रागिनी की मौसी और उसकी बेटी-4

antarvasna: मैं बोला, “लेगी अपने मुँह में एक धार…”।

रीना ने मुँह बिचकाया, “हुँह गन्दे….”।

अब मेरा पेशाब खत्म हो गया था। मैंने हँसते हुए अपना हाथ उसकी पेशाब से गीली चूत पर फ़िराया और फ़िर अपने हाथ में लगे उसके पेशाब को चाटते हुए बोला, “क्या स्वाद है….? इसमें तुम्हारे जवानी का रस मिला हुआ है मेरी रानी।”

यह सब देख रीता बोली, “आप कैसे गन्दे हैं, दीदी का पेशाब चाट रहे हैं”।

मैंने अब अपना हाथ सुँघते हुए कहा, “पेशाब नहीं है, ऐसी मस्त जवान लौन्डिया की चूत से पेशाब नहीं अमृत निकलता है मेरी रानी। पास आ तो मैं तेरी चूत के भीतर भी अपनी उँगली घुसा कर तेरा रस भी चाट लुँगा।”

बिन्दा अब हड़बड़ा कर बोली, “ठीक है, ठीक है, अब आप दोनों कमरे में जाओ और भाई साहब आप अब जल्दी छोड़ लीजिये रीना को, इसे नहाना धोना भी है फ़िर उसको मंदिर भी भेजुँगी।”

मैंने रीना की चुतड़ पर हल्के से चपत लगाई, “चल जल्दी और चुद जा जानू, तेरी माँ बहुत बेकरार है तेरी चूत फ़ड़वाने के लिए…।”

फ़िर मैंने बिन्दा से कहा, “बहुत जल्दी हो तो यहीँ पटक कर पेल दूँ साली की चूत के भीतर क्या?”

बिन्दा अब गुस्साई, “यहाँ बेशर्मी की हद कर दी…कमरे में जाइए आप दोनों.।

मैं समझ गया कि अब उसका मूड खराब हो जाएगा सो मैं चुपचाप रीना को कमरे में ले आया।इतनी देर में पेशाब कर लेने के बाद मेरा लन्ड करीब 40% ढ़ीला हो गया था। मैंने रीना को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और फ़िर से उसकी चूत को चाटने लगा। मैं अपने हाथ से अपना लन्ड भी हिला रहा था कि वो फ़िर से टनटना जाए। देर लगते देख मैंने रीना को कहा कि वो मेरा लन्ड मुँह में ले कर जोर-जोर से चूसे।

रीना अब मुँह बना कर बोली-“नहीं, आप पेशाब करने के बाद इसको धोए नहीं थे, मैं देखी हूँ।”

मैंने उसको समझाया, “और जैसे तुमने अपनी चूत धोई थी…तुम देखी थी न कि मैं तुम्हारे चूत पर लगे पेशाब को कैसे चाट कर तेरी छॊटी बहन को दिखाया था…औरत-मर्द जब सेक्स करने को तैयार हों तो ये सब भूल-भाल कर एक दूसरे के लन्ड और चूत को पूरा इज्जत देना चाहिए। चूसो जरा तो फ़िर से जल्द कड़ा हो जाएगा। अभी इतना कड़ा नहीं है कि तुम्हारी चूत की सील तोड़ सके। अगर एक झटके में चूत की सील पूरी तरह नहीं टूटी तो तुमको हीं परेशानी होगी। इसलिए जरुरी है कि तुम इसको पूरा कड़ा करो।”

इसके बाद मैंने पहली बार रीना को असल स्टाईल में कहा, “चल आ जा अब, नखरे मत कर नहीं तो रगड़ कर साली तेरी चूत को आज हीं भोसड़ा बना दुँगा साली रंडी मादरचोद…” और मैंने अपने ताकत का इस्तेमाल करते हुए उसका मुँह खोला और अपना लन्ड उसकी मुँह में डाल दिया।

वो अनचाहे हीं अब समझ गई कि मैं अब जोर जबर्दस्ती करने वाला हूँ। वो बेमन से चूसने लगी पर मेरा तो अब तक कड़ा हो गया था। पर मैं अपना मूड बना रहा था, उसकी मुँह में लन्ड अंदर-बाहर करते हुए कहा, “वाह मेरी जान, क्या मस्त हो कर अपना मुँह मरवा रही हो, मजा आ रहा है मेरी सोनी-मोनी…” और मैं अब उसको प्यार से पुचकार रहा था। वो भी अब थोड़ा सहज हो कर लन्ड को चुस रही थी।

थोड़ी देर में मैं बोला, “चल अब आराम से सीधा लेटॊ, अब तुमको लड़की से औरत बना देता हूँ…बिन कोई फ़िक्र के आराम से पैर फ़ैला कर लेट और अपनी चूत चुदा….और फ़िर बन जा मेरी रंडी…”।

मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी जाँघो के बीच में आ गया। मेरा लन्ड एकदम सीधा फ़नफ़नाया हुआ था और उसकी चूत में घुसने को बेकरार था। मैंने उसको आराम से अपने नीचे सेट किया और फ़िर उसकी दोनों टाँगों से अपनी टाँगे लपेट कर ऐसे फ़ँसा दिया कि वो ज्यादा हिला न सके। इसके बाद मैंने अपने दाहिने हाथ को उसके काँख के नीचे से निकाल कर उसके कंधों को जकड़ते हुए उसके ऊपर आधा लेट गया। मेरा लन्ड अब उसकी चूत के करीब सटा हुआ था। अपने बाँए हाथ से मैंने उसकी दाहिनी चुची को संभाला और इस तरह से उसके छाती को दबा कर उसको स्थिर रखने का जुगाड़ कर लिया। पक्का कर लिया कि अब साली बिल्कुल भी नहीं हिल सकेगी जब मैं उसकी चूत को फ़ाड़ूंगा। सब कुछ मन मुताबिक करने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो अपने हाथ से मेरे लन्ड को अपने चूत की छेद पर लगा दे। और जैसे हीं उसने मेरे लन्ड को अपनी चूत से लगाया, मैंने जोर से कहा, “अब बोली साली….कि चोदो मुझे…बोल नहीं तो साली अब तेरा बलात्कार हो जाएगा। लड़की के न्योता के बाद हीं मैं उसको चोदता हूँ…मेरा यही नियम है।”

वो भी अब चुदने को बेकरार थी सो बोली, “चोदो मुझे….”

मैं बोला, “जोर से बोल कि तेरी माँ सुने….बोल कुतिया….जल्दी बोल मदर्चोद….”

वो भी जोर से बोली, “चोदो मुझे, अब चोदो जल्दी…आह…”.और उसकी आँख बन्द हो गयी।

मैंने अब अपना लन्ड उसकी चूत में पेलना शुरु कर दिया। धीरे-धीरे मेरा सुपाड़ा भीतर चला गया और इसके बान वो दर्द महसूस की। उसका चेहरा बता रहा था कि अब उसको दर्द होने लगा है। मैं उसके चेहरे पर नजर गड़ाए था और लन्ड भीतर दबाए जा रहा था। मै रुका तो उसको करार आया वो राहत महसूस की और आँख खोली।

मैं पूछा, “मजा आ रहा था?”

रीना बोली,”बहुत दर्द हुआ था….”।

मैं बोला – अभी एक बार और दर्द होगा, अबकि थोड़ा बरदास्त करना”।

मैंने अपना लन्ड हल्का सा बाहर खींचा और फ़िर एक जोर का नारा लगाया, “मेरी रीना रंडी की कुँआरी चूत की जय….रीना रंडी जिन्दाबाद….” मैंने इतनी जोर से बोला कि बाहर तक आवाज जाए। इस नारे के साथ हीं मैंने अपना लन्ड जोर के धक्के के साथ “घचाक” पूरा भीतर पेल दिया।

रीना दर्द से बिलबिला कर चीखी, “ओ माँ….मर गई……इइइइस्स्स्स्स्स्स्स्स अरे बाप रे…अब नहीं रे….माँ….” वो सच में अपनी माँ को पुकार रही थी।” पर एक कुँआरी लड़की की पहली चुदाई के समय कभी किसी की माँ थोड़े न आती है, सो बिन्दा भी सब समझते हुए बाहर हीं रही और मैं उसकी बेटी की चूत को चोदने लगा। घचा-घच….फ़चा-फ़च….घचा-घच….फ़चा-फ़च…..। रीना अब भी कराह रही थी और मैं मस्त हो कर उसके चेहरे पर नजर गड़ाए, उसके मासूम चेहरे पर आने वाले तरह-तरह के भावों को देखते हुए उसकी चूत की जोरदार चुदाई में लग गया।

