहती है ओर शायद सच ही कहती है क्योंकि मेने हमेशा लड़को को अपने आस पास फिरते देखा मेरा फिगर भी काफ़ी आकर्षक है 36-28-36 मेरी फ्रेंड्स और ये भी कहती है की तुझे मॉडल होना चाहिये था मेरे बूब्स स्कूल टाइम से ही थे लेकिन कभी सेक्स तक बात नही पहुंची और लड़को से बस किस और बूब्स प्रेस तक ही बात सीमित रही मे भी डरती थी की कहीं कुछ प्रोब्लम ना हो जाये तो मेने आगे नही बढ़ने दिया किसी को यहाँ एड्मिशन के टाइम हॉस्टल की सीट्स फुल हो जाने की वजह से मुझे हॉस्टल मे रूम नही मिल सका ओर बाहर किराये पर रूम लेना पड़ा.

 

अब्बू ने ये देखकर ही किराये पर रहने की इजाजत दी की वहाँ लड़के नही थे सिर्फ़ लड़कियाँ ही थी खेर किसी तरह सेट्ल हो गई मे भी लेकिन मेरा कॉलेज जाने का मन नही करता था क्योंकि मेरी कोई दोस्त भी नही थी ओर ए.सी ब्रांच थी मेरी तो सभी लड़के ही थे तो मे बोर हो जाती थी ये बात अलग है की लड़के सभी मेरे पीछे ही पड़े रहते थे लेकिन मेरा मन नही करता था क्लास में जाने का और लेक्चर्स बोरिंग लगते थे मुझे लेकिन मेरी इस लापरवाही से मेरी उपस्थिती शॉर्ट हो गई मेरा नामे डीटेंड लिस्ट मे आ गया यानी वो स्टूडेंट्स जिन्हे परीक्षा ही नही देने दी जायेगी मेरी तो हालत खराब हो गई परीक्षा ना देने का मतलब था की मेरा 1 साल बर्बाद चला जाता अब्बू अम्मी को क्या कहूँगी मे यही सोच कर मे टेन्शन मे आ गई.  

सभी टीचर्स से रिक्वेस्ट की मेने लेकिन कोई सुनने को तैयार नही था सभी का कहना था की अब तो सिर्फ़ डाइरेक्टर सर ही कुछ कर सकते है लेकिन मेरी हिम्मत नही हो रही थी उनके सामने जाने की फिर मेरी एक सीनियर ने समझाया तो डाइरेक्टर से मिल ले नही तो फैल होने के लिये तैयार रहना मेने दिल को कड़ा करके उनसे मिलने का फेसला किया मिलने से डर इसलिये लग रहा था क्योंकि काफ़ी स्ट्रिक्ट थे वो आर्मी से रिटायर्ड थे करीब 6’6” फुट लंबे ओर काफ़ी भारी शरीर के व्यक्ति थे हमेशा गुस्से मे ही लगते थे लेकिन अब मेने फेसला कर लिया तभी मेरी 1 फ्रेंड ने मुझे उनके बारे मे ये बताया की डाइरेक्टर सर लड़कियों की तरफ़ कुछ ज़्यादा ही ध्यान रखते है कई बार पहले उनके रिलेशन सुनने को मिले है कॉलेज की लड़कियों से अगर तू उन्हे फंसा सके तो समझ काम हो गया तेरा। मेने उसके सामने तो उसे डाट दिया की मे ये सब नही करने वाली चाहे फैल होना पड़े.  

फिर रात भर सोचने के बाद मुझे लगा की यही एक रास्ता है मगर प्रोब्लम तो ये थी की बात केसे वहाँ तक पहुचें खेर मेरी एक फ्रेंड ने मुझे सलाह दी की ऐसे कपड़े पहनना जिनसे आकर्षित हो सके तो मेने भी तैयारी शुरू कर दी मेने आज ब्रा नही पहनी थी एक काले कलर की टाइट टी-शर्ट वो भी बड़े गले की पहन ली इससे मेरी 36 साइज़ के बूब्स बाहर आने के लिये तड़पने लगे ओर क्योंकि टी–शर्ट हल्के कपड़े की थी तो मेरे निपल का शेप भी दिख रहा था नीचे मैने टाइट ब्लू जीन्स पहनी थी जिसमे मेरी 28 की कमर ओर 36 की गांड बाहर निकलने को तैयार थी जेसे ही ये पहन कर बाहर निकली सभी मुझे घूर कर देखने लगे किसी तरह नज़र नीची करके मे पहुँच गई डाइरेक्टर सर के ऑफिस मे डाइरेक्टर सर कोई फाइल पढ़ रहे थे उनकी नज़र नीचे ही थी मेने पर्मिशन ली अंदर आने की ओर उनको विश करके आपनी प्रोब्लम बताई. 

उन्होने बिना देखे ही मुझे साफ कह दिया की मे इसमे कुछ नही कर सकता ऐसे ही करने लगा तो नियमों का क्या फायदा। जाओ यहाँ से मेरा तो एक बार दिल ही टूट गया लेकिन मेने अभी हिम्मत नही हारी थी अभी तो अपना हथियार भी इस्तेमाल नही किया था मे आगे बढ़ कर उनके पेरो को पकड़ कर उनसे रिक्वेस्ट करने लगी ऐसा करते ही उनकी नज़र मुझ पर पड़ी ओर मेरी जवानी को देख कर तो एक बार तो वो अपनी पलक झपकाना ही भूल गये मे भी उनकी आँखो मे देखते हुये रिक्वेस्ट कर रही थी. 

Updated: September 7, 2019 — 10:18 pm
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017 Frontier Theme
error: