अंकल ने मुझे लंड पर बैठाया

हैल्लो दोस्तों, में अंजलि एक बार फिर से हाजिर हूँ आप सभी चाहने वालों के सामने अपनी एक और सच्ची घटना को लेकर. दोस्तों आज में घर पर बिल्कुल अकेली हूँ और यह कहानी में बिल्कुल नंगी होकर लिख रही हूँ और में बीच बीच में अपनी चूत और गांड में पेन्सिल को डालकर सेक्स भी करूँगी. क्या करूँ? मेरी शादी जो अब तक नहीं हुई है, इसलिए अभी तो मुझे पेन्सिल से ही काम चलमना पड़ेगा, तो चलो अब आगे बढ़ते है.

में अपने कॉलेज प्रेसीडेंट के यहाँ से आने के बाद में आते ही सो गयी. क्या करूँ? बहुत तक जो गयी थी. में उस रात को इतनी बार जो चुदी थी कि मेरी चूत और कूल्हे दोनों में बहुत दर्द हो रहा था, वहां पर मेरी बहुत जमकर चुदाई हुई.

फिर में अगले दिन उठी और नाश्ता करने के लिए गयी. अब की बार मैंने एक छोटी सी पेंट पहन रखी थी और उसके ऊपर टाईट टॉप.

अब में अंकल को अपनी मटकती हुई गांड को दिखाती हुई बैठ गयी. में साफ देख रही थी कि अंकल का लंड मेरी गांड और एकदम गोल आकार के उभरे हुए बूब्स के देखकर ललचाने लगा था, जिसकी वजह से वो तुरंत उठकर खड़ा हो चुका था और हम लोग उस दिन सोफे पर नाश्ता कर रहे थे कि तभी नाश्ता करते समय राज ने मुझसे कहा कि वो आज अपने किसी जरूरी काम की वजह से दिल्ली से बाहर जा रहा है और वो कल तक वापस आ जाएगा और फिर वो नाश्ता करके चला गया, लेकिन अंकल अब भी वहीं पर बैठे हुए थे और वो अपनी नजर से मुझे चोरी चोरी कभी मेरी तरफ तो कभी मेरे बूब्स की तरफ देख रहे थे, जो कि मेरी उस टाईट टी-शर्ट से कुछ ज्यादा ही उभर रहे थे. अब मैंने मन ही मन सोचा कि चलो ना क्यों थोड़े से मज़े और भी ले लिए जाए.

उस वक़्त अंकल ने एक सिंपल पजामा ही पहन रखा था और मैंने चुपके से अपनी पेंट की चेन को खोल दिया और फिर धीरे धीरे मैंने अपने पैर ऊपर की तरफ करके टेबल पर इस तरह से रख लिए कि जिसकी वजह से मेरी चूत हल्की सी दिखने लगे और में कुर्सी पर अख़बार लेकर पढ़ने का नाटक करने लगी. में अब चुपके से देखने लगी कि अंकल मेरी चूत की तरफ देखकर अपना लंड मसल रहे थे. फिर थोड़ी ही देर में उनका पजामा गीला सा हो गया और लंड नीचे बैठ गया जिसको देखकर में तुरंत समझ गयी कि उनके लंड ने ज्यादा जोश में आकर अपना वीर्य छोड़ दिया है.

फिर मैंने अंकल से पूछा क्यों अंकल क्या हुआ आपका पजामा एकदम ऊपर था फिर गीला हुआ और फिर नीचे बैठ गया? तो अंकल मेरी बात को सुनकर हंसने लगे और बोले कि अरे यह सब प्राक्रतिक है और यह कहते हुए उन्होंने एकदम से ही अपने लंड को पेंट से बाहर निकाला जो वीर्य से पूरा गीला था और अब वो अपने लंड की तरफ इशारा करके कहने लगे कि यह बेवकूफ क्या करे? यह बार बार तुम्हे देखकर जोश में आकर खड़ा हो जाता है और कुछ देर बाद अपना पानी छोड़कर ठंडा होकर नीचे बैठ जाता है.

फिर मैंने बिल्कुल अंजान बनकर उनसे पूछा अब क्या होगा? तब उन्होंने कहा कि कुछ नहीं इसका इलाज़ मेरे पास है, में बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ कि यह क्या चाहता है, लेकिन वो इलाज अभी नहीं हो सकता, इसका इलाज में आज रात को कर दूंगा और इतना कहकर वो उठ गए और मेरे कूल्हों को दबाकर अपने ऑफिस जाने के लिए चले गये.

अब में तुरंत समझ गई कि अंकल आज मेरी चुदाई करने के पूरे मूड में है और उनका लंड लेने में बहुत मज़ा आएगा और मैंने मन ही मन में सोचा कि यार तो फिर क्यों ना अभी से ही अपनी आज रात की होने वाली उस चुदाई की तैयारी कर ली जाए यह बात सोचकर में बहुत खुश होकर बाजार चली और गयी मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और फिर में वहाँ से एक सूट लेकर आ गई उसके साथ में बिकनी और ब्रा भी थी और वो तीनों ही जालीदार थे, वो नाईट सूट मेरे घुटनों तक का था और फिर घर पर आकर मैंने उस ब्रा को कैंची से काटकर इतना छोटा कर लिया कि वो बस मेरे बूब्स को हल्का सा ही ढक सके और बिकनी को मैंने गांड की तरफ से काटकर एक धागा सा बना दिया जिसकी वजह बस मेरी गांड का छेद ही चुप जाए, लेकिन मैंने चूत की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया.

फिर रात को खाना खाने के समय में जब उनके सामने अपने वो कपड़े पहनकर पहुंची, जिनमें में बहुत हॉट सेक्सी दिख रही थी. फिर अंकल मुझे अपनी खा जाने वाली नजर से घूर घूरकर देखते ही रह गये और उनकी नजर मेरे गोरे जिस्म से हटने को तैयार ही नहीं थी और फिर मैंने उनसे पूछ लिया की क्यों में इस ड्रेस में कैसी लग रही हूँ?

अंकल ने कहा कि तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो इतने कम कपड़े तुम्हारे ऊपर ठीक है, लेकिन अगर तुमने कपड़े पहन ही नहीं रखे होते तो तुम और भी ज्यादा अच्छी लगती, अंजलि तुम इतने कम कपड़े क्यों पहनती हो?

फिर मैंने कहा कि पता नहीं अंकल जब मर्द मेरी चूत को, कूल्हों को और मेरे बूब्स के घूरते है तो मुझे उनको यह सब करता हुआ देखकर बहुत मज़ा आता है और मुझे बहुत ख़ुशी मिलती है और उसके बाद हम दोनों खाना खाने लगे.

फिर अंकल बोले की अंजलि तुम्हे याद है कि जब तुम छोटी थी तब तुम कैसे मेरी गोद में बैठकर खाना खाती थी, आज भी वैसे ही खाओ ना, मैंने कहा कि अभी लो और फिर में उनकी गोद में जाकर बैठ गई, लेकिन में जानबूझ कर इस तरह से बैठी कि मेरी गांड का छेद ठीक उनके लंड के ऊपर एकदम सही निशाने पर आ जाए. में अब महसूस कर सकती थी कि मेरे उनकी गोद में बैठते ही कैसे उनके लंड का आकार बढ़ने लगा था?

फिर थोड़ी देर के बाद अंकल ने खाना खाते समय जानबूझ कर मेरे ऊपर दाल को गिरा दिया जो मेरे कपड़ो से मेरे बूब्स तक जा पहुंची और उन्होंने मुझसे कहा अरे यार प्लीज मुझे माफ़ करना लाओ में साफ कर दूँ और अब वो मेरे बूब्स के ऊपर से डाल को साफ करने के बहाने से मेरे बूब्स को दबा दबाकर मज़े लेने लगे और में बिल्कुल शांत उसको देखती रही. कुछ देर बाद उन्होंने डाल को साफ कर दिया.

अब मैंने उनसे कहा कि अरे यह तो अभी भी गंदी है, क्यों ना में इसे उतार ही देती हूँ और मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो एकदम चकित होकर मेरी तरफ देखने लगे और इतना कहकर मैंने तुरंत अपना नाइट सूट उतार दिया और अब मेरा गोरा बदन बड़ा ही साफ सेक्सी दिखने लगा, जिसको वो अपनी चकित नजर से घूर घूरकर देख रहे थे.

तभी अंकल खड़े हुए और वो मुझसे बोले कि अंजलि तुम्हारे कंधे पर एक तिल है तो मैंने उनसे पूछा क्या आपको अभी भी याद है, अरे हाँ एक तिल तो शायद तुम्हारे बूब्स पर भी तो था, चलो देखे कितने बड़े है ज्योतिष कहते है कि जिस लड़की के बूब्स के ऊपर तिल होता है उसके बूब्स पीने चाहिए, दबाने चाहिए, चूसने चाहिए.

फिर मैंने उनसे कहा कि माफ़ करना अंकल मेरे बूब्स पर तो कोई भी तिल नहीं है. तभी उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता फिर वो मेरे पास आए और उन्होंने मेरी ब्रा को फाड़कर फैंक दिया और वो मेरे बूब्स को दबाकर देखने लगे और चुपके से उन्होंने एक पेन से एक तिल का निशान लगा दिया और बोले देखो मैंने कहा था ना है.

फिर यह बात बोलकर वो मेरे बूब्स को चूसने लगे और उन्हे दबाने लगे. फिर वो खड़े हुए और बोले वैसे जहाँ तक मुझे याद है एक तिल तुम्हारी चूत पर भी है, तो मैंने कहा कि नहीं है, उन्होंने कहाँ कि चलो दिखाओ फिर उन्होंने मुझे टेबल पर लेटा दिया और मेरे पैर नीचे कर दिए जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गयी और उसके बाद उन्होंने मेरी पेंटी भी फाड़ कर फैंक दी और अब वो मेरी गोरी गोरी चूत को देखने लगे और बोले कि अंजलि मुझे मालूम है जिसकी चूत में तिल होता है उसे हर रोज़ चूसना चाहिए और इसके अंदर लंड डलवाना चाहिए.

