ऑफिस का रूम-2

hindi sex stories अब मे उठ तो गई लेकिन झुक कर उनके पैर को पकड़े रखा बड़े गले की टी-शर्ट होने के कारण मेरी चुचियां बाहर निकलने को फड़फड़ाने लगी 1/3 हिस्सा बाहर झूलने लगा सर का तो दिमाग़ ही काम करना बंद कर गया वो तो मेरी रिक्वेस्ट को सुन ही नही रहे थे बस मेरी चुचियों को देखे जा रहे थे मे ये देख कर थोड़ा शर्मा गई ओर उठ कर सीधी खड़ी हुई तब उनका ध्यान मेरी तरफ़ गया लेकिन फिर भी उनकी नज़रे मेरे बूब्स को ही घूर रही थी मेने भी अब अपना हथियार चलाना उचित समझा मेने कहा सर प्लीज मुझे एक मोका दे दीजिये इसके बदले आप जो कहेंगे वो में करने को तैयार हूँ उनकी आँखे चमक गई कहने लगे लेकिन बेटा मेरी भी तो परेशानी समझो मे क्या जवाब दूँगा सबको। मेने कहा सर मे किसी से नही कहूँगी ओर आपको खुश भी कर दूँगी सर ने कहा खुश केसे? मेने कहा सर आप जो कहेंगे वो कर दूँगी सर देख लो तुम्हे वो करना पड़ेगा जो मे कहूँगा मेने कहा हाँ सर सोच लिया मे तैयार हूँ. 

उन्होने कहा ठीक है तो ज़रा मेरे ऑफिस का रूम लॉक करके आओ मे समझ गई थी की अब क्या करने वाले है मे भी चुपचाप बिना कुछ पूछे रूम लॉक करके आ गई सर चलो अपनी टी-शर्ट निकालो ज़रा मे पहले से ही तैयार थी मेने चुपचाप अपनी टी-शर्ट अपने बदन से अलग कर दी टी-शर्ट निकालते ही मेरे बूब्स आज़ाद हो गये ओर सर के सामने तन कर खड़े हो गये सर की तो नज़रे ही चिपक गई ओर उनके मुँह से निकाला ऐसी चूंचियां मेने अपनी लाइफ मे नही देखी है मे कुछ ना बोली लेकिन तारीफ सुन कर खुश हो गई सर ने मुझे अपने पास बुलाया ओर मेरा हाथ खीच कर अपनी गोद मे बिठा लिया मे अचानक हुये हमले से सहन गई इधर सर ने मेरे बूब्स को थाम लिया ओर एक को मसलने लगे ज़ोर ज़ोर से दूसरे को चूसने लगे मुझे उनसे इतनी जल्दी की उम्मीद नही थी उनके इस हमले से मे तड़प उठी ओर मेरे अंदर का नारीपन भी जाग उठा. 

अब मे भी मस्ती लेने के मूड में आ गई उनका लंड मेरी गांड के नीचे दबा हुआ फंफना रहा था इधर सर ने अपना हाथ मेरी चूंची से हटा मेरी जीन्स के अंदर घुसाने की कोशिश करने लगे लेकिन टाइट होने के कारण नही घुस रहा था तो मेने बटन खोल दिया ओर थोड़ा उठ कर अपनी गांड के नीचे सरका दिया इधर सर भी अपना लंड निकाल कर बेठ गये मेरी नज़र उनके खड़े हुये लंड पर पड़ी तो मे तो डर गई करीब 8 इंच लंबा लंड था उनका सर ने मेरी पेंटी भी सरका दी नीचे ओर मुझे अपने लंड पर ही बिठा दिया.  

उनका लंड मेरी जांघो के बीच मे फँसने लगा सर ने फिर से अपना काम शुरू कर दिया मेरी दूसरी चूंची को चूसने लगे ओर मेरे होठो को चूसने लगे मे भी गर्म हो चुकी थी उसकी वजह थी की उनका मोटा लंड जो मेरी जांघो के बीच में बेठ कर मेरी चूत को रग़ड रहा था लेकिन तभी मुझे याद आया की मेरा असली मिशन क्या है कहीं सर मुझे चोद कर भूल ना जाये तो मेने सर को कहा सर आप पहले मुझे पर्मिशन दे दो परीक्षा के लिये सर ने कहा मेरी रानी ये कोन सी बड़ी बात है उन्होने फोन उठाया ओर ऑफीस मे मेरा नाम लेकर उन्हे निर्देश दे दिये ओर अपने पास पड़ी डीटेंड लिस्ट मे से मेरा नाम काट दिया ओर कहा की लो अब तो खुश होना और अब जब बाहर जाना तो अपना एड्मिट कार्ड ले लेना ऑफीस जाकर मे खुश हो गई. 

अब मे आराम से सर को सब कुछ करने देने को तैयार थी सर ने इधर फिर से अपना मिशन स्टार्ट कर दिया उन्होने मेरी चूंचियो को फिर से निचोड़ना शुरू कर दिया लेकिन तभी किसी ने डोर बजाया हम दोनो के ही होश उड गये सर ने मुझे उठाया ओर कहा की जाओ अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे छुप जाओ मे जल्दी से भाग कर बाथरूम मे छुप गई इधर थोड़ी देर मे डोर ओपन होने की आवाज़ आई ओर उनकी बात सुन कर लगा की वहा का ही कोई है जो मेरी ही बात कर रहा है मतलब क्लियर कर रहा था की एड्मिट कार्ड दे या नही तो सर ने कहा हाँ दे देना वो चला गया. 

सर ने फिर मुझे आवाज़ दी मे निकली तो सर ने कहा की अभी जाओ यहाँ से ओर ये बताओ की रात को मेरे साथ चल सकती हो? मेने कहा ठीक है सर मुझे कोई प्रोब्लम नही है तो सर ने कहा की ठीक 7 बजे मुझे कॉलेज के बाहर मिलो मे पिक कर लूँगा तुम्हे कार से फिर मेरे फार्म हाउस पर चलना है तुम्हे मेने कहा ठीक है सर उन्होने जाते-जाते कहा की अपना एड्मिट कार्ड ऑफिस से ले लेना मे खुश होकर बाहर निकली ओर ऑफीस जाकर एड्मिट कार्ड ले लिया लेकिन अब मुझे अपनी फ्रेंड्स को बताना था ओर रात को सर के साथ भी जाना था अब ये आगे की कहानी अगले पार्ट मे। 

धन्यवाद..

Updated: September 7, 2019 — 10:18 pm
Meri Gandi Kahani - Desi Hindi sex stories © 2017 Frontier Theme
error: