अंकल और आंटी दोनों की चुदाई

हैल्लो दोस्तों, आज में जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ वो आज से करीब 6 महीने पहले की है. में गुजरात से हूँ और मेरी उम्र 26 साल है. मेरी छाती 38 इंच, कमर 30 इंच है और मेरा लंड 6 इंच का है. आज में आपको जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ वो एक अंकल, आंटी और मेरी है.

यह एकदम सच्ची कहानी है जिसमें मैंने आंटी को चोदा उनके साथ बहुत मज़े किए और वैसे में सेक्सी कहानियाँ पिछले कुछ सालों से पढ़कर उन सभी के मज़े लेता आ रहा हूँ और ठीक वैसी ही एक सच्ची घटना जो मेरे साथ घटी उसको में आपके लिए लेकर आया हूँ. में उम्मीद करता हूँ कि यह आपको जरुर पसंद आएगी और आप इसको पढ़कर बहुत मज़े करेंगे.

दोस्तों आज से करीब 6th महीने पहले में अहमदाबाद मेरे एक काम से गया हुआ था और वहां पर में अपने एक बहुत अच्छे दोस्त के फ्लेट में रुका हुआ था. वैसे अहमदाबाद में बहुत गर्मी पड़ती है इसलिए रात को खाना खाने के बाद मैंने अपने दोस्त की बीवी से कहा कि आप मेरा बिस्तर आज छत पर लगा देना, मुझे यहाँ पर बहुत गर्मी लग रही है तो में आज छत पर ही सो जाऊंगा.

फिर भाभी ने मेरे कहने पर मेरा बिस्तर छत पर लगा दिया और तब मैंने ऊपर जाकर देखा कि छत पर पहले से ही एक अंकल जिनकी उम्र शायद 45 साल और एक आंटी जिनकी उम्र शायद 40 साल की थी वो दोनों सोए हुए थे और उनका बिस्तर मेरे पास ही था. अंकल बीच में सोए हुए थे और उनके एक तरफ आंटी और दूसरी तरफ में सोया हुआ था.

रात को करीब एक बजे अचानक से मेरी नींद खुल गई तो मैंने देखा कि अंकल मेरे पैरों पर अपना पैर रगड़ रहे थे. मैंने उस समय बरमूडा पहना हुआ था और ऊपर कुछ नहीं पहना था और उन अंकल ने लूँगी पहनी हुई थी. अब अंकल अपना पैर मेरे पैर पर मेरे घुटनों के नीचे रगड़ रहे थे. उनको शायद लग रहा था कि में अब भी सो रहा हूँ, लेकिन मेरी नींद तो उनकी उस हरकत की वजह से कब की उड़ चुकी थी. अब मुझे नींद कहाँ आनी थी में मन ही मन बहुत चकित था और अब अंकल धीरे धीरे अपना पैर ऊपर की तरफ ले जा रहे थे और वो अब तक मेरी जाँघो तक पहुंच गये थे.

मेरा लंड तो एकदम टाइट हो गया था. फिर उसने अपने हाथों से मेरी जाँघ पर हाथ फेरना शुरू किया, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और अब वो अपने एक हाथ से उनका लंड पकड़कर मुठ मार रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी जाँघो को सहला रहे थे. फिर कुछ देर बाद उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रखा और मेरे बूब्स पर हाथ फेरने लगे.

उसके बाद उन्होंने मेरी निप्पल पर उंगली फेरना शुरू किया और थोड़ी देर बाद उसने मेरे बरमूडे के नीचे से अपना एक हाथ डाल दिया और वो मेरे बरमूडे के ऊपर से हाथ फेरने लगे. फिर अंकल ने मेरे बरमूडे के नीचे से मेरा 6 इंच का लंड बाहर निकाला और उसको सहलाने लगे और वो अपने दूसरे हाथ में अपना लंड पकड़कर मुठ मारने लगे. फिर तभी थोड़ी देर बाद वो नीचे आ गये और मेरा लंड अपने मुहं में डालकर चूसने लगे.

फिर उन्होंने तुरंत मेरा पूरा लंड अपने मुहं में डाल दिया और अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो में उनके मुहं में अपने लंड को धकका देने लगा. अब वो दूसरी तरफ सो गये और उन्होंने अपनी लूँगी को पूरी उठाकर उनकी गांड को मेरी तरफ कर दिया, लेकिन मुझे उसमे कोई रूचि नहीं थी और उनकी गांड बहुत गोरी और उनके बदन पर एक भी बाल नहीं था, पूरा का पूरा एकदम साफ था.

फिर मैंने उनको मना कर दिया कि मुझे उसमे कोई भी रूचि नहीं है, मुझे सिर्फ़ औरतों में रूचि है तो वो बोले में तुम्हे बहुत मज़ा करवाऊंगा, लेकिन मैंने उनकी कोई भी बात को नहीं माना. तभी मेरे दिमाग़ में एक बात आई दोस्तों उनके पास में जो आंटी सोई हुई थी वो बहुत सुंदर और गोरी भी थी, उनके बूब्स बहुत बड़े आकार के और बहुत गोल गोल थे. उनके बारे के सोचकर मैंने उनसे कहा कि अगर आंटी मुझे उनकी चुदाई करने दे तो में आपका हर एक काम करूंगा. आप मुझे जो कुछ भी कहोगे में जरुर करूंगा.

अब वो बोले कि हाँ ठीक है, लेकिन सबसे पहले तुम्हे मेरी गांड मारनी होगी तो मैंने कहा कि मुझे आपकी हर बात मंजूर है. फिर दूसरे दिन दोपहर को में खाना खाने के बाद उनके घर पर गया. मुझे तो अभी तक भी आंटी के साथ चुदाई के ही विचार मन में आ रहे थे और मैंने दरवाजे पर लगी घंटी बजाई तो आंटी ने दरवाजा खोला और वो मेरी तरफ मुस्कुराई.

में तुरंत समझ गया कि अंकल ने इनको अब तक वो सब बता दिया होगा, उस घर में आंटी और अंकल ही रहते थे. उसके दो बेटे अमेरिका में थे वो वहीं पर रहकर अपनी नौकरी कर रहे थे और साल दो साल में कुछ दिनों के लिए वो यहाँ आते थे.

अब मैंने देखा कि आंटी ने दो गद्दे नीचे जमीन पर लगाए हुए थे और थोड़ी देर बाद अंकल स्नान करके बाथरूम से बाहर आए और उन्होंने अपने बदन पर एक टावल लपेटा हुआ था. मैंने देखा कि उनके पूरे बदन पर एक भी बाल नहीं था और उनके बूब्स बिल्कुल लड़कियो जैसे हल्के हल्के उभरे हुए थे.

अब में नीचे उस गद्दे पर लेट गया, तभी मेरे पास आंटी भी तुरंत लेट गयी और अब वो धीरे धीरे मेरे बिल्कुल पास आ गयी और मुझे अपनी अजीब सी नजर से देखने लगी, तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम बहुत ही जवान, सुंदर हो और तुम्हारा यह बदन भी बहुत अच्छा है.

फिर आंटी ने मुझसे कहा कि तुम्हारे अंकल को तो मुझमें बिल्कुल भी रूचि ही नहीं है, उनको तो हमेशा लड़के ही पसंद है, वो पिछले कई महीनों से मेरे साथ सोए भी नहीं है इसलिए मुझे तो अब अपनी चुदाई करवाने की बहुत इच्छा होती है, लेकिन में क्या करूं? इसलिए आज तो तुम मेरे साथ जी भरकर मेरी जमकर चुदाई करना मेरे राजा और उन्होंने यह बात कहते हुए मुझे ज़ोर से किस कर दिया. फिर में भी अब उनके बूब्स को दबाने लगा और इतने में अंकल आ गये और उन्होंने अपना टावल उतार दिया था.

फिर मैंने देखा कि उनका लंड बिल्कुल छोटे आकार का था, वो करीब चार इंच का था और अब अंकल भी मुझे किस करने लगे और मेरी एक तरफ आंटी थी और दूसरी तरफ अंकल, वो दोनों बराबर मेरे बदन से खेल रहे थे. अब आंटी ने मेरे कपड़े उतार दिए और वो खुद भी तुरंत पूरी नंगी हो गई थी. मैंने देखा कि उनका पूरा बदन बहुत गोरा चिकना था और उनकी कमर थोड़ी सी मोटी थी.

अब वो दोनों मेरे लंड को मेरी अंडरवियर से बाहर निकालकर चूसने लगे, तब आंटी ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए खुश होकर कहा कि तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा है, वाह आज तो मुझे बड़ा मज़ा आ जाएगा. फिर अंकल ने मेरे लंड पर तेल लगाया और वो मुठ मारने लगे और कुछ ही सेकिंड में उन्होंने मेरा लंड पूरा चिकना कर दिया.

उसके बाद उन्होंने अपनी गांड और लंड पर भी बहुत सारा तेल लगाया और फिर वो मेरे सामने कुत्ते की तरह अपने दोनों घुटनों पर बैठ गये और फिर उन्होंने मुझसे इशारा करते हुए अपनी शैतानी हंसी के साथ कहा कि जल्दी से अब पूरा लंड इसके अंदर डाल दे. फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड के छेद पर रखकर अपना पूरा ज़ोर लगाकर धक्का दिया, लेकिन लंड अंदर जा ही नहीं रहा था.

मैंने महसूस किया कि उनकी गांड बहुत टाईट थी और अब मैंने उनके दोनों कूल्हों को अपने दोनों हाथों से पूरा फैला दिया और उसके बाद मैंने दोबारा अपने लंड को ज़ोर का धक्का दिया, सबसे पहले मेरा सिर्फ़ टोपा ही अंदर गया और मैंने थोड़ा ज्यादा ज़ोर से धक्का लगाया, जिसकी वजह से अब मेरा पूरा लंड अंदर चला गया और अब में लगातार धक्के लगाने लगा और आंटी अंकल के लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर उनकी मुठ मारने लगी, जिसकी वजह से थोड़ी देर बाद अंकल के अपना सफेद रंग का गरम वीर्य उनके हाथ पर निकाल दिया.

फिर उसके बाद वो अपने लंड के साथ धीरे धीरे शांत होने लगे और मैंने उनकी गांड से अपना लंड भी बाहर निकाल लिया. अब अंकल हमारे पास से उठकर दूसरे कमरे में चले गये और फिर उनके चले जाने के बाद आंटी तो जैसे मुझ पर भूखी बिल्ली की तरह टूट ही पड़ी, क्योंकि वो कई महीने से प्यासी जो थी. फिर उन्होंने मेरे पूरे बदन पर किस किया और मेरे लंड को तो उन्होंने पूरा का पूरा अपने मुहं में डाल दिया और वो लोलीपोप की तरह मेरे लंड का टोपा चूसने लगी जिसकी वजह से में तो पूरा मदहोश हो गया था.

फिर उन्होंने अपने बूब्स मेरे पूरे बदन पर रगड़ने शुरू किए तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे बदन पर तो कितने बाल है तुम तो पूरे मर्द हो, एक मेरे पति किसी काम के भी नहीं है. फिर मैंने उनके कहा कि अभी तो असली मर्दानगी दिखानी बाकी है और तभी उन्होंने अपना एक बूब्स मेरे मुहं पर रख दिया. में उनके बूब्स की बड़ी बड़ी निप्पल को चूसने लगा और उनके बूब्स को अपने दांत से हल्के हल्के काटने लगा. उनके बूब्स बिल्कुल ढीले और लचीले थे.