उसके बाद उन्होंने पहले की तरह मेरी चूत पर चुपके से एक तिल बना दिया और बोले कि मैंने कहा था कि है. अब मैंने कहा कि अजीब बात है मैंने तो इससे पहले कभी नहीं देखा और मुझे आपकी इस बात पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा, आप यह सब क्या कह रहे है.

फिर वो जल्दी से नीचे झुककर मेरी चूत को चूसने लगे और थोड़ी देर बाद हम फिर से खाना खाने के लिए आ गये. में उस समय बिल्कुल नंगी थी और में फिर से अंकल की गोद में जाकर बैठ गयी और कुछ देर बाद मैंने उनसे पूछा कि अंकल यह क्या है जो मुझे बहुत चुभ रहा है, तो अंकल ने झट से नंगे होकर कहा कि यह लंड है मैंने पहले भी कहा था ना कि यह तुम्हारी चूत को देखकर ही खड़ा हो जाता है. अब मैंने उनसे कहा कि प्लीज़ आप अब इसका कुछ करो.

में इससे बहुत परेशान हो रही हूँ और अब अंकल उठकर कुर्सी पर बैठ गये और वो मुझसे बोले कि अच्छा दो मिनट तुम एक काम करो, तुम यहाँ पर आओ और में उनके कहने पर उनके पास चली गयी. फिर अंकल ने मेरे कूल्हों को अपने दोनों हाथों से खोल दिया और मेरे छेद को चौड़ा करके अपने लंड पर रख दिया और उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि तुम एक झटके से नीचे बैठ जाओ, तो में नीचे बैठ गयी और देखते ही देखते उनका 6 इंच लंबा लंड मेरी गांड में घुस गया और में ज़ोर से चिल्ला उठी.

फिर मैंने उनसे बोला कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है, तो अंकल ने मुझसे कहा कि चुपकर कुतिया साली छिनाल बिल्कुल चुप हो जा अभी दो मिनट बाद तुझे भी बहुत मज़ा आएगा और उसके बाद उन्होंने नीचे बैठ बैठे ही धक्के लगाने शुरू किए और में भी कुछ देर बाद अपनी गांड को उछालने लगी, क्योंकि मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था और फिर कुछ देर लगातार जोरदार धक्के देने के बाद उन्होंने अपना वीर्य मेरी गांड में ही छोड़ दिया और उसके बाद उन्होंने खड़े होते हुए मुझे अपनी गोद में उठाकर वो कमरे में ले गये और उन्होंने मुझसे कहा कि चल अंजलि अब तू मेरे पूरे बदन पर तेल से मालिश कर दे, चल अब तू मुझे अपने हाथों का कमाल दिखा. फिर मैंने उनसे पूछा ऐसा क्यों? मेरे यह सब करने से क्या होगा?

वो बोले कि इस तरह से तो मेरे लंड का इलाज होगा, वही इलाज जिसकी इसको बहुत जरूरत होती है और फिर मैंने उनके कहने पर तेल लेकर उनके बदन की मालिश करना शुरू कर दिया. कुछ देर बाद वो अपनी गांड को दिखाकर बोले कि यहाँ पर भी तेल लगाओ और में उनके कहने पर उनकी गांड की भी मालिश करने लगी.

फिर कुछ देर बाद उन्होंने एक दूसरा तेल निकाला और वो बोले कि इस तेल को तुम अब मेरे लंड पर मल दो और तुम अब ऐसा करो कि अपनी गांड को मेरे पास लाकर आराम से लेटकर मालिश करो, लेकिन प्लीज आराम से करना अपना ही समझना तो मैंने हंसकर कहा कि ठीक है और फिर में बैठकर उसी तरह से मालिश करने लगी और लंड को बड़ा होते हुए देखने लगी. उनका लंड देखते ही देखते कुछ ही मिनट में अपनी औकात में आ गया.

तभी अंकल मेरी गांड को दबाने लगे और मैंने उनसे पूछा आप यह क्या कर रहे हो? तो अंकल ने कहा कि में अपनी हथेलियों की मालिश कर रहा हूँ और फिर वो बोले की अरे भाई हाथ से ही मलती रहोगी क्या? अब इसे अपने मुहं में लेकर चूसो.

फिर में अब उनके लंड को चूसने लगी और वो मेरी चूत में ऊँगली डालने लगे. अब मैंने उनसे एक बार फिर से पूछा कि आप यह क्या कर रहे हो? तो वो बोले कि में अपनी ऊँगली की मालिश कर रहा हूँ और उसके बाद वो खड़े हुए और मुझे लेकर पलंग पर पटक दिया और अब उन्होंने मेरी चूत में अपना लंड दिया और मेरे बूब्स को मेरे पूरे बदन को कभी दबाते तो कभी चूसते और फिर वो धक्के लगाने लगे.

में भी अपनी गांड को उछालने लगी और फिर कुछ ही देर में हम दोनों शांत हो गये. उसके बाद अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह में दिया और में उसे चूसने लगी और सारा का सारा वीर्य पी गयी और फिर हम दोनों वहीं एक दूसरे के ऊपर सो गये.

Updated: October 12, 2016 — 9:07 am
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