रीना के रोने कराहने से मुझे कोई फ़र्क नहीं पर रहा था। आज बहुत दिन बाद मुझे कच्ची कली मिली थी, और मेरी नजर तो अब इसके बाद की संभावनाओं पर थी। घर में रीना के बाद भी दो और कच्ची कलियाँ मौजूद थीं। मैं रीना को चोदते हुए मन हीं मन रागिनी का शुक्रिया कर रहा था जो वो मुझे यहाँ बुलाई। करीब दस मिनट की कभी धीरे तो कभी जोर के धक्कमपेल के बाद जब मैं झड़ने के करीब था तो रीना का रोना लगभग बंद हो गया था। मैं रीना को बोला की अब मैं झड़ने वाला हूँ तो वो घबड़ा कर बोली, अब बाहर कीजिए, निकालिए बाहर, खींचिए न उसको मेरे अंदर से” और वो उठने लगी।

मगर मैं एक भार फ़िर उसको अपनी जकड़ में ले चुका था। पहली बार चूद रही थी, सो मैंने भी सोंचा कि उसको मर्द के पानी को भी महसूस करा दूँ। मैं रीना की चूत को अपने पानी से भर दिया।

वो घबड़ा रही थी, बोली – “बाप रे, अब कुछ हो गया तो कितनी बदनामी होगी। मैं अब निश्चिन्त हो कर अपना लन्ड बाहर खींचा, एक फ़क की आवाज आई। रीना की चूत एकदम टाईट थी, अभी भी मेरे लन्ड को जकड़े हुए थी।

मैंने रीना को कहा की अब वो पेशाब कर ले, ताकि जो माल भीतर मैंने गिराया है उसका ज्यादा भाग बाहर निकल जाए, और पेशाब से उसकी चूत भी थोड़ा भीतर तक धुल जाए। चुदाई के खेल के बाद पेशाब करना बेहतर हैं समझ लो इस बात को”, मैंने उसको समझाया।

वो अब कपड़े समेटने लगी तो मैंने कहा, “अब इस बार ऐसे बाहर जाने में क्या प्रौब्लम हैं चुदने के पहले तो नंगा बाहर जा कर मूती थी तुम?”

मैं देख रहा था कि अब वो थोड़ा शान्त हो गई थी और उसका मूड भी बेहतर हो गया था।

मेरे दुबारा पूछने पर बोली, “अब ऐसे जाने में मुझे शर्म आएगी?”

मैं पूछा, “क्यूँ भला…”।

वो सर नीचे कर के कही, “तब की बात और थी, अब मैं नई हूँ… पहले मैं लड़की थी और अब मैं औरत हूँ तो लाज आएगी न शुरु में सब के सामने जाने में…।”

मुझे शरारत सुझी, सो मैंने सब को नाम ले ले कर आवाज लगाई, “रागिनी…बिन्दा….रूबी….रीता…सब आओ और देखो, रीना को अब तुम लोग के सामने आने में लाज लग रहा है…मेरा सब माल अपने चूत में ले कर बैठी है बेवकूफ़…, बाहर जाकर धोएगी भी नहीं” कहते हुए मैं हँसने लगा।

मेरी आवाज पर रागिनी सबसे पहले आई और रीना की चूत में से उसकी जाँघो पर बह रहे पानी देख कर मुस्कुराई, “आप अंकल इस बेचारी की कुप्पी पहली हीं बार में भर दिए, ऐसे तो कोई सुहागरात को अपनी दुल्हन को भी नहीं भरता है” और वो कपड़े से उसकी चूत साफ़ करने लगी।

रीना शर्मा तो रही थी पर चुप थी। मैं भी बोला, “अरे सुहागरात को तो लड़कों को डर रहता है कि अगर दुल्हन पेट से रह गई तो फ़िर कैसे चुदाई होगी…. मैं तो हर बार नई सुहागरात मनाता हूँ। वैसे भी इतनी बार मैं निकालता हूँ कि मेरे वीर्य से स्पर्म तो खत्म ही हो गये होंगे, फ़िक्र मत करों, यह पेट से नहीं रहेगी।

Updated: July 10, 2019 — 9:28 pm
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