फिर में उनके दोनों बूब्स को अपने दोनों हाथों में रखकर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और मैंने महसूस किया कि उनके बूब्स मेरे हाथों में भी नहीं समा रहे थे. उनका आकार बहुत बड़ा था.

फिर वो उल्टी लेट गयी और उन्होंने मुझे गांड मारने के लिए कहा तो मैंने उनके कहने पर अपने लंड को गांड के मुहं पर रखकर एक ज़ोर का धक्का देकर लंड को एक ही बार में पूरा अंदर डाल दिया और मैंने उनकी भी गांड मारी. फिर करीब 15 मिनट तक मैंने लगातार धक्के देकर उनकी गांड मारी. उनकी गांड बहुत बड़ी थी इसलिए उनको दर्द भी नहीं हो रहा था, शायद वो इससे पहले भी ना जाने कितने लंड अपनी गांड में खा चुकी थी.

फिर कुछ देर बाद वो मेरे ऊपर चढ़ गयी और अब वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उनकी चूत पर रगड़ने लगी. मैंने देखा कि उनकी चूत बहुत गीली और चिकनी हो चुकी थी. फिर मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया और वो मेरा सर अपनी चूत पर दबाने लगी और सिसकियाँ लेने लगी और अब मैंने उनकी पूरी चूत को अपने मुहं में डाल लिया और ज़ोर से चूसने लगा.

फिर तभी उनके मुहं से ज़ोर से चीखने की आवाज़ निकल गई उईईईईईई माँ आईईईईई वाह कितना मज़ा आ रहा है और ज़ोर से चाटो, मेरी पूरी चूत को आज तुम फाड़ दो, तुम कितना अच्छा चूसते हो? यह सब तुम मेरे पति को भी सिखाओ, उनको ऐसा कुछ भी नहीं आता. तुम तो बहुत बड़े जादूगर निकले चलो अब जल्दी से मुझे अपना वो असली वाला जादू भी दिखा दो जिसके लिए मैंने तुम्हे यहाँ पर बुलाया है.

फिर मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत में डाल दिया और अब में जीभ को चूत में अंदर बाहर करने लगा. फिर में कुछ देर बाद खड़ा हो गया और मैंने आंटी को टेबल पर लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को एक दूसरे से अलग कर दिया और फिर मैंने खड़े खड़े उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया. मेरा पूरा लंड फट से पूरा अंदर चला गया क्योंकि उनकी चूत आकार में बहुत बड़ी और गीली भी बहुत थी.

उसके बाद मैंने अपना लंड धीरे धीरे धक्कों के साथ अंदर बाहर करना शुरू किया और अपने दोनों हाथों से में उनके बूब्स को दबा रहा था और ऐसा करने में हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था. कुछ देर बाद वो भी मेरे साथ धक्के देने लगी और करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये.

मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी गीली चूत में डालकर अपने लंड से धक्का देकर चूत की गहराईयों में डाल दिया और मुझे ज्यादा चिकनाई होने की वजह से लंड के अंदर बाहर आने जाने का पता ही नहीं चला, लेकिन सच पूछो तो मज़ा बहुत आया और फिर मैंने देखा कि मेरी चुदाई की वजह से उनकी संतुष्टि अब उनके चेहरे पर साफ साफ झलक रही थी, वो बहुत खुश अपनी चुदाई से बड़ी खुश नजर आ रही थी. फिर उसके बाद में कुछ देर बाद बाथरूम में गया और अपने लंड को साफ किया. फिर कपड़े ठीक करके में अपने दोस्त के घर पर वापस आ गया, लेकिन उसके बाद भी जब तक में अपने दोस्त के पास रहा मैंने उनके साथ बड़े मज़े किए और उन दोनों को बहुत खुश किया.

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